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रायबरेली: विकास की टीस, फिर भी 'गांधी परिवार' जिंदाबाद

रायबरेली/ब्यूरो

Updated Thu, 08 Nov 2012 10:10 AM IST
gandhian family gets praise even after less development in rai bareli
उत्तर प्रदेश के लखनऊ जनपद के इलाके रायबरेली और अमेठी का नेहरू और गांधी परिवार से अजीब रिश्ता है। यहां न कभी विकास हुआ और न ही लोगों को कोई सुविधा मिली, फिर भी लोगों को गांधी परिवार से कोई शिकायत नहीं, बल्कि इसे घरेलू नाता बताया जाता है।
बुधवार को रायबरेली पहुंची सोनिया गांधी के दौरे को ही लीजिए। मैडम फुरसतगंज स्थित फुटवियर डिजाइन डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट पर निर्धारित समय से लगभग दो घंटा विलंब से पहुंचीं। किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं। कांग्रेस का स्थानीय कोई बड़ा नेता भी यहां नहीं दिखा।

इंस्टीट्यूट जिस ग्राम पंचायत की जमीन पर बना है उस खालिसपुर व उसरहा के स्थानीय लोग अपने एमपी राहुल की मां और बगल की सीट से सांसद सोनिया की एक झलक देखने को बेताब। तभी मिल गए फिरोज गांधी के समय से इस परिवार के लिए इलाके में वोट मांगने का काम करने वाले अब्दुल खालिक मंसूरी।

अमर उजाला प्रतिनिधि ने पूछा, ‘विकास तो दिख नहीं रहा है।’ बोले, ‘बात ठीक है कि हफ्तों बिजली नहीं आती। कोई और सुविधा भी नहीं है। इस इंस्टीट्यूट में भी यहां के लोगों को नौकरी नहीं मिल पाई। पर, हम लोगों को इस परिवार से जो घरेलू नाता है। राहुल जिस तरह हम लोगों के बीच जमीन पर बैठ जाते हैं। वह सबसे बड़ी बात है'।

जनरल स्टोर चलाने वाला युवक सरताज कहता है, ‘जब पढ़ाई-लिखाई अच्छी होगी तभी तो अच्छी जगह नौकरी मिलेगी। इसलिए अगर इंस्टीट्यूट में यहां के लोगों को ज्यादा नौकरी नहीं मिली तो इसमें सोनिया व राहुल का क्या गलती।’

प्रियंका का परचम: इंस्टीट्यूट के बाहर किनारे लगी सोनिया, राहुल व प्रियंका एक साथ आगे कदम बढ़ाते लगी होर्डिंग पर नजर डालते हुए पूछता हूं, ‘ऐसी होर्डिंग पहले भी लगी थी। सभी एक सुर में बोल पड़े, इस तरह की नहीं। फिर कहने लगे सोनिया आज आई हैं। वह कल तक रुकेंगी। राहुल व प्रियंका के बृहस्पतिवार को आने की बात सुनी है।’ खालिक ने कहा, ‘प्रियंका बिटिया तो सबसे ज्यादा हम लोगों का ख्याल रखती हैं।’

काफिला बढ़ता है। आया संदी नागिन चौराहा। यहां से सोनिया का संसदीय क्षेत्र शुरू हो जाता है। रबड़ के पट्टे (साइकिल पर सामान बांधने वाली बेल्ट) बेचने वाले रफीक अहमद खान उनके साथ खड़े युवा रमेश मौर्य तथा यमुना प्रसाद भी इलाके का विकास न होने और महंगाई से व्यथित हैं।

कहते हैं, ‘सोनिया जी पॉवर हाउस लगवा सकती थी तो लगवा दिया। दिल्ली से बिजली दिला सकती थी तो दिला दी। अब यहां तो इसे गांवों में भेजना लखनऊ वाली सरकार का काम है।’ मैं पूछता हूं, ‘सोनिया या राहुल से मिलना हुआ।’

पास खड़े एक और बुजुर्ग कहने लगते हैं, यही क्या कम है, ‘यह लोग आते हैं तो हमारी दुकानें नहीं बंद कराई जाती। मायावती आती थीं तो हम लोग उनकी झलक तक नहीं देख सकते। ‘कुछ लोग बताने लगते हैं, राजीव भैया तो गांव-गांव जाते थे। सब जगह रुकते थे।’
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