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'प्रदेश भर में बढ़ी हैं छेड़खानी की घटनाएं, सख्ती करे पुलिस'

इलाहाबाद/ब्यूरो

Updated Fri, 28 Sep 2012 01:08 AM IST
incidents of vandalism are grown in state police should strict
प्रदेश भर में लड़कियों-महिलाओं से छेड़खानी की बढ़ती घटनाओं पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए इन पर सख्ती से रोक के लिए पुलिस प्रशासन को आगाह किया है। कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि इस पर फौरन कार्रवाई करने की जरूरत है।
स्त्री मुक्ति संगठन द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अमिताव लाला और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने कहा कि छेड़खानी का मामला किसी एक शहर का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का है। सभी शहरों में लड़कियां खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। मामले में न्यायालय ने पुलिस से चार अक्टूबर तक रिपोर्ट देने को कहा है।

मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने पुलिस से ऐसी घटनाओं में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है और कहा है कि छेड़खानी के मामलों और उस पर होने वाली कार्रवाई की निगरानी के लिए वरिष्ठ समाजसेवियों की एक टीम बनाई जाएगी। कमेटी न सिर्फ ऐसी घटनाओं पर नजर रख सकेगी, बल्कि रोकथाम के उपाय भी सुझाएगी। कोर्ट ने मामले में सरकारी अधिवक्ता से सुझाव भी मांगे हैं।

याचिका में हाल के दिनों में हुई छेड़खानी की कई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा गया है कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लड़कियां और महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं है। स्कूल-कॉलेजों के बाहर, बाजार में या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर उनके साथ अनहोनी होने का खतरा बना रहता है। लड़कियां और महिलाएं घर से निकलने से डरने लगी हैं।

सरकारी वकील ने बताया कि पुलिस ऐसी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई कर रही है। एक विशेष टीम भी गठित की गई है, जो ऐसे स्थानों का निरीक्षण करती रहती है जहां घटनाएं अधिक हो रही हैं। खंडपीठ ने कहा है कि मामले में तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है, सबसे पहले घटनाओं को रोका जाना आवश्यक है।

सिर्फ नाम की सजा के कारण बढ़ा बदमाशों का हौसला
सरेआम लड़कियों से छेड़खानी और दुराचार करने वाले ज्यादातर मामलों में आरोपी आसानी से छूट जाते हैं इसलिए उनका हौसला बढ़ गया है। छेड़खानी के तो ज्यादातर मामलों में पुलिस केस ही दर्ज नहीं करती। थानों में लड़कियों और उनके मां-बाप से ऐसे ऐसे सवाल किए जाते हैं कि ज्यादातर किशोरियां, युवतियां बिना मामला दर्ज कराए भाग जाती हैं। मामला दर्ज हुआ भी तो धाराएं बेहद साधारण लगाई जाती हैं।

लड़कियों पर छींटाकशी, फब्ती कसने, पीछा करने, अश्लील बातें कहने पर पुलिस धारा 294 के तहत मामला दर्ज करती है। इसी तरह हाथ पकड़ने, छूने, खींचतान करने, कपड़ा पकड़ने पर धारा 354 के तहत प्राथमिकी लिखी जाती है। इन दोनों ही धाराओं के तहत सात साल से कम सजा का प्रावधान है। ऐसे में पुलिस गिरफ्तारी से बचती है। इसी का नतीजा है कि बदमाश लगातार वारदातें करते हैं।
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