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विवादों के बाद कैग पर दिए बयान से पलटे नारायणसामी

नई दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी

Updated Sun, 11 Nov 2012 10:14 PM IST
narayanasamy denies report on multi member cag proposal
हाल के दिनों में भ्रष्टाचार के कई मामलों को उजागर करने वाले कैग (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) को बहुसदस्यीय बनाने के प्रस्ताव पर सरकार सक्रियता से विचार कर रही है। इस बात की जानकारी रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री नारायणसामी ने दी।
वैसे इस मुद्दे पर विवाद छिड़ते ही वे अपने बयान से पलट गए। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। हालांकि मंत्री का साक्षात्कार लेने वाली न्यूज एजेंसी पीटीआई अपने रुख पर कायम है। पीटीआई ने दावा किया है कि उसने वही लिखा है जो मंत्री ने कहा है।

कैग को बहुसदस्यीय बनाने का सुझाव पूर्व कैग वीके शुंगलू ने दिया था। रविवार को पीटीआई को दिए साक्षात्कार में नारायणसामी ने कहा था कि इस प्रस्ताव पर सरकार सक्रियता से विचार कर रही है। कैग का काम यह देखना है कि सरकार की एजेंसियां उचित तरीके से व्यय कर रही हैं या नहीं, लेकिन मेरी राय में कैग अपने अधिकार क्षेत्र से परे जाकर काम कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि यह मेरी निजी राय है, आधिकारिक नहीं।

नारायणसामी ने कहा कि कैग बहुत उतावले हो गए हैं और वह चाहते हैं कि सभी संवैधानिक संस्थाएं उनके मानदंडों के भीतर काम करें। इस साक्षात्कार के सामने आते ही विवाद छिड़ गया। विपक्ष और विभिन्न संगठनों ने सरकार पर हमला बोल दिया। इसके बाद नारायणसामी अपने बयान से पलट गए।

मंत्री ने कहा कि उन्होंने कैग को बहुसदस्यीय बनाने संबंधी बयान नहीं दिया था। उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। मंत्री ने कहा कि उन्होंने साक्षात्कार में शुंगलू समिति की छह रिपोर्टों पर विचार किए जाने की बात कही थी। पीटीआई रिपोर्ट ने खासतौर पर कैग के बारे में नहीं पूछा था और न ही मैंने कैग के बारे में कुछ कहा था।

और क्या कहा था--
नारायणसामी ने कहा था कैग की रिपोर्ट मसौदा रिपोर्ट होती है। पीएसी इन रिपोर्टों का अध्ययन करती है और संसद को अपनी राय देती है। इसके बाद केवल सरकार कार्रवाई कर सकती है। कैग ने हजारों रिपोर्ट जमा कराई है।

उसमें तमाम मुख्यमंत्रियों, राज्यों के मंत्रियों, अनेक राज्यों और केंद्र के अधिकारियों को आरोपित किया गया है। यदि हम कैग की रिपोर्ट को अंतिम मान लें तो कोई सीएम अपने पद पर नहीं रह पाएगा।

मंत्री ने कहा कि मूल समस्या यह है कि रिपोर्ट जमा होने से पहले सार्वजनिक हो जाती है। अब सवाल उठता है कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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