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आईएसी आखिर किसकी, अन्ना की या अरविंद की

नई दिल्ली/संतोष कुमार

Updated Sun, 11 Nov 2012 09:43 AM IST
IAC belongs to whome, anna or arvind
आंदोलन की औपचारिक घोषणा के साथ ही इंडिया अगेंस्ट करप्शन नाम पर विवाद शुरू हो गया है। शनिवार को अन्ना हजारे ने आईएसी नाम पर अपना दावा ठोक दिया है। अन्ना के मुताबिक आईएसी के आंदोलन के दौरान बैनरों पर उनके फोटो लगे थे, इस पर कोई विवाद नहीं है, आईएसी हमारी संस्था है और रहेगी भी। वहीं अरविंद की राजनीतिक मुहिम की सारी आधिकारिक सूचनाएं भी इसी नाम से दी जा रही हैं।
दरअसल जनलोकपाल आंदोलन की शुरुआत इंडिया अगेंस्ट करप्शन के बैनर तले हुई है। राजनीति की राह पर चल निकले अरविंद केजरीवाल फिलहाल इसी नाम का प्रयोग कर रहे हैं। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि फिलहाल हमारा सोचना है कि संस्था हमारी रहेगी। बावजूद इस ऐलान के अन्ना इस मसले पर थोड़ा नरम दिखे। उन्होंने बताया कि यदि अरविंद समर्थकों को कुछ परेशानी होगी तो वो इंडिया अगेंस्ट करप्शन से आगे भी सोच सकते हैं।

वहीं किरण बेदी ने बताया कि मुख्यधारा के आंदोलन से एक समूह अलग हो गया है। इस पर नाम उस समूह का नहीं हो जाता। वहीं मेधा पाटकर ने कहा कि आईएसी कोई संस्था नहीं, बल्कि जन आंदोलन था। कोई भी इसका प्रयोग कर सकता है। नाम के चक्कर में अन्ना के आंदोलन से अरविंद का फायदा होने के सवाल पर मेधा ने कहा कि दिक्कत क्या है, जो भी आंदोलन के मुद्दों को समर्थन देगा, फायदा उसी राजनीतिक दल को मिलेगा।

फेसबुक पर आईएसी के पेज पर सारी जानकारी अन्ना हजारे के संबंध में मिलेगी, जबकि टीम अरविंद की गतिविधियों की जानकारी फाइनल वॉर अगेंस्ट करप्शन पेज पर होगी, जबकि अरविंद की सारी आधिकारिक सूचनाएं आईएसी के नाम से जारी की जाती हैं। सूत्रों के मुताबिक अन्ना हजारे जहां सब-कुछ नए सिरे से शुरू करना चाहते थे, किरण बेदी के साथ कुछ पुराने स्वयंसेवक और कोर कमेटी के सदस्य इंडिया अगेंस्ट करप्शन नाम के साथ ही आगे बढ़ने पर अड़े हुए थे।

अरविंद की पोल खोल से किरण का मतभेद
अरविंद के पोल-खोल की तरफ इशारा करते हुए किरण बेदी ने कहा कि खुलासा करने वाले समूह को हम शुक्रिया करते हैं, लेकिन आप आज घर या दफ्तर खोल लो तो भ्रष्टाचार के सबूत आने लग जाएंगे। आज ईंट उठाओ तो भ्रष्टाचार मिलता है। भ्रष्टाचार की दुकान खोलकर यह बताना आसान है कि आज क्या भ्रष्टाचार हो रहा है, लेकिन क्यों हो रहा है इस सवाल का जवाब पाना मुश्किल है। हमारी कोशिश इसी क्यों तक जाकर मूल पर प्रहार करने की होगी।
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