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1 लाख का इनामी मोस्ट वांटेड सुशील मूंछ गिरफ्तार

मेरठ/मुजफ्फरनगर/लखनऊ/ब्यूरो

Updated Thu, 22 Nov 2012 11:55 PM IST
most wanted sushil munchh arrested
बीते तीन दशक से आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त एक लाख के इनामी सुशील मूंछ को वेस्ट यूपी एसटीएफ ने जयपुर से दबोच लिया। मूंछ का पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड में आतंक था। उस पर यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली के अलग-अलग थानों में 41 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। वह कई गैंगवार और हत्याओं में शामिल रहा।
कई गैंगों से उसकी दुश्मनी चल रही थी। गिरफ्तारी के दौरान मूंछ के कब्जे से पोलो कार, दो मोबाइल और एटीएम कार्ड बरामद हुए, लेकिन कोई अस्त्र-शस्त्र नहीं मिला। इसको लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि ऐसे कारनामा यूपी पुलिस ही कर सकती है।

एडीजी (कानून व्यवस्था) अरुण कुमार ने लखनऊ और एसटीएफ के आईजी आशीष गुप्ता ने मेरठ में बताया कि मुजफ्फरनगर के गांव मथैड़ी थाना रतनपुरी निवासी सुशील मूंछ (60) की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ की टीम एसपी अनंत देव के नेतृत्व में जयपुर में डेरा डाले हुई थी। सटीक सूचना के आधार पर बुधवार रात करीब 10.30  बजे उसे जयपुर के पिंक स्क्वायर मॉल से ‘जब तक है जान’ फिल्म देख कर निकलते समय दबोच लिया गया। मूंछ के खिलाफ सर्वाधिक 30 मामले मुजफ्फरनगर में दर्ज हैं। उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार में तीन-तीन, गाजियाबाद में दो और मेरठ में एक मामला है। एक मामला हरियाणा में भी है।

मूंछ ने जरायम की दुनिया में 1973 में गांव भैंसी मुजफ्फरनगर निवासी कलीराम की हत्या से कदम रखा था। लेकिन इस केस में उसका नाम नहीं खुला था। 1983 में मूंछ ने छात्र नेता महेश शुक्ला की हत्या की थी। उसके खिलाफ थाना सिविल लाइन मेरठ में हत्या का केस दर्ज हुआ था। वर्ष 1991 में उसने मुजफ्फरनगर की नई मंडी में मुजफ्फरनगर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुरेंद्र कूकड़ा की चार साथियों सहित हत्या कर दी थी। इसके बाद शुरू हुए गैंगवार में करीब एक दर्जन हत्याएं हुईं।

1998 से नफीस कालिया के साथ उसका गैंगवार चला। इसमें उसने पहले नफीस के साथियों को एक-एक कर मरवाया। 2004 में नफीस की भी गुड़गांव में हत्या करा दी गई। देहरादून में 1992 में वकील हरि गर्ग और 1994 में उनके भाई की हत्या मूंछ ने जेल में रहते हुए करवाई थी। 2003 में मूंछ जेल से निकला और पांच साल तक अपराध करता रहा। मुजफ्फरनगर के रतनपुरी में 2008 में हुई हत्या के बाद पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। 2010 में इनाम की राशि एक लाख रुपये तक पहुंच गई। हाल ही में इनाम की यह राशि दो लाख रुपये करने की संस्तुति की गई थी।

मूंछ पर मेरठ में बसपा के जिला पंचायत सदस्य संजय गुर्जर की हत्या के लिए बदन सिंह बददो को शार्प शूटर मुहैया कराने का भी आरोप है। उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों के ठेके हथियाने, भाड़े पर हत्याएं, रंगदारी और अपहरण के मामलों ने उसे मोस्ट वांटेड क्रिमिनल बना दिया था। दो घंटे की पूछताछ के बाद एसटीएफ ने उसे मुजफ्फरनगर की रतनपुरी थाना पुलिस के हवाले कर दिया। सीजेएम कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

अरबों की संपत्ति की पड़ताल करेगी टीम
एडीजी अरुण कुमार ने बताया कि सुशील मूंछ इस वक्त पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों में मैली का ठेका लेने, प्रधान व ब्लाक प्रमुख और अन्य चुनावों में उत्पन्न वैमनस्य का बदला लेने, अवैध वसूली करने और सुपारी लेकर हत्या करने जैसे अपराध में शामिल था। इससे उसने अरबों की संपत्ति इकट्ठा कर ली थी। इसमें से ज्यादातर संपत्तियां हरियाणा और आसपास उसके रिश्तेदारों केनाम पर थीं। तीन राज्यों में उसकी संपत्तियों का पता चला है। इसलिए इनकी पड़ताल करना जरूरी है।

एडीजी के अनुसार जब तक पुलिस ऐसे अपराधियों के कमाये धन पर प्रहार नहीं करेगी,  तब तक वह कमजोर नहीं होंगे। इसके लिए पहले वह टीम बनाकर कार्रवाई करेंगे। इसमें चार्टेड एकाउंटेंट, वकील और वित्तीय सलाहकारों की मदद से मूंछ के निवेश की जानकारी की जाएगी। इस निवेश पर शिकंजा कसा जाएगा। इसके अलावा बिहार माडल पर साक्ष्य जुटाकर उसके खिलाफ अभियोजन भी चलाया जाएगा।

यकीन लायक नहीं एसटीएफ की थ्योरी
एसटीएफ ने मूंछ की गिरफ्तारी की जो थ्योरी बतायी है, उसे पचा पाना मुश्किल है। एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने पत्रकारों को बताया कि मूंछ भले ही बड़ा अपराधी था, लेकिन उसके पास से कोई असलहा नहीं मिला है। गिरफ्तारी के वक्त उसके पास से चाकू तक नहीं मिला। हालांकि वह कहते हैं कि इसके पास अत्याधुनिक और ऑटोमैटिक असलहे होने की सूचना उन्हें लगी है। वह अपने घर और रिश्तेदारों के यहां नहीं रुकता था। न ही वह मोबाइल का इस्तेमाल करता था, लेकिन एसटीएफ ने उसके पास से दो मोबाइल और एक पोलो कार बरामद दिखाई है। वह अरबों का मालिक था, लेकिन कार खुद चलाता था और एक-एक हजार किलोमीटर गाड़ी खुद चलाता था। वह केवल गेस्टहाउस में ही रुकता था।
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