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प्रमोशन में आरक्षण बिल पर बढ़ा टकराव

नई दिल्ली/ब्यूरो

Updated Tue, 11 Dec 2012 11:24 PM IST
clash in rajya sabha on promotion bill
सरकारी नौकरियों में एससी/एसटी प्रमोशन में आरक्षण संबंधी बिल मंगलवार को राज्यसभा में भारी हंगामे के चलते लटक गया है। सपा ने  बिल पर सदन में चर्चा ही शुरू नहीं होने दी। कई बार कार्यवाही बाधित होने की वजह से राज्यसभा दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी। यूपीए सरकार सपा और बसपा के बीच संतुलन बैठाने की जुगत में लगी हुई है। मगर अभी तक  उसे कोई सफलता नहीं मिली है।
सरकार बुधवार को राज्यसभा में दोबारा बिल पर चर्चा करवाने की कोशिश करेगी लेकिन सपा के रवैये को देखते हुए इस पर चर्चा होने की संभावना बहुत ही कम है। सरकार के मैनेजर बसपा प्रमुख मायावती और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से संपर्क कर सुलह का फार्मूला निकालने में जुटे हुए हैं। मगर सपा इसे यूपी की सियासत से जोड़ते हुए पारित करवाने के पक्ष में नहीं है। सपा नेताओं ने संकेत दिया है कि वे बुधवार को राज्यसभा में पहले से और ज्यादा कड़ा रुख अपनाते हुए प्रश्नकाल तक चलने नहीं देंगे।

प्रमोशन में आरक्षण बिल चर्चा और पारित होने के लिए मंगलवार को राज्यसभा की कामकाज की सूची में शामिल था। सरकार ने बिल पर चर्चा करवाने की कोशिश भी की। मगर सपा शुरू से ही इसके खिलाफ आक्रामक थी। हंगामे को लेकर सभापति हामिद अंसारी की नाराजगी भी सपा सदस्यों को डिगा नहीं पाई। कार्मिक राज्यमंत्री नारायणसामी ने बिल पर चर्चा कराने की कोशिश की।

मगर सपा सदस्यों ने सभापति के आसन के सामने नारे लगाने शुरू कर दिए। सदन की कार्यवाही दोपहर बाद कई दफा स्थगित होने के बाद दोपहर चार बजे दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। सदन के बाहर सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि हम यह बिल कतई मंजूर नहीं होने देंगे। हमारे सदस्यों के खिलाफ सभापति कार्रवाई भी करते हैं तो भी सपा इस पर पीछे नहीं हटने वाली। हम हर कार्रवाई के लिए तैयार है।

उधर, बसपा मंगलवार को ज्यादा मुखर नहीं दिखी। सूत्रों ने बताया कि यूपीए सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम देने के बाद बसपा ‘देखो और इंतजार करो’ की रणनीति अपना रही है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने यह स्वीकार किया कि संविधान संशोधन में बिना विपक्ष की रजामंदी के सरकार के लिए भी आगे बढ़ना मुश्किल है। पार्टी नेता यह भी मान रहे है कि अगर सरकार बिल को पारित करवा नहीं पाती तो उसके लिए यूपीए से समर्थन वापसी का फैसला लेना इतना आसान नहीं होगा।

बसपा के समर्थन वापसी के कदम से यूपीए सरकार की सपा पर निर्भरता पहले से और अधिक बढ़ सकती है। जिससे बसपा को केंद्रीय स्तर पर नुकसान हो सकता है। लिहाजा, पार्टी सरकार पर सियासी दबाव बनाने की कोशिश में है। बसपा सूत्रों का कहना था कि मायावती ने मंगलवार को लोकसभा सांसदों को सदन में कोयला घोटाले का मुद्दा उठाने के लिए कहा था। मगर सरकार के मैनेजरों से बात करने के बाद सांसदों को ऐसा करने से मना कर दिया गया।
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