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सौ फीसदी विकलांग ही करेंगे सरकारी बसों में मुफ्त सफर

लखनऊ/ब्यूरो

Updated Wed, 28 Nov 2012 12:55 PM IST
hundred percent disabled will only free travel in government buses
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में अब सौ फीसदी शारीरिक विकलांगता का प्रमाणपत्र धारक ही अपने सहायक के साथ मुफ्त सफर कर सकेंगे। ऐसे यात्री का विकलांग कल्याण विभाग में पंजीयन भी अनिवार्य रूप से होना चाहिए, जिसका नंबर उसके प्रमाण पत्र पर दर्ज हो, तभी वह मुफ्त सफर के लिए पात्र होंगे।
अब चालीस फीसदी विकलांगता के प्रमाण पत्र धारकों को बस में सफर करने के लिए जेब ढीली करनी होगी यानी भाड़ा भरना पड़ेगा। निगम को यह कदम विकलांगों को मुफ्त में यात्रा कराने की एवज में बकाया धनराशि न मिलने के कारण उठाना पड़ा है।

निगम के प्रबंध निदेशक आलोक कुमार की तरफ से इस आशय के आदेश का सरकुलर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रबंधकों एवं डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को भेजा गया है। इस सरकुलर में कहा गया है कि विकलांग कल्याण विभाग की मूल नियमावली 1998 के नियम-7(2) में उल्लेखित श्रेणी के नि:शक्त जनों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के द्वारा जारी प्रमाण-पत्र पर जिला कल्याण अधिकारी के हस्ताक्षर, मुहर एवं अंकित पंजीकरण संख्या की पुष्टि करने के बाद ही बस में मुफ्त की सुविधा मुहैया कराई जाए।

सरकुलर में यह कहा गया है कि कंडक्टर मार्ग-पत्र पर विकलांग का नाम, पंजीकरण नंबर, जनपद सहित दर्ज करेंगे। ऐसे विकलांग जनों का डिपो एवं क्षेत्रीय दफ्तर पर रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिससे विकलांग कल्याण विभाग के दफ्तर से उसका मिलान कराया जा सके।

सौ फीसदी विकलांगता का मतलब
विकलांग कल्याण विभाग की मूल नियमावली 1998 के नियम-7(2) में उल्लेखित श्रेणी के विकलांग जनों को ही 100 फीसदी नि:शक्त माना गया है। इसके मुताबिक 100 फीसदी विकलांग वे माने जाएंगे जो पूर्ण रूप से अंधे, अल्प दृष्टि, मूक-बधिर, दोनों हाथ, दोनों पैर या एक हाथ-पैर से विकलांग होंगे।

बकाए को लेकर माथापच्ची
परिवहन निगम का विकलांग जनों को मुफ्त सफर कराने के एवज में 56 करोड़ रुपए विकलांग कल्याण विभाग पर बकाया है। इस बकाया धनराशि को लेकर दोनों तरफ के अफसरों में खूब माथापच्ची हुई। इसके बाद एक बैठक में मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने इस संबंध में विभागीय अफसरों को निर्देशित किया था कि अनुपूरक बजट पास होने के बाद उक्त बकाया धनराशि निगम को भुगतान की जाए। अनुपूरक विधान सभा से पास हो गया है अब निगम को बकाया 56 करोड़ रुपए मिल जाएंगे।
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