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लखीमपुर में मिला औषधीय गुणों वाला विदेशी पौधा

अशोक निगम/लखीमपुर खीरी

Updated Mon, 29 Oct 2012 11:22 AM IST
foreign herbal plant found in lakhmipur
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में पहली दफा एक ऐसी औषधीय वनस्पति मिली है, जो अब तक तराई में कहीं देखी नहीं गई थी। मौक्सिको मूल के इस पौधे को कस्ता गांव में नहर किनारे देखा गया है। परिंदों के अध्ययन के दौरान इसे खोजने वाले पर्यावरणविद केके मिश्र के अनुसार, इसमें भरपूर औषधीय गुण हैं। ‘सेना अलाटा’ वानस्पतिक नाम वाले इस पौधे को यहां पीतांबर नाम दिया गया है।
पीतांबर का पौधा झाड़ी के रूप में उगता है। इसकी ऊंचाई चार मीटर तक होती है। पत्तियां 50 से 80 सेमी तक लंबी होती है। पुष्पगुच्छ की शक्ल मोमबत्ती की तरह चमकीले पीले रंग की होती है। इसकी फलियां पक जाने पर भूरे और काले रंग की होती हैं। एक फली में 50 से 60 त्रिकोण आकार के बीज निकलते हैं।

वनस्पति विज्ञानियों के अनुसार, यह मैक्सिको मूल का पौधा है। यह उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, अफ्रीका, साउथ ईस्ट पैसिफिक आईलैंड में पाया जाता है। यह उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में धरती से 1200 फीट तक की ऊंचाई तक उगता है। ऐसा माना जा रहा है कि किसी प्रवासी पक्षी या किसी पर्यटक के जरिए यह वनस्पति यहां आई होगी।

उल्लेखनीय है कि तराई इलाके में मिलने वाली सारी वनस्पतियां दुधवा नेशनल पार्क में भी मिलती हैं। दुधवा में पाई जाने वाली सभी वनस्पतियों का डाक्यूमेंटेशन हो चुका है। उनमें भी इस पौधे का कहीं जिक्र नहीं मिलता। इससे पहले इस वनस्पति का तराई के किसी क्षेत्र में देखे जाने का कहीं उल्लेख भी नहीं है।

बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (बीआरआई) के वैज्ञानिक डॉ. कृष्ण कुमार ने भी इस वनस्पति को तराई क्षेत्र में पहली बार दिखने के दावे की पुष्टि की है। उधर केके मिश्र ने इस वनस्पति पर शोधपत्र तैयार कर स्मिथ सोनियन इंस्टीट्यूट ऑफ वाशिंगटन डीसी को भेजा है।

बड़े औषधीय गुण हैं पीतांबर में
सेना अलाटा (पीतांबर) में तमाम औषधीय गुण हैं। यह वनस्पति त्वचा रोग, लैप्रोसी, दाद, घाव, एक्जीमा, पेट रोग, डायरिया, गैस्ट्रोइंटाइटिस, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, मासिक धर्म और मूत्र विकार से जुड़ी बीमारियों में विशेष लाभकारी है। इसमें एंटी फंगल, एंटी ट्यूमर और एंटीबैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं।
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