आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

रोजाना दम तोड़ रहीं बेटियां, 5 सालों में 11,117 बच्चियां मरीं

बागपत/ब्यूरो

Updated Wed, 03 Oct 2012 12:38 PM IST
five daughters are dying daily 11117 girl dies in 5 years
बहन बिन राखी नहीं, मां बिन लोरी नहीं
पत्नी बिन प्यार नहीं, बेटी बिन दुलार नहीं
और तू मुझे मिटाने चला है,
जिसके बिना तेरा सरोकार नहीं।
ये पंक्तियां दिल को झकझोर देती हैं, लेकिन सवाल यह है कि इनका असर कितनों पर और कितनी देर तक होगा? बागपत के लिए तो इससे बड़ा शायद कोई और सवाल ही नहीं। यहां कन्याएं सिर्फ कोख में कत्ल नहीं की जा रहीं, जन्म लेने के बाद भी बेटियों का जीना मुश्किल है। कन्या भ्रूण हत्या पर काम कर रहे एनजीओ के दावों पर यकीन करें, तो यहां रोजाना छह साल तक की पांच बेटियों की जान जा रही है। 2005 से 2011 के बीच 11 हजार 117 बेटियां बेमौत ही मर गईं।

ये आंकड़े 2011 की जनगणना में शिशु मृत्यु दर से लिए गए हैं। इनमें जन्म के बाद छह साल तककी बच्चियों की मृत्यु का उल्लेख है। उत्तर प्रदेश में 2005 से 2011 के बीच सात लाख 20 हजार 115 बच्चियों ने दम तोड़ा। इस दौरान बागपत में 11 हजार 117 बेटियों की जान गई। एक साल का औसत 1853 है। इस तरह रोजाना पांच बेटियों की जान जा रही है। इनमें ज्यादातर जन्म लेते ही मर गई। बुखार ने भी कम कहर नहीं तोड़ा।

ये आंकड़े तैयार करने के लिए 2005 में जन्म लेने वाली बच्चियों की संख्या में से 2011 में छह साल तक की बेटियों की संख्या को घटा दिया गया है। सहारनपुर में रोजाना औसतन आठ, मुजफ्फरनगर में 14, बिजनौर में 10, गाजियाबाद में 16, मेरठ में 12, मुरादाबाद में सात, गौतमबुद्धनगर में छह, बुलंदशहर में 14, अलीगढ़ में 10 लड़कियां इसी तरह गुम हो रही हैं? ये आंकड़े बागपत में कन्या भ्रूण हत्या और लगातार बिगड़ते लिंगानुपात पर काम कर रही संस्था नवोदय लोक चेतना कल्याण समिति, वात्सल्य, एक्शन एड और समर्थ फाउंडेशन की ओर से जारी किए गए हैं।

मार भी देते हैं बेटियों को
सीएमओ डा. जेपी शर्मा का कहना है कि कन्याओं की सिर्फ भ्रूण हत्या नहीं होती। जन्म के बाद भी हत्या कर दी जाती है। इसके अलावा बेटों के मुकाबले बेटियों की सेहत पर कम ध्यान दिया जाता है।

सोच बदलनी होगी
एनजीओ एक्शन एड की प्रोग्राम कोआर्डिनेटर शिल्पी कहती हैं कि अभी भी काफी लोगों की यह सोच है कि वंश बेटों से ही चलता है, लड़की होगी तो दहेज देना होगा। जब तक यह मानसिकता नहीं बदलेगी, बेटियां सुरक्षित नहीं हो सकतीं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

अगर बाइक पर पीछे बैठती हैं तो हो जाएं सावधान

  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

सैफ ने किया खुलासा, आखिर क्यों रखा बेटे का नाम तैमूर...

  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

Viral Video: स्वामी ओम का बड़ा दावा, कहा सलमान को है एड्स की बीमारी

  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

बॉलीवुड से खुश हैं आमिर खान, कहा 'हॉलीवुड में जाने का कोई इरादा नहीं'

  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

सैमसंग ने लॉन्च किया 6GB रैम वाला दमदार फोन, कैमरा भी है शानदार

  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

Most Read

अनुपम खेर ने पूछा- क्या राहुल गांधी राष्ट्रगान गा सकते हैं?

Can Rahul Gandhi sing national anthem, asks Anupam Kher
  • सोमवार, 5 दिसंबर 2016
  • +

संविधान के दायरे में कश्मीर पर बातचीत के लिए तैयारः अमित शाह

We are ready to talk on Kashmir, say Amit Shah in Party national council meeting
  • रविवार, 25 सितंबर 2016
  • +

भारत में रह रहीं दो पाकिस्तानी महिलाएं लापता

 Two Pakistani women married to Indians go missing
  • बुधवार, 26 अक्टूबर 2016
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top