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कैबिनेट में फेरबदल: 5 मंत्री निशाने पर

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क

Updated Thu, 18 Oct 2012 08:21 AM IST
cabinet reshuffle five minister on target
मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्रियों के करीब दर्जन भर पद कुछ हफ्तों से खाली हैं। अब इन्‍हें भरने की अटकलों ने फिर जोर पकड़ा है। कैबिनेट में फेरबदल भी जरूरी हो गया है। रेल मंत्री सहित तृणमूल के छह मंत्री सितंबर में इस्‍तीफा दे चुके हैं। विलासराव देशमुख के निधन के बाद से विज्ञान एवं तकनीक, 2जी घोटाले में ए. राजा के इस्तीफे के बाद दूरसंचार और सुशील कुमार शिंदे के गृह मंत्री बनने से ऊर्जा मंत्रालय पहले से ही खाली है। एक सीट प्रणब मुखर्जी के राष्‍ट्रपति बनने से भी खाली हुई है। दयानिधि मारन और वीरभद्र सिंह द्वारा छोड़े गए मंत्रालयों में भी कुर्सी खाली है।
इसके अलावा केंद्र की यूपीए सरकार अपने मंत्रियों के कारण भी मुश्किलों में है। लगातार दूसरी बार सत्ता में आने के एक साल बाद से ही घपलों-घोटालों और नेताओं के अजीब-ओ-गरीब बयानों ने सरकार की जमकर फजीहत कराई है। ऐसे पांच मंत्रियों पर एक नजर...

सलमान खुर्शीद
एक निजी टीवी चैनल ने अपने स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया है कि सलमान खुर्शीद की अध्यक्षता वाले डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में विकलांगों को उपकरण देने के नाम पर फंड तो ले लिए, लेकिन उन सभी लोगों को उपकरण नहीं दिए गए, जिनकी सूची ट्रस्ट ने सरकार को दी थी। इसके अलावा ट्रस्ट की ओर से बतौर सुबूत पेश कई कागजातों पर उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के जाली दस्तखत ने भी खुर्शीद की किरकिरी कराई है। इस मामले में खुर्शीद के ट्रस्ट पर 71 लाख रुपये की हेराफेरी के आरोप है।

लेकिन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के इस्तीफे से सरकार ने इनकार कर दिया है। दरअसल, खुर्शीद को उनके पद से हटाना सरकार के लिए इतना आसान नहीं है। खुर्शीद की रसूखदार पृष्ठभूमि और उनका अल्पसंख्यक होना ही उनका सबसे बड़ा बचाव है। सलमान पूर्व केंद्रीय मंत्री खुर्शीद आलम खान के पुत्र और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन के नाती हैं। खुर्शीद उत्तर प्रदेश से आते हैं, जहां अल्पसंख्यकों की अच्छी खासी आबादी है। सलमान केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक 'चेहरा' माने जाते हैं। संयोग से वे इस मंत्रालय का भी कामकाज देखते हैं।

बेनी प्रसाद वर्मा
केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा यूपीए-2 के 'बयान बहादुर' साबित हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश की गोंडा लोकसभा सीट का संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले वर्मा के हाल में आए दो बयानों ने कांग्रेस की जमकर किरकिरी कराई है। ताज़ा मामले में एनजीओ के कथित फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में सलमान खुर्शीद का बचाव करते हुए वर्मा ने कहा, 'खुर्शीद पर 71 लाख रुपये के गबन का आरोप है, जो बहुत छोटी रकम है। अगर यह रकम 71 करोड़ होती तो शायद वे सोचते।' हालांकि, बयान पर विवाद के बाद वर्मा ने सफाई भी दे दी कि उनका कहने का यह मतलब नहीं था। कुछ महीने पहले बेनी प्रसाद वर्मा ने महंगाई का एक तरह से मजाक उड़ाते हुए कहा था कि महंगाई से किसानों, गरीबों को फायदा हुआ है।

लेकिन इन बेहद आपत्तिजनक और केंद्र सरकार की किरकिरी कराने वाले बयानों के बावजूद बेनी अब भी इस्पात मंत्रालय को मजबूती से पकड़े हुए हैं। पहले भी केंद्रीय मंत्री रहे बेनी प्रसाद ने लंबे समय तक समाजवादी राजनीति की है। बेनी वर्मा उत्तर प्रदेश के गोंडा, बहराइच और बाराबंकी जैसे जिलों में कुर्मी जाति के सबसे बड़े नेता हैं। उन्हें जातीय समीकरण का माहिर भी माना जाता है। उनके राजनीतिक रसूख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इस साल फरवरी में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी ने बेनी प्रसाद वर्मा को अपना गुरु तक कहा था। उत्तर प्रदेश में चौथे नंबर की पार्टी कांग्रेस के पास सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा उत्तर प्रदेश में ऐसे नेताओं की बड़ी कमी है, जिनके पास जनाधार हो। बेनी वर्मा इस कमी को पूरा करते हैं। इन्हीं वजहों से उन्हें हटाना केंद्र के लिए आसान नहीं है।  

वीरभद्र सिंह
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व इस्पात मंत्री वीरभद्र सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। वीरभद्र पर ताज़ा आरोप एक स्टील कंपनी से धन हासिल करने से जुड़ा हुआ है। एक समाचार चैनल की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि 'वीबीएस' नाम के एक शख्स को कथित तौर पर एक स्टील कंपनी की ओर से घूस दी गई है। खबर के अनुसार, दिसंबर 2010 में उस समय स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल के भाई प्रमोद और विनोद मित्तल द्वारा संचालित इस्पात इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर आयकर विभाग के छापे के दौरान एक डायरी मिली थी। इस डायरी में 'वीबीएस' नाम के शख्स को अक्टूबर 2009 से 2010 के बीच 2.8 करोड़ रुपये भुगतान का जिक्र है। वीरभद्र के विरोधियों का कहना है कि 'वीबीएस' का मतलब वीरभद्र सिंह ही है।

लेकिन क्या सफाइयों के बावजूद वीरभद्र सिंह पर गाज गिरेगी? क्या हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस उन्हें अपना चेहरा बनाने से बचेगी? वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेता हैं। वे लंबे समय तक सूबे के सीएम भी रहे हैं। प्रेम कुमार धूमल को कुर्सी से हटाने का सपना संजो रही कांग्रेस के लिए ऐसे वक्त में वीरभद्र से कन्नी काटना बहुत मुश्किल लग रहा है, जब हिमाचल प्रदेश के चुनाव बिल्कुल नजदीक हैं, और पार्टी की साख पर गहरा संकट है। यही वजह है कि हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह के ही नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी विधानसभा का चुनाव लड़ेगी।

श्रीप्रकाश जायसवाल
केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल भी 1.86 लाख करोड़ रुपये के कोयला घोटाले के आरोपी हैं। लेकिन जायसवाल सिर्फ इसी मामले की वजह से ही नहीं बल्कि अपने बयानों के चलते भी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। हाल ही में एक कवि सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए श्रीप्रकाश जायसवाल ने विवादास्पद बयान देते हुए कहा था, 'जब पत्नी पुरानी हो जाती है, जो मज़ा नहीं आता है।' श्रीप्रकाश के खिलाफ इस बयान को लेकर एक मुकदमा भी दर्ज किया गया है। कानपुर में दिए गए इस बयान के बाद जायसवाल की किरकिरी हुई थी।

1944 को जन्मे श्रीप्रकाश जायसवाल मध्य उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के बड़े नेता हैं। कानपुर में उनका अच्छा खासा जनाधार है। वे कानपुर से 2004 और 2009 में लगातार दो बार सांसद चुने गए हैं। इसी वजह से प्रधानमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल पर सीधी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।      

जयराम रमेश
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश का बयान भी सरकार के गले की हड्डी बन गया है। कुछ दिनों पहले एक स्वच्छता अभियान को हरी झंडी दिखाने के मौके पर जयराम रमेश ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि भारत में मंदिरों से ज्यादा अहम टॉयलेट हैं। रमेश के इस बयान पर देश में कई जगहों पर उनके पुतले जलाए गए थे और विरोध प्रदर्शन हुआ था। कुछ साल पहले रमेश ने दीक्षांत समारोह में गाउन पहने जाने की परंपरा को औपनिवेशक मानसिकता की उपज करार दिया था। रमेश के उस बयान पर भी काफी बहस हुई थी।

2004 से राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश को उनके पद से हटाना बहुत मुश्किल है। आईआईटी, अमेरिका के मैसेचुसेट्स इंस्टीट्यूट से पढ़ाई कर चुके रमेश एक अर्थशास्त्री भी हैं। रमेश वर्ल्ड बैंक में भी काम कर चुके हैं। 80 और 90 के दशक में रमेश योजना आयोग, प्रधानमंत्री कार्यालय समेत तमाम अहम विभागों और जगहों पर काम करने का तजुर्बा रखते हैं। रमेश सोनिया गांधी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय सलाहकार  परिषद (एनएसी) के भी सदस्य रहे हैं। बतौर पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने काफी अच्छा काम किया था। ताज़ा बयान के अलावा जयराम रमेश को लेकर कोई बड़ा विवाद नहीं है।
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