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बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद

गोपेश्वर/ब्यूरो

Updated Sun, 18 Nov 2012 10:06 PM IST
Badrinath shrine closed for winter
श्री बदरीनाथ धाम के कपाट रविवार को परंपरागत विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ दिन में तीन बजकर 25 मिनट पर बंद हो गए। शीतकाल के दौरान अब कपाट बंद रहेंगे।
धाम में मौजूद करीब 16 हजार श्रद्धालु कपाटबंदी के साक्षी बने। मान्यता है कि छह माह तक भगवान बदरी विशाल की पूजा-अर्चना का जिम्मा महर्षि नारद संभालते हैं। बदरीनाथ धाम में तड़के बदरी विशाल की महाभिषेक पूजा दोपहर कपाट बंद होने की प्रक्रिया के साथ संपन्न हुई।

इस दौरान बदरीनाथ मंदिर के सिंह द्वार के दोनों ओर वेद वेदांत संस्कृत महाविद्यालय जोशीमठ के 20 छात्रों ने स्वस्ति वाचन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया। परंपरा के अनुसार बदरीनाथ के मुख्य पुजारी रावल केशवन नंबूरी ने स्त्री वेश धारण कर माता लक्ष्मी को बदरीनाथ गर्भगृह में रखा।

इसके बाद माणा गांव की कन्याओं द्वारा निर्मित कंबल पर घी का लेप कर बदरी विशाल को ओढ़ाया गया। बदरीश पंचायत से कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की मूर्ति को पांडुकेश्वर के लिए रवाना किया गया। इस दौरान बदरीनाथ धाम में स्थित श्रद्धालुओं ने बदरीविशाल को वस्त्र व आभूषण भेंट किए।

जय हो पंच बदरी-पंच केदार...
कपाट बंद होने के दौरान धाम में लोक गायक मंगलेश डंगवाल ने कीर्तन-भजन कर बदरीनाथ धाम को गुंजायमान कर दिया। उन्होंने सबसे पहले जय हो पंच बदरी-पंच केदार व कई अन्य धार्मिक भजनों की प्रस्तुति दी। इस मौके पर गढ़वाल स्कॉट की बैंड धुन और श्री बदरीनाथ जी के जयघोष के साथ कपाट बंद होने की प्रक्रिया संपन्न हुई।

नृसिंह मंदिर जोशीमठ रवाना डोली
बदरीनाथ धाम में छह माह तक आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी भी मौजूद रहती है, जो धाम के कपाट बंद होने पर जोशीमठ नृसिंह मंदिर में विराजमान होती है। मान्यता के अनुसार शीतकाल में छह माह तक श्री बदरीविशाल की पूजा नृसिंह मंदिर परिसर में की जाती है।

बदरीनाथ धाम के रक्षक हैं माणा निवासी
बदरीनाथ से तीन किमी की दूरी पर बसे माणा गांव के ग्रामीणों को बदरीनाथ धाम के रक्षक के रूप में जाना जाता है। यहां माता मूर्ति का मंदिर व्यास गुफा, गणेश गुफा, भीम पुल, सरस्वती मंदिर स्थित है। यहीं से बसुधारा के लिए जाया जाता है।
 
बदरीनाथ में यात्रियों का रिकॉर्ड टूटा
बदरीनाथ धाम के लिए आने वाले यात्रियों की संख्या का रिकॉर्ड इस बार टूट गया। आपदा के कारण बदहाल स्थिति के बावजूद इस वर्ष धाम में 10 लाख 42 हजार 215 तीर्थयात्री मत्था टेकने पहुंचे। गत वर्ष नौ लाख 80 हजार 667 तीर्थयात्री धाम में पहुंचे थे।

कपाट बंद होते ही बामणी, माणा में सन्नाटा
बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही सीमा पर स्थिति गांव माणा और बामणी में भी सन्नाटा पसर गया है। इन गांवों में तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों की चहल-पहल रविवार को दोपहर बाद थम गई। बामणी और माणा बदरीशपुरी से जुडे़ हक-हकूकधारियों के गांव हैं।

यहां के ग्रामीण धाम के कपाट खुलने के साथ ही इन गांवों में पहुंचते हैं। कपाट बंद होने के बाद बामणी गांव के लोग छह माह पांडुकेश्वर और माणा के लोग गोपेश्वर, नेग्वाड़, घिंघराण, सिरोखुमा, सेंटुणा आदि स्थानों पर चले जाते हैं। इन गांवों के ग्रामीण बदरी विशाल के कपाट खुलने पर छह माह तक रोजाना नारायण भगवान की सेवा में लग जाते हैं। इन लोगों को बदरीनाथ के भंडार गृह की जिम्मेदारी दी जाती है।

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