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5 अक्तूबर को दिख गया था हत्याकांड का ट्रेलर

मुरादाबाद/ब्यूरो

Updated Sun, 18 Nov 2012 01:35 AM IST
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चड्ढा ग्रुप की पुश्तैनी कोठी में इस साल पांच अक्तूबर को गोलियों की आवाज दूर तक सुनी गई थी। पहली बार पोंटी और उनके भाई हरदीप का प्रापॅर्टी विवाद हिंसक रूप में खुलकर सामने आया। गोलियों की गूंज दिल्ली तक पहुंच गई, फोन घनघनाने लगे लेकिन शाम होते-होते पूरी कहानी ही बदल गई।
मामला सिर्फ पिस्टल की टेस्टिंग का बताया गया। पोंटी के भतीजे हरवीर को हिरासत में लेकर गन जब्त कर ली गई। मगर कुछ फोन घनघनाने के बाद मामला रफा-दफा हो गया। हकीकत में उस दिन भी प्रॉपर्टी को लेकर बातचीत के दौरान फायरिंग हुई थी।

हरदीप उस दिन मुरादाबाद में ही थे लेकिन इस कांड को पुलिस ने दबा दिया। सूत्रों की मानें तो इस दिन प्रॉपर्टी को लेकर परिवार में बातचीत होनी थी, दिल्ली से हरदीप भी पहुंचे थे। विवाद बढ़ने पर ही यह फायरिंग हुई थी। पुलिस ने अगर उसी दिन कुछ ठोस कार्रवाई की होती तो शायद इतना बड़ा हत्याकांड नहीं हुआ होता।

पांच अक्तूबर को जब गोली कांड पीली कोठी आवास में हुआ था तो पोंटी के बेटे की ओर से जारी बयान में साफ कहा गया था कि मुरादाबाद की कोठी से उनका कोई लेना देना नहीं और यहां वह 17 साल से आए भी नहीं हैं। मकसद विवाद से खुद को किनारे रखना ही था। पोंटी यूं तो 17 सालों से मुरादाबाद की कोठी नंबर 455 में नहीं रहते थे लेकिन परिवार के हर मामले में उनका पूरा दखल था।

हरदीप की तरक्की में था पोंटी का हाथ
कुलवंत सिंह के तीन बेटों में पोंटी सबसे बड़े थे और हरदीप सबसे छोटे थे। राजेंद्र चड्ढा दूसरे नंबर के हैं। परिवार वालों की मानें तो पोंटी और हरदीप में बहुत प्यार था। जब हरदीप पेपर मिल चलाते थे तब उन्होंने मेन ऑफिस चड्ढा सिनेमा में ही बना रखा था। यहां पोंटी और हरदीप घंटों बैठा करते थे।

साल 2000 के बाद जब दोनों कारोबार में तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते गए तो दिल्ली शिफ्ट हो गए। कारोबार बढ़ा तो पोंटी ने हरदीप के कंधों पर कई जिम्मेदारियां सौंप दी। धीरे-धीरे चड्ढा ग्रुप में हरदीप एक अहम हिस्सा बन गए थे। मगर पांच साल पहले जब संपत्ति में बंटवारा हुआ तो दोनों के बीच कड़वाहट पैदा होने लगी। आखिरकार दोनों के बीच की न मिटने वाली दूरियों ने एक-दूसरे को ही मिटा दिया।

पतंगबाजी के शौक में हाथ गंवा बैठे थे पोंटी
पोंटी चड्ढा से जुड़ी कई बातें चर्चा में रहती हैं जिनमें एक यह भी है कि उनका हाथ पतंगबाजी के शौक में कट गया था। पोंटी की हत्या की खबर सुनकर उनके जानने वालों की आंखें भीग आई। बातों-बातों में जिक्र हुआ तो यादों का सिलसिला आगे बढ़ा।

उनके एक करीबी ने बताया कि पोंटी ने एचएसबी इंटर कॉलेज में पढ़ाई की थी। जब वह दसवीं में थे तो पतंगबाजी के दौरान तार लगा मांझा बिजली करंट की चपेट में आ गया और हाथ सुन्न हो गया था। इस वजह से ऑपरेशन के दौरान उनका बांया हाथ और दाहिने हाथ की दो अंगुलियां काटनी पड़ी थीं। इस हादसे के बाद ही उनकी पढ़ाई छूट गई थी। उनकी उदारता के बारे में कहा जाता है कि जीआईसी के मैदान पर वह बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते थे और पूरा साजो सामान वे ही मुहैया कराते थे।

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