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व्यवस्था की चक्की में पिस रहे इनके मानवाधिकार

वृंदावन/ब्यूरो

Updated Mon, 10 Dec 2012 08:53 AM IST
destitute and widowed women can not get government help
बेसहारा, वृद्ध और विधवा महिलाओं की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त है, उसके निर्देश पर मानवाधिकार आयोग लगातार वृंदावन में मानीटरिंग कर रहा है। स्वयं सेवी संस्था और सरकारी महकमा दावे तो बहुत करते हैं लेकिन उनकी हकीकत दावों के उलट हैं। हालात ये हैं कि दो साल बाद महिलाओं की पेंशन तो पहुंची मगर उनके खातों में अभी तक ट्रांसफर नहीं हुई।
बेसहारा महिलाओं के पास आसरा नहीं है और महिला आश्रय सदन के कमरे खाली हैं। बेसहारा महिलाओं तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है वो मोक्ष की कामना लिए बस किसी तरह से जी रही हैं। इन महिलाओं के मानवाधिकार व्यवस्था की चक्की में पिस रहे हैं।

नीमगांव निवासी मुन्नीदेवी, मुरैना की कमलो, कोलकाता की पूर्णिमा का कहना है कि आश्रम में आठ घंटे भजन संकीर्तन करने पर उन्हें हर माह तीन सौ रुपये और भोजन मिलता है। सरकारी पेंशन और सहायता न तो उन्हें मिली और न ही उनके बारे में वह जानती हैं।

चौबीस परगना निवासी उर्मिला, मालदा निवासी सावित्री देवी और रायपुर निवासी शकुंतला का कहना है कि हमारा ठाकुर न होता तो उनके लिए यहां भरपेट भोजन जुटाना भी मुश्किल हो जाता। इन बेसहारा महिलाओं का कहना है कि हम भजन कीर्तन कर सौ ग्राम दाल, चावल और दो चार रुपये एकत्रित कर काम चला रहे हैं।

आंकड़ों में बड़ा अंतर
वृंदावन में विधवा और बेसहारा महिलाओं के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने वृंदावन के छह महिला आश्रय सदनों में सर्वे कराया। 1739 विधवा और बेसहारा महिलाएं बताई गईं हैं लेकिन नगर पालिका के सर्वे में इन महिलाओं की संख्या 3500 बताई गई।

जिला प्रोबेसन अधिकारी ओपी यादव का कहना है कि विधवा महिलाओं को मुख्य धारा से जोड़ा जाएगा, इसके लिए योजना बनाई जा रही है। आश्रय सदनों में खाली स्थानों को भरने की योजना पर भी मंथन किया जा रहा है।

नगर में निराश्रित महिलाओं के आंकड़े
मीरा सहभागनी सदन - फेस एक और फेस दो की क्षमता 283 की, महिलाएं 170
रामानुज नगर स्वधार योजना - क्षमता 100 की, महिलाएं 73
चैतन्य विहारी महिला आश्रय सदन- प्रथम ब्लाक क्षमता 250 की, महिलाएं 163
चैतन्य विहारी महिला आश्रय सदन- द्वितीय ब्लाक क्षमता 251 की, महिलाएं 171

दो साल बाद पहुंची पेंशन
चैतन्य बिहार फेस वन स्थित महिला आश्रय सदन की संचालिका मंजू गुप्ता का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से महिलाओं को मिलने वाली पेंशन दो वर्ष के बाद आई है। जल्द ही 163 महिलाओं के खातों में यह पेंशन पहुंच जाएगी।

दावों और हकीकत का फासला मिटना चाहिए
90 के दशक में लोक अदालत लगाकर पीड़ित, बेसहारा और विधवा महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने वाली डॉ. कमला घोष वृद्ध महिलाओं की स्थिति पर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि योजनाओं और संस्थाओं के दावों के उलट स्थिति है। महिलाओं को पर्याप्त सहायता मुहैया नहीं हो पाती। यह वृद्ध और विधवा महिलाएं अपने अधिकारों से अनिभिज्ञ हैं। डॉ. घोष महिलाओं की वर्तमान स्थिति के लिए सरकारी व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराती हैं।
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