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जन्मदिन विशेष: तब जेपी ने तय की थी देश की दिशा

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क

Updated Thu, 11 Oct 2012 12:03 PM IST
jayaprakash narayan had given direction to country
देश में आजादी की लड़ाई से लेकर वर्ष 1977 तक तमाम आंदोलनों की मशाल थामने वाले जयप्रकाश नारायण का नाम देश के ऐसे शख्स के रूप में उभरता है जिन्होने अपने विचारों, दर्शन तथा व्यक्तित्व से देश की दिशा तय की थी।
सिताबदियारा में हुआ जन्म
उनका जन्म 11 अक्तूबर 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गांव में हुआ था। सत्तर के दशक में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की नीतियों और आपातकाल के खिलाफ विपक्ष का नेतृत्व करने के कारण उन्हें लोकनायक की उपाधि दी गई थी। उन्हें 1999 में मराणोपरांत देश के सर्वोच्च असैनिक सम्मान 'भारत रत्न' से विभूषित किया गया।

बड़ा बदलाव लाना चाहते थे
जयप्रकाश नारायण को ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन के लिए जाना जाता है लेकिन वह इससे पहले भी कई आंदोलनों में शामिल रहे थे। जयप्रकाश के ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन का उद्देश्य सिर्फ इंदिरा गांधी की सरकार को हटाना और जनता पार्टी की सरकार को लाना नहीं था, उनका उद्देश्य राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव लाना था।

बिहार विद्यापीठ में शामिल हुए
जयप्रकाश नारायण का विवाह बिहार के मशहूर गांधीवादी बृज किशोर प्रसाद की पुत्री प्रभावती के साथ अक्तूबर 1920 में हुआ। प्रभावती विवाह के उपरांत कस्तुरबा गांधी के साथ गांधी आश्रम मे रहीं। वे डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद और सुप्रसिद्ध गांधीवादी डॉक्‍टर अनुग्रह नारायण सिन्हा द्वारा स्थापित बिहार विद्यापीठ में शामिल हो गए।

उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए
जयप्रकाश 1922 में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए। अमेरिका में उन्होंने 1922-1929 के बीच कैलिफोर्निया विश्वविधालय में समाज-शास्त्र का अध्यन किया। पढ़ाई के महंगे खर्चे को वहन करने के लिए वहां काम किया। वे मार्क्स के समाजवाद से प्रभावित हुए। उन्होने एमए की डिग्री हासिल की। उनकी मां की सेहत ठीक न होने के चलते उन्हें 1929 में पीएचडी पूरी किए बिना ही भारत वापस आना पड़ा।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने
जब वे अमेरिका से भारत लौटे तो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तेजी पर था। उनका संपर्क गाधी जी के साथ काम कर रहे जवाहर लाल नेहरु से हुआ। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने। 1932 मे गांधी, नेहरु और अन्य महत्वपूर्ण कांग्रेसी नेताओं के जेल जाने के बाद उन्होंने भारत मे अलग-अलग हिस्सों मे संग्राम का नेतृत्व किया।

इसके चलते उन्हें भी मद्रास में सितंबर 1932 मे गिरफ्तार कर लिया गया और नासिक के जेल में भेज दिया गया। यहां उनकी मुलाकात कईं उत्साही कांग्रेसी नेताओं से हुई। जेल में इनके द्वारा की गई चर्चाओं ने कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी (सीएसपी) को जन्म दिया। सीएसपी समाजवाद में विश्वास रखती थी। जब कांग्रेस ने 1934 में चुनाव में हिस्सा लेने का फैसला किया तो जेपी और सीएसपी ने इसका विरोध किया। 1939 में उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेज सरकार के खिलाफ लोक आंदोलन का नेतृत्व किया।

ऑर्थर जेल से हो गए फरार
जयप्रकाश नारायण ने किराया और राजस्व रोकने के अभियान चलाएं। टाटा स्टील कंपनी में हड़ताल करा के यह प्रयास किया कि अंग्रेज़ों को इस्पात न पहुंचे। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 9 महीने की कैद की सजा सुनाई गई। जेल से छूटने के बाद उन्होंने गांधी और सुभाष चंद्र बोस के बीच सुलह का प्रयास किया। उन्हें बंदी बना कर मुंबई की ऑर्थर रोड जेल और दिल्ली की कैंप जेल मे रखा गया। 1942 भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वे आर्थर जेल से फरार हो गए।

इतना ही नहीं जेल से भाग कर नेपाल में रहने के दौरान उन्होंने सशस्त्र क्रांति शुरू की थी। उन्हें एक बार फिर पंजाब में चलती ट्रेन में सितंबर 1943 मे गिरफ्तार कर लिया गया। 16 महीने बाद जनवरी 1945 में उन्हें आगरा जेल मे स्थांतरित कर दिया गया। इसके उपरांत गांधी जी ने यह साफ कर दिया था कि डा. लोहिया और जेपी की रिहाई के बिना अंग्रेज सरकार से कोई समझौता नामुमकिन है। दोनों को अप्रेल 1946 को आजाद कर दिया गया।

समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की
1948 मे उन्होंने कांग्रेस के समाजवादी दल का नेतृत्व किया और बाद में गांधीवादी दल के साथ मिल कर समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की। 19 अप्रेल 1954 को गया में उन्होंने विनोबा भावे के सर्वोदय आंदोलन के लिए जीवन समर्पित करने की घोषणा की। 1957 में उन्होंने लोकनीति के पक्ष में राजनीति छोड़ने का निर्णय लिया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन किया
1960 के दशक के अंतिम भाग में वे राजनिति में फिर सक्रिय रहे। 1974 में किसानों के बिहार आंदोलन में उन्होंने तत्कालीन राज्य सरकार से इस्तीफे की मांग की। वे इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध थे। गिरते स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन किया। उनके नेतृत्व में पीपुल्स फ्रंट ने गुजरात राज्य का चुनाव जीता।

इमरजेंसी के दौरान जेल गए
25 जून 1975 को 1975 में इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी की घोषणा की जिसके अंतर्गत जेपी सहित 600 से भी अधिक विरोधी नेताओं को बंदी बनाया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई। जेल मे जेपी की सेहत और भी खराब हुई। 7 महीने बाद उनको मुक्त कर दिया गया। 1977 जेपी के प्रयासों से एकजुट विरोध पक्ष ने इंदिरा गांधी को चुनाव में हरा दिया। जयप्रकाश नारायण का निधन उनके निवास स्थान पटना में 8 अक्टूबर 1979 को हृदय की बीमारी और मधुमेह के कारण हुआ।
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