आपका शहर Close

कर्ज न चुकाने पर बैंकों का वाहन उठाना अपराध नहीं

नई दिल्ली/पीयूष पांडेय

Updated Fri, 02 Nov 2012 09:19 PM IST
banks to repay debt raise vehicle not crime
कर्ज न चुकाने की सूरत में बैंकों या वित्तीय संस्थाओं की ओर से वाहनों को जबरन उठवाना आपराधिक मामला नहीं है। कर्ज लेकर वाहन खरीदने वाले यह अच्छी तरह जान लें। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर एक कार मालिक की याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि ऋण न चुकाने पर जबरदस्ती कार उठवाने वाले वित्तीय संस्थान के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि कर्ज लेते समय कार की खरीद करने वाले और लोन देने वाले वित्तीय संस्थान के बीच अनुबंध होता है। यह कानूनी अनुबंध तब तक के लिए वैध होता है जब तक कि कर्ज की पूरी रकम चुकता न कर दी जाए। कर्ज चुकाने की अवधि तक वित्तीय संस्थान ही वाहन का मालिक रहता है।

ऐसे में संस्थान की ओर से वाहन को जब्त किए जाने की प्रक्रिया के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती है। क्योंकि कर्ज न चुकाए जाने की सूरत में वह एक तरह से अपने ही माल पर दोबारा से कब्जा लेता है। जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता वाली पीठ ने कर्ज लेकर कार खरीदने वाले अनूप शरमाह की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला दिया है।

शीर्षस्थ अदालत ने इस मुद्दे पर गुवाहाटी हाईकोर्ट की ओर से जारी किए गए आदेश को सही करार दिया है जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने जून, 2009 में शरमाह के उस आग्रह को खारिज किया गया था जिसमें वित्तीय संस्थान की ओर से जबरन कार जब्त किए जाने के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही करने की मांग की गई थी।

पीठ ने शरमाह के अधिवक्ता की ओर से दिए गए उस तर्क को अपने फैसले में ठुकरा दिया जिसमें कहा गया कि गैरकानूनी तरीके से किसी के वाहन पर कब्जा करने एक अपराध है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वाहन पर कब्जा करने वाले वित्तीय संस्थान के खिलाफ इसी आधार पर कार्यवाही का आदेश दिया जिसे हाईकोर्ट की ओर से रद्द किया जाना उचित नहीं था।

पीठ ने शीर्षस्थ अदालत के कई पुराने फैसलों का हवाला देते हुए यह साफ किया कि ऋण देने वाला संस्थान कर्ज न चुकाने की सूरत में वाहन को जब्त कर सकता है। ऐसे में उस संस्थान के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि यह कानूनी व्यवस्था संस्थान और कर्ज लेने वाले व्यक्ति के अनुबंध से तय होती है। ऐसे में अदालत के हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।
Comments

Browse By Tags

supreme court loan

स्पॉटलाइट

पद्मावती का 'असली वंशज' आया सामने, 'खिलजी' के बारे में सनसनीखेज खुलासा

  • शुक्रवार, 17 नवंबर 2017
  • +

Film Review: विद्या की ये 'डर्टी पिक्चर' नहीं, इसलिए पसंद आएगी 'तुम्हारी सुलु'

  • शुक्रवार, 17 नवंबर 2017
  • +

पत्नी को किस कर रहा था डायरेक्टर, राजकुमार राव ने खींच ली तस्वीर, फोटो वायरल

  • शुक्रवार, 17 नवंबर 2017
  • +

सिर्फ 'पद्मावती' ही नहीं, ये 4 फिल्में भी रही हैं रिलीज से पहले विवादों में

  • शुक्रवार, 17 नवंबर 2017
  • +

बेसमेंट के नीचे दफ्न था सदियों पुराना ये राज, उजागर हुआ तो...

  • शुक्रवार, 17 नवंबर 2017
  • +

Most Read

पुरुषों के आत्महत्या करने की खबर कभी नहीं सुनी : मेनका 

Never heard of men committing suicide, Says Minister Maneka Gandhi
  • शुक्रवार, 30 जून 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!