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जन्मदिन विशेष: गरीबों की तड़प ने अमर्त्य सेन को बनाया अर्थशास्त्री

नई ‌दिल्ली/इंटरनेट डेस्क

Updated Sat, 03 Nov 2012 12:16 PM IST
birth day special amartya sen became economist due to poverty
अपनी किस्मत को खुद रचने वाले कुछ लोगों में से एक नाम प्रख्यात अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का भी है। अमर्त्य सेन के परिवार पर गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर का विशेष स्नेह और आर्शीवाद था।
जब 3 नवंबर, 1933 को अमर्त्य सेन का जन्म हुआ तो उनके पिता आशुतोष सेन उनको गुरुदेव के पास ले गए। गुरुदेव ने पूरे स्नेह और दुलार के साथ नवशिशु को आर्शीवाद दिया और उन्होंने ही उनका नामकरण किया।  

बच्चे का नामकरण करते हुए गुरुदेव ने कहा था, ‘यह असामान्य बालक है। बड़ा होने पर असाधारण व्यक्ति बनेगा। मरकर भी इसका नाम अक्षुण्ण रहेगा। इसलिए हमें इसे ‘अमर्त्य’ के नाम से पुकारना चाहिए।’ और जब अमर्त्य सेन नोबल पुरस्कार ग्रहण कर रहे थे तब गुरुदेव का आशीर्वाद और उनकी भविष्यवाणी ही फलित हो रही थी।

अमर्त्य सेन का जन्म पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन (रविंद्र नाथ टैगोर, विश्व भारती) परिसर में हुआ । उनके दादा क्षिती मोहन सेन संस्कृत के अध्यापक थे। वे टैगोर के करीबी सहयोगी थे। उनकी माता अमिता सेन वहां पर छात्रा थी। अमर्त्य के पिताजी आशुतोष सेन ढाका विश्वविद्यालय में रसायनशास्त्र के अध्यापक थे। अमर्त्य के माता-पिता का जन्म ढाका में हुआ था।

अपने जीवन के कुछ वर्ष उन्होंने बर्मा में स्थित मांडले में बिताए। उनकी प्रारंभिक शिक्षा ढाका में हुई। उनका परिवार 1947 में देश के विभाजन के बाद भारत आ गया। इसके बाद ढाका के सेंट जॉर्ज स्कूल में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे टैगोर स्कूल (शांति निकेतन) में दाखिल हो गए।

अमर्त्य सेन शुरू से ही पढ़ाई में अच्छे थे। वे कुछ प्रमुख विषयों, जैसे संस्कृत, गणित और भौतिक विज्ञान में निपुण थे। बाद में उन्होंने प्रिय विषय अर्थशास्त्र में अपनी रुचि बढ़ाई, जिसके कारण आज उनकी विश्वभर में एक अलग पहचान है।
 
कोलकाता स्थित शांति निकेतन और प्रेसीडेंसी कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय से 1959 में डॉक्टरेट की डिग्री ली। वह भारत, ब्रिटेन और अमेरिका में प्रोफेसर रह चुके हैं। उन्हें गरीबी और भूख जैसे विषयों पर काम करने के लिए 1998 में अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार दिया गया।

जब उन्हें नोबल पुरस्कार दिया गया तो वह ये प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतने वाले पहले एशियाई नागरिक बने थे। इसके अगले साल 1999 में उनको भारत रत्न से सम्मनित किया गया। सेन को वर्ष 2011 के लिए यूएस नेशनल ह्‌यूमेनिटिज मैडल के लिए चुना गया।

अमर्त्य सेन ने अपनी जिंदगी में कई ऐसी घटनाएं देखीं, जिनका उन पर गहरा प्रभाव पड़ा। 1943 में बंगाल में पड़े भयंकर अकाल के दौरान ढाका में अपने घर के सामने उन्होंने एक-एक दाने के लिए गिड़गिड़ाते, भूख से दम तोड़ते लोगों को देखा था।

हजारों परिवार उजड़े थे। मरने वालों में अधिकांश गरीब थे। जबकि उस समय अमीरों के घर धन से भरे हुए थे। उसको देख अमर्त्य का बाल-मन रो उठा। अमर्त्य जानते थे कि अमीर अगर अपने आस-पास रह रहे गरीबों के प्रति थोड़ी-सी भी सहृदयता दर्शाते तो हजारों जानें बचाई जा सकती थीं। यह दुखद घटना अमर्त्य के लिए बहुत क्रांतिकारी सिद्ध हुई। उस घटना ने जीवन की दिशा निर्धारित करने का काम किया। उनके मन में गरीब लोगों के लिए काम करने की ललक बढ़ी।

एक और घटना ने उनकी सोच पर गहरा असर डाला। एक बार अपने बचपन में उन्होंने एक ऐसी घटना देखी, जहां कुछ निर्दयी लोगों ने एक आदमी की जान ले ली थी। यह बात उन दिनों की है, जब वे ढाका में रहते थे। एक आदमी कुछ पैसों के लिए काम ढूंढ़ने आया था, जिससे वह अपना और अपने परिवार का पेट भर सके। उसे कुछ लोगों ने चाकू मार दिया, क्योंकि वहां साम्प्रदायिक दंगे भड़के हुए थे। इन घटनाओं ने उन्हें अर्थशास्त्र के अध्ययन के लिए प्रेरित किया।
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