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क्या सफल होगा बाल ठाकरे का आखिरी दांव?

विजय जैन/नई दिल्ली

Updated Wed, 21 Nov 2012 07:26 AM IST
bal thackeray last wish will be complete or not
बाला साहेब ठाकरे अंतिम समय तक इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहे थे कि उनके बाद शिवसेना का भविष्‍य क्‍या होगा? दशहरा पर शिवाजी पार्क में शिवसेना की रैली में वो बीमारी के कारण जा नहीं सके थे, लेकिन उन्‍होंने उस रैली में भविष्‍य की अपनी सोच को वीडियो संदेश में खुलकर बयां किया था।
दरअसल, वो अपनी गंभीर बीमारी के दौरान शिवसेना का भविष्‍य सुरक्षित करने में लगे थे और चाहते थे उनके जीते जी शिवसेना का किला सुरक्षित हो जाए। इसके लिए उन्‍होंने एक योजना तैयार की थी, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था।

बाला साहेब जीते जी अपना आखिरी राजनीतिक दांव खेल तो गए थे, लेकिन उसका परिणाम नहीं देख सके। वो चाहते थे कि राज ठाकरे की महाराष्‍ट्र नव निर्माण सेना और शिव सेना का विलय हो जाए। उन्‍होंने राज ठाकरे की घर वापसी का प्‍लान तैयार किया था। बीते कुछ महीनों में राज ठाकरे का मातोश्री आना-जाना लगा रहा।

बेशक इसमें चाचा और भतीजे का प्रेम, बाला साहेब की बीमारी, एक भतीजे का चाचा के स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता करना आदि कारण शामिल रहे, लेकिन एक मकसद भी था, जिसे बाला साहेब का आखिरी सपना समझें या राजनीतिक पंडित इसे आखिरी दांव भी कह सकते हैं।

बाला साहेब की बीमारी से पहले उद्धव ठाकरे की तबियत खराब हुई थी। राज ठाकरे के अलग होने के बाद ये पहला मौका था जब दोनों भाई एक साथ परिवार की तरह दिखे। शिवसैनिकों ने कहा कि इसके राजनीतिक मायने नहीं निकाले जाने चाहिए, लेकिन बाद में ये मान लिया गया कि बाला साहेब के कहने पर राज ठाकरे भाई उद्धव को देखने गए थे। इसके बाद वो मातोश्री भी गए। फिर बाला साहेब की तबियत खराब हुई और उसी दौरान मेल-मिलाप पर भी बाला साहेब और भतीजे राज में बातें होती रहीं।

सूत्रों के मुताबिक बाला साहेब चाहते थे कि एक भाई पार्टी संभाले और दूसरा भाई विधानसभा के भीतर हल्‍ला बोले। ये था उनका आखिरी राजनीति दांव या यूं कहें उनका आखिरी सपना। मनसे और शिवसेना कार्यकर्ताओं और नेताओं के हवाले से चल रही खबरों में भी बताया गया बाला साहेब ने अपने अंतिम पलों में भी दोनों भाइयों से एक होने के लिए कहा।

उन्‍होंने हमेशा वो ही किया जो शिवसैनिकों ने चाहा या यूं कहें जो उन्‍होंने किया वो शिवसैनिकों ने चाहा-बात एक ही है। दोनों एक दूसरे के पूरक रहे, ये खास बात रही बाला साहेब और शिवसेना की।

दोनों भाइयों को एक करने की कोशिश में जुटी बीजेपी
शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के निधन के बाद उद्धव और राज ठाकरे के एक होने को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए रहे हैं। इस बीच इंग्लिश अखबार 'डेली मेल' ने लिखा है कि भारतीय जनता पार्टी ने दोनों भाइयों को एक करने की कोशिशें शुरू कर दी है। बीजेपी और शिवसेना के सीनियर नेता वह रास्ता तलाश करने में जुटे हैं, जिससे दोनों भाइयों को मिलाया जा सके।

शिवसेना पहले से ही राज ठाकरे के अलग होकर पार्टी बनाने के झटके को झेल रही थी, ऐसे में बाला साहेब के गुजर जाने से उसकी मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पहले ही शिवसेना के वोट बैंक में सेंध लगा चुकी है।

ऐसे में बीजेपी को डर सता रहा है कि कहीं बाला साहेब के निधन के बाद लोगों का झुकाव राज ठाकरे की तरफ न हो जाए। शिवसेना बीजेपी की पुरानी साथी रही है, ऐसे में बीजेपी नेताओं की कोशिश है कि वह एनडीए के अपने इस भरोसेमंद साथी को मजबूत बनाए रखे। ऐसा करने के लिए जरूरी है कि राज ठाकरे और उद्धव एक हो जाएं।
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