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एमपीलैड में अपनों को रेवड़ी नहीं बांट सकेंगे माननीय

नई दिल्ली/विजय गुप्ता

Updated Fri, 26 Oct 2012 12:13 AM IST
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एमपीलैड यानि सांसद निधि योजना के तहत क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए माननीय अब किसी खास एजेंसी से काम कराने की सिफारिश नहीं कर सकेंगे। केंद्र सरकार ने सभी सांसदों व मंत्रियों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि एमपीलेड योजना के तहत कार्यों के लिए वे अब किसी भी एजेंसी की सिफारिश तो दूर पत्र में उसका जिक्र तक नहीं करेंगे। इस योजना के तहत कार्य कराने के लिए सक्षम एजेंसी का चयन जिला प्रशासन ही करेगा। सांसद सिर्फ उस काम की समय-समय पर समीक्षा व बेहतर कार्य के लिए आवश्यक सलाह या सुझाव ही दे सकते हैं।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीकांत जेना ने बताया कि एमपीलैड योजना के तहत किसी खास एजेंसी से कार्य संपन्न कराने की सांसदों या मंत्रियों की सलाह राज्यों को मंजूर नहीं है। वह भी ऐसी स्थिति में जब राज्य में किसी दूसरी पार्टी की सरकार हो। क्षेत्र में कार्य की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है।

ऐसे में यदि सांसद अपनों की किसी एजेंसी से कार्य कराने का दबाव डालता है तो न सिर्फ जिला प्रशासन बल्कि राज्य सरकार को लगता है कि उसके अधिकार क्षेत्र में अनावश्यक अतिक्रमण हो रहा है। यही नहीं संसदीय लोकलेखा समिति ने भी सांसदों की इस सिफारिश पर कड़ी आपत्ति की है।

जेना के मुताबिक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से अपने लोगों को लाभ पहुंचाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए उन्होंने सभी सांसदों व मंत्रियों को पत्र लिखकर चेताया है। पत्र में सभी सांसदों खासकर अपनी पार्टी कांग्रेस के सांसदों और मंत्रियों को सलाह दी है कि वे जिला अधिकारी को अपने एमपीलैड योजना के तहत कार्य आवंटित करते समय कार्य को कराने वाली एजेंसी का नाम कतई न लिखे। इस संबंध में सांसद की लोक लेखा समिति की आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है।

लोक लेखा समिति का कहना है कि सांसद के किसी क्षेत्र में विकास कार्य की अनुशंसा किए जाने के बाद उसे पूरा कराने की जिम्मेदारी जिले के अधिकारियों की होती है। कार्य पूरा करने के लिए किसी सक्षम एजेंसी को चुनने की जिम्मेदारी भी जिला प्रशासन की ही होती है न कि संबंधित सांसद की।

दरअसल अधिकांश सांसदों द्वारा अपने क्षेत्र में विकास कार्य के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखने के साथ ही उसमें कार्य कराने वाले व्यक्ति या संस्था का जिक्र भी किया जाता है। लोकलेखा समिति को सांसदों का यह कार्य नियम विरुद्ध तो लगा ही साथ ही ‘अपनों’ को लाभ पहुंचाए जाने का प्रयास भी लगा।
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