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स्वामी की याचिका पर दो कंपनियों से जवाब तलब

नई दिल्ली/ब्यूरो

Updated Fri, 23 Nov 2012 12:29 AM IST
explanation from two companies at swamy plea
सुप्रीम कोर्ट ने जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका पर बृहस्पतिवार को चेन्नई की एडवांटेड स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड और विदेश में स्थापित उसकी एक सहयोगी कंपनी से जवाब तलब किया है। स्वामी चाहते हैं कि उनके खिलाफ सिंगापुर में मानहानि का मुकदमा दायर करने के मामले में इन कंपनियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करें।
जस्टिस जीएस सिंघवी और जस्टिस केएस राधाकृष्णन की पीठ ने स्वामी से कहा कि अदालत दोनों कंपनियों का जवाब जानने के लिए उन्हें नोटिस जारी कर रही है। उन्हें नोटिस का जवाब 12 सप्ताह में देना होगा। लेकिन न्यायाधीशों ने इस मामले में वित्तमंत्री पी.चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम को नोटिस जारी करने से इंकार कर दिया। आरोप में कहा गया है कि इन कंपनियों में बहुमत के हिस्सेदार हैं।

इन कंपनियों ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन प्रकरण से संबंधित न्यायिक कार्यवाही में उन्हें कथित रूप से बदनाम करने के आरोप में स्वामी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर रखा है। स्वामी के खिलाफ मामला दर्ज करने वाली दूसरी कंपनी सिंगापुर की एडवांस स्ट्रैटजिक है। जनता पार्टी केअध्यक्ष ने कहा कि इन कंपनियों ने जानबूझकर उन्हें परेशान करने के इरादे से ही विदेश में ये मुकदमा दायर किया है ताकि उन्हें इसके पीछे भागने के लिए मजबूर किया जा सके।

स्वामी की याचिका के मुताबिक उनके खिलाफ सिंगापुर में मानहानि का दावा दायर कर उन्हें निशाना इसलिए बनाया जा रहा है क्योंकि दूरसंचार घोटाले में एयरटेल-मैक्सिस के बीच हुए समझौते के मामले को वह जोर दे रहे हैं। याद रहे कि चिदंबरम पर इस समझौते में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप स्वामी की ओर से लगाया गया था। स्वामी का आरोप है कि सिंगापुर में दावा चिदंबरम के पुत्र के इशारे पर दायर किया गया है क्योंकि वित्त मंत्री के पुत्र उस भारतीय कंपनी के बोर्ड निदेशक के पद हैं जिसका अधिपत्य जर्मन कंपनी पर है।

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी को कार्ति चिदंबरम के खिलाफ दायर अवमानना याचिका में संशोधन करने को कहा था। जनता पार्टी के अध्यक्ष स्वामी ने उस जर्मन कंपनी के अधिकारी को इस याचिका में पक्षकार बनाया था जो भारतीय मूल की कंपनी के अधिपत्य में है। लेकिन अदालत ने स्वामी को अब याचिका में संशोधन कर जर्मन कंपनी पर अधिपत्य रखने वाली भारतीय मूल की कंपनी को पक्षकार बनाने को कहा है। स्वामी के खिलाफ सिंगापुर में इसी कंपनी की ओर से मानहानि का दावा दायर किया गया है।
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