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‘वीबीएस’ और ‘एपीएस’ का सच बताएं वीरभद्र सिंह

शिमला/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Sat, 13 Oct 2012 09:43 PM IST
BJP demands probe into alleged payment to Virbhadra
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव जेपी नड्डा ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वीरभद्र सिंह से एक टीवी चैनल के खुलासे के बाद खड़े हुए सवालों का जवाब देने को कहा है। उन्होंने कहा है कि वीरभद्र सिंह बताएं कि वीबीएस और एपीएस का सच क्या है, जिन्हें इस्पात इंडस्ट्री लिमिटेड ने करोड़ों रुपये का भुगतान किया।
इस कंपनी पर 29 और 30 नवंबर 2010 को आयकर विभाग की कार्रवाई हुई और 125 करोड़ की पेनाल्टी लगाई गई। कंपनी सात हजार करोड़ रुपये की डिफॉल्टर है। जब्त कागजातों में सामने आया है कि कंपनी ने ‘वीबीएस’ को करोड़ों रुपये का नकद भुगतान किया।

नड्डा ने आरोप लगाया कि अक्तूबर 2009 से दिसंबर 2010 तक वीरभद्र सिंह इस्पात मंत्री थे। इस्पात मंत्रालय में 2000 करोड़ का स्क्रैब घोटाला भी इनके के ही समय में हुआ। इसे वर्तमान केंद्रीय इस्पात मंत्री स्वीकार चुके हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार की जननी है।

उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ अदालत में आरोप तय हो गए है और जिसे केंद्रीय मंत्री का पद छोड़ना पड़ा, उसे कांग्रेस ने चुनावों में अपना चेहरा बनाया है। नड्डा ने यह भी कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली और भाजयुमो अध्यक्ष अनुराग ठाकुर पर साजिश का आरोप लगा रहे वीरभद्र सिंह बौखलाहट में ऐसे बयान जारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘वीबीएस’ मामले में सामने आए दस्तावेज आईटी विभाग के हैं और न्यूज चैनल ने इन्हें जारी किया है।

मैं वीएस हूं, वीबीएस नहीं: वीरभद्र
वीरभद्र सिंह ने एक निजी स्टील कंपनी से पैसे लेने के आरोप को गलत करार देते हुए कहा है कि उनका नाम ‘वीबीएस’ नहीं, बल्कि ‘वीएस’ है। साथ ही उन्होंने कहा है कि वे न्यूज चैनल की ओर से उनके खिलाफ  दिखाई गई खबर से आहत हैं। यह सब प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में लाभ लेने के लिए भाजपा की ओछी हरकत का हिस्सा है।

सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को ‘प्रेरित अभियान’ करार दिया है और कहा है कि इस साजिश में शामिल लोगों के खिलाफ वह कानूनी कार्यवाही करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा है कि वे इस मामले में किसी भी जांच एजेंसी द्वारा किसी भी तरह की छानबीन का सामना करने को तैयार हैं।

वीरभद्र सिंह पर क्या है आरोप
आयकर विभाग को मिले दस्तावेजों का हवाला देते हुए मीडिया में यह खबर आई कि इस्पात इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अक्तूबर 2009 से अक्तूबर 2010 के बीच ‘वीबीएस’ नाम के व्यक्ति को दो करोड़ 28 लाख रुपये का भुगतान किया। साथ ही इस दस्तावेज में इस मंत्रालय के अधिकारियों के नाम होने का दावा भी किया गया है।

भ्रष्टाचार के कारण केंद्र सरकार ने वीरभद्र सिंह को मंत्रिमंडल से निकाल दिया। अब वह किस आधार पर मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं।-शांता कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
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