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गांधी जी ने अहिंसा से दिखाई आजादी की राह

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क

Updated Tue, 02 Oct 2012 10:23 AM IST
gandhi lead the path of non violence for freedom
देश की आजादी के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देशवासियों को अहिंसा और सत्य राह दिखाकर, ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मुहिम चलाई। राजनीतिक और सामाजिक उन्नति के उनके अहिंसक विरोध के सिद्धांत के लिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हुई। वर्तमान में जिस माहौल में हम रह रहे हैं, वहां आतंकी हमलों और क्षेत्रीय विवादों के रूप में बड़े स्‍तर पर हिंसा दिखाई देती है। ऐसे माहौल में महात्मा गांधी के विचार और सिद्धांत अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।
आंदोलन का सूत्रपात
1917-18 के दौरान बिहार के चंपारण नामक स्‍थान से गांधी जी ने आंदोलन की शुरुआत की। यहां अकाल की स्थिति में गरीब किसानों को आवश्यक अनाज उगाने के स्‍थान पर नील की खेती करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। इसके अलावा इन किसानों को उनकी पैदावार का कम मूल्‍य दिया जाता था, साथ ही उन पर भारी करों का दबाव था। गांधी जी ने जमींदारों के खिलाफ आंदोलन ‌किया, जिसके लिए उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन उनके कारावास में डाले जाने के बाद और अधिक प्रदर्शन किए गए।

फलस्वरूप गांधी जी को छोड़ दिया गया और जमींदारों ने किसानों के पक्ष में एक करारनामे पर हस्‍ताक्षर किए, जिससे उनकी स्थिति में सुधार आया। इस आंदोलन की सफलता से प्रेरणा लेकर महात्‍मा गांधी ने भारत की आजादी का आंदोलन शुरू किया। उनके असहयोग आंदोलन, नागरिक अवज्ञा आंदोलन, दांडी यात्रा और भारत छोड़ो आंदोलन के प्रयासों से अंत में भारत को 15 अगस्‍त 1947 को स्‍वतंत्रता मिली।

देश में बनाया क्रांति का माहौल
भारत की आजादी के लिए तैयार राजनीतिक मंच पर गांधी जी 1920 तक छा गए। उन्होंने 35 वर्ष पुरानी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को आजादी के प्रभावशाली राजनीतिक हथियार में बदल दिया। गांधी का साफ कहना था, 'अंग्रेज़ों की बंदूकों ने नहीं, बल्कि भारतवासियों की अपनी कमियों ने भारत को गुलाम बनाया हुआ है।' सितंबर 1920 से फरवरी 1922 के बीच महात्‍मा गांधी तथा भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्‍व में असहयोग आंदोलन चलाया गया, जिसने भारतीय स्‍वतंत्रता आंदोलन को एक नई जागृति प्रदान की।

जलियांवाला बाग नरसंहार सहित अनेक घटनाओं के बाद गांधी जी ने अनुभव किया कि ब्रिटिश हाथों में एक उचित न्‍याय मिलने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए उन्‍होंने ब्रिटिश सरकार से राष्‍ट्र के सहयोग को वापस लेने की योजना बनाई और इस प्रकार असहयोग आंदोलन की शुरूआत की गई और देश में प्रशासनिक व्‍यवस्‍था पर प्रभाव हुआ। यह आंदोलन अत्‍यंत सफल रहा, क्‍योंकि इसे लाखों भारतीयों का प्रोत्‍साहन मिला। इस आंदोलन से देश में एक क्रांतिकारी माहौल का जन्म हुआ।
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