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आय से अधिक संपत्ति मामले पर फैसला आज

नई दिल्ली/ब्यूरो

Updated Thu, 13 Dec 2012 12:32 AM IST
disproportionate assets case against Mulayam decided today
समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व उनके परिजनों की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बृहस्पतिवार को फैसला जारी करेगा।
याचिका में शीर्षस्थ अदालत के उस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है जिसमें आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में पूर्व मुख्यमंत्री और उनके परिजनों के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश जारी किया गया था। सर्वोच्च अदालत ने सपा नेता की पुनर्विचार याचिका पर गतवर्ष 18 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख दिया था।

चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ मार्च, 2007 के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग पर फैसला देगी। पीठ में जस्टिस एचएल दत्तू भी शामिल रहेंगे। गतवर्ष इसी पीठ ने अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती, सपा प्रमुख व उनके परिजनों के अधिवक्ता और याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी की दलीलों पर सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित किया।

याद रहे कि सर्वोच्च अदालत ने एक मार्च, 2007 को यादव, उनके पुत्र अखिलेश-प्रतीक व बहू डिंपल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश जारी किया था। पूर्व मुख्यमंत्री व उनके परिजनों के खिलाफ इस मामले में अधिवक्ता व याचिकाकर्ता चतुर्वेदी ने अदालत में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में यादव और उनके परिजनों पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया था।

सर्वोच्च अदालत में आमतौर पर फैसलों के खिलाफ आई पुनर्विचार याचिकाओं पर चैंबर जज सुनवाई करते हैं। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से दाखिल याचिका में इस मामले की सुनवाई ओपन कोर्ट में करने की गुजारिश की गई थी। साथ ही कहा गया था कि इस मामले में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है और आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया गया था।

सीबीआई ने इस मामले में पहले जांच को जरूरी बताया था। हालांकि बाद में इस संबंध में दाखिल आवेदन को वापस लेने की मांग की थी। लेकिन अदालत की ओर से फटकार लगने पर सीबीआई ने अपने पुराने आवेदन पर कायम रहने का पक्ष रखा था।

वहीं यादव की ओर से अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने दावा किया था कि राजनीति से प्रेरित याचिका में झूठे और गलत तथ्यों को पेश किया गया है। मगर अदालत ने उस पर सीबीआई को आदेश जारी कर दिया जो उचित नहीं था। जबकि संविधान पीठ ने फैसले में यह स्पष्ट कहा है कि अदालत विशेष मामलों में ही सीबीआई को जांच करने का निर्देश जारी कर सकती है।
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