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सीओ ने कहा, डीजीपी-एसएसपी सभी को चाहिए रुपये

बुलंदशहर/लखनऊ/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Tue, 30 Oct 2012 07:51 PM IST
co of pac says, dgp and ssp, every body want bribe
अलीगढ़ पीएसी में तैनात सीओ वीके शर्मा के आरोपों से सोमवार को हड़कंप मच गया। अलीगढ़ से लेकर लखनऊ तक के अफसर और नेता इससे सकते में आ गए। विवादित बयानों का केंद्र बुलंदशहर रहा। सीओ ने आरोपों के घेरे में वरिष्ठ पुलिस अफसरों और सपा नेताओं को घसीट लिया।

उन्होंने पीपीएस अफसरों की शोषण-उत्पीड़न की हालत का खुलासा मीडिया के सामने किया। उधर, अफसरों व नेताओं को असहज स्थिति में पहुंचाने वाले सीओ को देर शाम निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए। आला अफसरों का कहना है कि सीओ ने गलत आरोप लगाए और खुद के व्यवहार के बारे में छिपा लिया।

वीके शर्मा 2010 में प्रोन्नति पाकर सीओ बने। पिछले 11 माह में पांच तबादले झेल चुके शर्मा तीन माह पहले एटा में सीओ सदर थे। सीओ के अनुसार वहां विधायक और उनके भाई जिला पंचायत अध्यक्ष ने दहेज हत्या के आरोपियों के नाम निकालने को दबाव बनाया।

पुलिस कप्तान ने भी इनके सुर में सुर में मिलाया। नाम न निकलने पर सीओ सदर से हटाने के साथ ही उत्पीड़न शुरू कर दिया गया। गाड़ी, गनर, फॉलोअर छीन लिए गए और वेतन रोक दिया गया। अफसरों की अनदेखी से वह डिप्रेशन का शिकार हो गए। इसी डिप्रेशन में वह पुलिस कप्तान के आवास पर गिरकर घायल हो गए, हड्डी टूट जाने के बावजूद अवकाश नहीं दिया गया।

इसकी शिकायत आईजी आगरा से लेकर डीजीपी और मुख्यमंत्री कार्यालय तक की गई। इस पर वीके शर्मा को पीएसी अलीगढ़ भेज दिया गया। फरवरी 2013 में इनका रिटायरमेंट हैं। नोएडा में फार्मूला वन रेस में डयूटी देकर लौट रहे वीके शर्मा ने बताया कि बाबू से लेकर एसएसपी-डीजीपी सभी को रुपये चाहिए। बिना सुविधा शुल्क के कोई काम करने को तैयार नहीं है।

डीजीपी मुख्यालय ने दी सफाई

डीजीपी मुख्यालय ने इस बाबत सफाई दी है। डीजीपी के जन संपर्क अधिकारी ने कहा है कि सीओ विजय कुमार शर्मा ने कई बार अनुशासनहीनता का परिचय दिया है। 20 जून को कानपुर परिक्षेत्र में पैरवी सेल के नोडल अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। इसमें अधिकारियों को दस बजे पहुंचना था पर तब फतेहपुर में तैनात वीके शर्मा मीटिंग समाप्त होने के बाद पहुंचे और जब आईजी ने उनसे देरी से आने की वजह पूछी तो उन्होंने जवाब दिया कि ‘सरकार ने हेलीकाप्टर नहीं दिया है।’

उनकी इस अनुशासनहीनता पर आईजी कानपुर ने उनका परिक्षेत्र के बाहर तबादला करने की संस्तुति की थी। इसी पर वीके शर्मा का तबादला छह अगस्त 2011 को पीएसी मुरादाबाद में किया गया था। इसके खिलाफ वीके शर्मा अदालत गए थे और अदालत ने तबादला आदेश खारिज करते हुए उन्हें आगरा के आस-पास तैनात किए जाने के निर्देश दिए थे।

प्रवक्ता के मुताबिक, अदालत के आदेशों के अनुपालन में वीके शर्मा का तबादला नौ सितंबर 2011 को पीएसी अलीगढ़ कर दिया गया था। इसके बाद 21 दिसंबर 2011 को उन्हें गाजीपुर जिले में तैनाती दी गई। वीके शर्मा ने फिर आगरा के आस-पास तैनात किए जाने का अनुरोध किया जिसपर 13 अप्रैल 2012 को उन्हें एटा में तैनात कर दिया गया। लेकिन एटा में तैनाती के दौरान अफसरों के आदेश न मानने पर आईजी आगरा जोन की रिपोर्ट पर 19 जुलाई 2012 को अलीगढ़ में पीएसी की 38वीं वाहिनी में तैनाती दे दी गई।

इसके विरुद्ध वीके शर्मा ने अदालत में अपील की जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इस वजह से नौ अगस्त 2012 को उन्हें एटा से कार्यमुक्त कर दिया गया पर उन्होंने दो माह दस दिन बाद 19 अक्टूबर 2012 को ही अपने नए पद पर ज्वॉयनिंग दी। लगभग तीन माह अनुपस्थित रहने की वजह से उनका वेतन रुका। यह वेतन उनका अवकाश स्वीकृत होने की स्थिति में ही मिल सकेगा।


- ‘मैं नहीं जानता कि सीओ ने ऐसा बयान क्यों दिया है। तीन माह तक अनुपस्थित रहने  का वेतन उन्हें बगैर किसी कारण कैसे दिया जा सकता है।’
एसी शर्मा, डीजीपी

- ‘सीओ वीके शर्मा का तीन माह पहले तबादला हो गया था और उन्होंने बाद में ज्वाइनिंग की। इस दौरान का कोई मेडिकल भी नहीं है। उन्होंने कुछ आरोप लगाए हैं, ऐसा मैंने सुना है। क्यों लगाए हैं, यह वही जानें।’
- अजय मोहन शर्मा, एसएसपी एटा

- ‘11 महीने में पांच बार तबादला किया गया। मेरा वेतन भी रोक दिया। मैंने प्रत्यावेदन दिया पर कप्तान ने ऊपर भेजा नहीं। डीजीपी के यहां भी दिया पर सुनवाई नहीं हुई। बगैर दक्षिणा के कोई काम नहीं हो रहा है। किसी भी अधिकारी से पूछा जा सकता है कि कैसे जिलों में तैनाती की जा रही है।’
 - वीके शर्मा, सीओ, 38वीं वाहिनी पीएसी अलीगढ़

- ‘सीओ वीके शर्मा को निलंबित कर दिया गया है। इन्हें अनर्गल व मिथ्या आरोप लगाने, अनुशासनहीनता करने और स्वयं के व्यवहार के बारे में तथ्यों को छिपाने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं।’
-आरएम श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव गृह
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