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भगत सिंह की फांसी की खबर दबाना चाहते थे अंग्रेज

दीपक शर्मा/अलीगढ़

Updated Thu, 27 Sep 2012 10:59 AM IST
british govt wanted to suppress bhagat singh hanging news
करीब सत्तर साल के निरंजन लाल देखने में बेहद साधारण हैं, पर वे मुल्क की ऐतिहासिक धरोहर के ऐसे मुहाफिज हैं जिसने अपना काम बेहद खामोशी से अंजाम दिया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अंग्रेजों के अत्याचार और शहीदों के हौसले से वाकिफ हो सकें। आईटीआई रोड स्थित इंडस्ट्रियल एस्टेट में रहने वाले निरंजन लाल के पास 8 दशक पहले के वह अखबार आज भी सुरक्षित हैं, जिनमें शहीद भगत सिंह को फांसी देने की खबर छपी थी। इन खबरों से पता चलता है कि अंग्रेजी हुकूमत भगत सिंह की फांसी की खबर को दबाना चाहती थी।
अखबारों को जब्त करने के लिए सरकार ने अभियान चलाया, लेकिन आजादी के दीवानों ने उन अखबारों को किसी तरह एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया। इन्हीं में से एक थे अलीगढ़ के श्याम बिहारी लाल। इन्होंने इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाले अखबार 'भविष्य' की वे प्रतियां अपने पास रख लीं, जो बाद में राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास का अमिट दस्तावेज बनीं।

श्याम बिहारी लाल स्वतंत्रता सेनानी थे। 2005 में श्याम बिहारी लाल के निधन के बाद उनके बेटे निरंजन लाल ने इन्हें बहुत ही हिफाजत से सहेजा है। सन 1931 के इन अखबारों की सुर्खियों से पता चलता है कि जमाने ने भगत सिंह की फांसी की खबर को किस अंदाज में जाना होगा।

'भविष्य' अखबार के 27 मार्च, 1931 के अंक में छपे शीर्षक
- पंजाब के तीनों विप्लववादी फांसी पर लटका दिए गए
- लाहौर में सनसनी, शहर भर में पुलिस, फौज और हवाई जहाजों का पहरा
- 50 हजार स्त्री-पुरुष का रोमांचकारी करुण कंद्रन
- कुटुंबियों से अंतिम मुलाकात नहीं हो सकी

भगत सिंह के आखिरी उद्गार (पंजाब के गवर्नर को लिखा पत्र)
‘अंत में हम केवल यह कहना चाहते हैं कि आपकी अदालत के फैसले के अनुसार हम पर सम्राट के विरुद्ध युद्ध करने का अभियोग लगाया गया है। और इस प्रकार हम युद्ध के शाही कैदी हैं। अतएव हमें फांसी पर न लटका कर गोली से उड़ाया जाना चाहिए। इसका निर्णय अब आपके ही ऊपर है कि जो कुछ अदालत ने निर्णय किया है उसके अनुसार आप कार्य करेंगे या नहीं। हमारी आपसे विनम्र प्रार्थना है और हमें पूर्ण आशा है कि आप कृपा कर फौजी महकमे को आज्ञा देकर हमारे प्राण दंड के लिए एक फौज या पलटन के कुछ जवान बुलवा लेंगे।’
- सरदार भगत सिंह, मार्च 1931, लाहौर सेंट्रल जेल

अलीगढ़ में फरारी काटी थी भगत सिंह ने
अलीगढ़ में टप्पल के शादीपुर गांव में भी भगत सिंह ने फरारी काटी थी। यहां पर वह टोडरमल के यहां स्कूल टीचर के रूप में रहे थे। स्वतंत्रता सेनानी हरिशंकर आजाद उसी दौरान भगत सिंह के संपर्क में आए और बम बनाने की विधि जानी। जब बम तैयार हुआ तो वह भगत सिंह के साथ गांव के बाहर विस्फोट के लिए गए। धमाके की आवाज सुनकर हरिशंकर आजाद थोड़ा सहम गए थे। कुछ दिनों बाद जब भगत सिंह को फांसी हुई तो आजाद को पता चला कि वह शहीद-ए-आजम ही थे।
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