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वकीलों को दो से ढाई हजार में मिलेगा टैबलेट

इलाहाबाद/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Fri, 05 Oct 2012 12:42 PM IST
lawyers will get tablets in two thousand rupees
केंद्र सरकार इस प्रयास में है कि छात्रों के लिए विकसित किए गए आकाश टैबलेट की तर्ज पर वकीलों के लिए भी सस्ता टैबलेट बनाया जा सके, ताकि वकील उसे आसानी से खरीद सकें और न्यायालयों को पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत करने में मदद मिल सके। बृहस्पतिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि न्यायालयों को पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत किए जाने की योजना पर काम चल रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट में यह काम कुछ हद तक पूरा भी कर लिया गया है।
हालांकि उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि यूपी में बिजली की जबर्दस्त समस्या के कारण यहां कंप्यूटरीकरण का काम प्रभावित होगा, सो प्रयास किया जा रहा है कि प्रदेश सरकार से बात कर न्यायालयों में सौर ऊर्जा को बिजली के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाए। बकौल कानून मंत्री, 'सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने उनसे कहा था कि कई वकीलों की आर्थिक हालत अच्छी नहीं, सो उन्हें टैबलेट खरीदना भी महंगा पड़ेगा।'

कानून मंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए आकाश टैबलेट बनाया गया है, जिसकी कीमत महज दो-ढाई हजार रुपए है। केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से बात की गई थी, प्रयास हो रहा है कि नया सॉफ्टवेयर डेवलप कर वकीलों के लिए भी दो-ढाई हजार रुपए की कीमत वाला टैबलेट तैयार किया जाए।

उन्होंने बताया कि वह इलाहाबाद इसीलिए आए हैं ताकि न्यायालयों को पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत करने के लिए जजों से सलाह-मशविरा कर सकें। लंबित मुकदमों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि जजों से इस बारे में भी सलाह लेंगे। फास्ट ट्रैक कोर्ट या किसी अन्य माध्यम से इस समस्या का निराकरण करना होगा। उन्होंने जजों की कम संख्या की वजह से लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ने की बात भी स्वीकारी और कहा कि इसके लिए नियुक्ति आयोग की स्थापना पर विचार चल रहा है।

रिटायरमेंट के बाद ट्रिब्यूनल्स में नियुक्त किए जा रहे जजों के काम की पारदर्शिता पर उठाए जा रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि इसकी जांच चल रही है। कोई बेहतर विकल्प मिला तो विचार भी किया जाएगा, लेकिन वह इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि रिटायरमेंट के बाद कोई जज किसी के प्रभाव में आकर फैसला कर सकता है। ट्रिब्यूनल्स का अपना अलग महत्व है, जिसे नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सवाल उठाए हैं, उन्होंने भी पहले व्यवस्था देखी है। उस वक्त सुधार क्यों नहीं किया। कमी आज ही क्यों नजर आ रही है। यह भी कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। अगर किसी ने कोशिश भी की तो प्रयास सफल नहीं होने दिया जाएगा।
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