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इस हिंदी को समझें भी तो कैसे?

लखनऊ/ब्यूरो

Updated Fri, 14 Sep 2012 01:00 PM IST
how to understand this kind of hindi
हम हिंदी में लिखे चेक का स्वागत करते हैं, हम हिंदी में भरे गए आवेदन पत्रों को सहर्ष स्वीकार करते हैं, आप हमसे हिंदी में पत्र व्यवहार कर सकते हैं, हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, हिंदी को अपनाएं- बैंकों या सरकारी कार्यालयों में लगी ऐसी पंक्तियां किसी भी हिंदी प्रेमी को उत्साह से भर देती हैं, लेकिन अगर आप ऐसी जगहों पर हिंदी में कामकाज करने की कोशिश करें तो आपको तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। हिंदी के फार्म इस हद तक दुरुह होते हैं कि आपको या तो अंग्रेजी से मिलान कर उन्हें समझने की कोशिश करनी होती है या फिर कर्मचारियों की मदद लेनी होती है।
सरकारी कार्यालयों में ऐसी हिंदी के कुछ उदाहरण देखिए- जीवित और भयमुक्त रहने के लिए सिद्धता चाहिए, हमें जमा राशियों की सन्निकट देय तिथि की सूचना दस्ती सुपुर्दगी द्वारा नहीं चाहिए, जमाराशि को प्रोद्भूत ब्याज के साथ परिपक्वता तिथि पर उसी अवधि के लिए प्रभावी ब्याज की दर पर स्वत: नवीकृत करें, मैं उक्त शर्तों और अनुबंधों से आबद्ध रहना स्वीकार करता हूं और सहमत हूं, जिसमें आपके उन सीमित दायित्वों को अलग करना भी सम्मिलित है, नामिती की ओर से मेरी अवयस्क की अवयस्कता के दौरान मृत्यु की दशा में उक्त खाते में जमाराशि को प्राप्त करने के लिए नियुक्त करता हूं, निवेशी ने साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत विलेख पत्र उपरोक्त दिन, माह एवं वर्ष को निष्पादित कर दिया।

वैसे, फार्मों की ही क्यों कहें, जगह-जगह लगी सूचनाएं में भी ऐसी ही हिंदी का प्रयोग दिखता है। हम हिंदी की हंसी उड़ाने के लिए अक्सर बताए जाने वाले ट्रेन के हिंदी नाम लौहपथगामिनी का प्रयोग तो नहीं करते, लेकिन जगह-जगह ऊपरगामी सेतु या ऐसे कठिन प्रयोग भी लोगों को अचरज में डालने के लिए पर्याप्त हैं। हिंदी के कई विद्वान मानते हैं कि हिंदी का प्रयोग भी सत्य बोले, प्रिय बोले की तर्ज पर होना चाहिए।

हिंदी का प्रयोग करने के उत्साह में ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए, जो आम जन की समझ और पहुंच के बाहर हो और जिसके लिए शब्दकोश लेकर बैठना पड़े। हालांकि इसमें कुछ मतभेद भी है। कुछ विद्वान यह भी कहते हैं कि अगर हम सरलीकरण ही करते रहे तो बहुत सारे शब्द हमारे प्रयोग से बाहर हो जाएंगे।
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