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जानिए कैसे नारी शिक्षा की प्रमुख संस्था बनी वनस्थली

जयपुर/इंटरनेट डेस्क

Updated Sat, 06 Oct 2012 04:44 PM IST
know how Banasthali University became centre of studies for women
वनस्थली विद्यापीठ परिसर में दो छात्राओं के साथ कथित बलात्कार का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर हास्टल वार्डन और एंबुलेंस चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन क्या आप जानते है वनस्थली विद्यापीठ क्या है, कहां हैं और किसने इसकी स्‍थापना की? हम बताते है आपको इसके बारे में।
डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा
राजस्‍थान के टोंक जिले में स्थित वनस्थली विद्यापीठ महिला शिक्षा की राष्ट्रीय संस्था है। वनस्‍थली राज्य की राजधानी जयपुर से 72 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां प्राइमरी से लेकर पीएचडी स्तर तक की शिक्षा दी जाती है। देशभर से छात्राएं यहां पढ़ने के लिए आती हैं। विद्यापीठ को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यानन परिषद द्वारा ए स्तर का दर्जा भी दिया गया है।

इसका नाम वनस्थली विद्यापीठ 1943 में रखा गया। विद्यापीठ को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 1983 में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया। 1946 में महात्मा गांधी ने कहा था कि वनस्थली मेरे दिल में बसा हुआ है। वहीं 1945 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि अगर में एक लड़की होता तो अपनी शिक्षा के लिए वनस्‍थली को चुनता।

हीरालाल शास्त्री ने की स्‍थापना
राजस्‍थान के पूर्व मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री ने वनस्थली विद्यापीठ की स्थापना की थी। 1929 में शास्त्री ने अपने बचपन का संकल्प पूरा करने के उद्देश्य से जयपुर से 45 मील की दूरी पर स्थित बन्थली (वनस्थली) नामक एक दूरवर्ती और पिछड़े गांव को चुना। यहां उन्होंने जीवन कुटीर की स्थापना की। उन्होंने वनस्‍थली में निष्ठावान सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक दल को प्रशिक्षित किया और गांवों के पुनर्निर्माण के लिए एक कार्यक्रम के कार्यान्वयन का प्रयास किया। इस कार्य के लिए शास्‍त्री की पत्नी भी आगे आईं।
 
यहां यह कार्य करते हुए पंडित हीरालाल शास्त्री और रतन शास्त्री की अपनी प्रतिभावान पुत्री शांताबाई का 12 साल ‌की आयु में अचानक 25 अप्रैल, 1935 को केवल एक दिन की अस्वस्थता के पश्चात निधन हो गया। शांता से उन्हें समाज-सेवा की बड़ी उम्मीद थी। इसी आभाव और रिक्तता की भावनात्मक पूर्ति के लिए उन्होनें अपने परिचितों और मित्रों की 5-6 बच्चियों को बुला कर उनके शिक्षण का कार्य आरंभ कर दिया।

इसके लिए 6 अक्टूबर, 1935 को श्रीशांता बाई शिक्षा-कुटीर की स्थापना की, जो कि बाद में वनस्थली विद्यापीठ के रुप में विकसित हुई। आज इस विद्यापीठ ने आज नारी शिक्षा की एक प्रमुख राष्ट्रीय संस्था का रुप ले लिया है।
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