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तेरह केस के बावजूद बना नामधारी का आर्म्स लाइसेंस

चंडीगढ़/ब्यूरो

Updated Tue, 11 Dec 2012 10:06 AM IST
arms licence issued to namdhari despite of thirteen cases
पोंटी चड्ढा और उनके भाई पर गोली चलाने के मामले में जेल में बंद उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव सिंह नामधारी ने फर्जी दस्तावेजों पर पंजाब में आर्म्स लाइसेंस और पासपोर्ट हासिल किए। नामधारी के खिलाफ तेरह गंभीर केस दर्ज होने के बावजूद पंजाब में उसको आर्म्स लाइसेंस जारी कर दिया गया। पुलिस वेरिफिकेशन में भारी गड़बड़ी हुई।
पुलिस का एक ही अफसर सिटी इंचार्ज और एसएचओ के रूप में फाइल को पास करता रहा। नामधारी को आर्म्स लाइसेंस जारी करने में अधिकारियों ने इतनी जल्दबाजी दिखाई कि जिस दिन लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया, उसी दिन फाइल को वेरिफिकेशन के लिए भी भेज दिया गया। पंजाब सरकार की जांच में ये तथ्य सामने आए हैं। डिप्टी सीएम के आदेश पर गृह विभाग के प्रधान सचिव डीएस बैंस ने पूरे मामले की जांच की थी।

जाली दस्तावेजों का सहारा लिया
जांच में पाया गया है कि नामधारी ने 1994 में आर्म्स लाइसेंस हासिल करने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लिया। नामधारी के खिलाफ कई धाराओं के तहत तेरह केस दर्ज थे, लेकिन लाइसेंस लेते समय उसने इनका जिक्र तक नहीं किया। देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों को दर किनार कर उसने अमृतसर और रूपनगर से भी जाली आर्म्स लाइसेंस हासिल किए।

वर्ष-2005 में ऊधम सिंह नगर के डीएम ने हथियार का गलत प्रयोग करने पर नामधारी का लाइसेंस रद कर दिया था। यह जानकारी पटियाला के डीएम को भी भेजी गई। इसके बावजूद पंजाब में उसे डुप्लीकेट लाइसेंस जारी किया गया। जांच में पाया गया कि अमृतसर के डीएम ने रोपड़ के डीएम की तरफ से जारी लाइसेंस की असली कापी सरेंडर करवाए बिना ही उसको डुप्लीकेट कापी जारी कर दी। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि डुप्लीकेट लाइसेंस लेने के पीछे नामधारी के आपराधिक इरादे झलकते हैं, जिसकी जांच होनी चाहिए।

पासपोर्ट के लिए लगाया जाली राशन कार्ड
नामधारी ने गांव जाणियां (जालंधर) निवासी के रूप में जाली राशन कार्ड के आधार पर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। उसने 2006 में पासपोर्ट के लिए आवेदन देते समय कहा कि उसके विरुद्ध कोई फौजदारी केस नहीं है। उस समय उसके विरुद्ध बाजपुर और खनाम में कम से कम छह पुलिस केस थे।

नामधारी ने खुद को अनपढ़ बताया
पासपोर्ट के आवेदन के साथ दिए शपथपत्र में नामधारी ने खुद को अनपढ़ घोषित किया था। कहा गया कि वह अभ्यास से हिंदी में हस्ताक्षर करता है, जबकि उत्तराखंड में शहीद ऊधम सिंह नगर, बाजपुर के इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल की तरफ से जारी माइग्रेशन सर्टिफिकेट के अनुसार वह सातवीं कक्षा फेल था।

चार अन्य को भी दिए लाइसेंस
रिपोर्ट में कहा गया है कि नामधारी के साथ ही चार अन्य व्यक्तियों को भी आर्म्स लाइसेंस जारी किए गए। इनमें नामधारी का भाई भी शामिल था। इन सभी की भी जांच जरूरी है। इन पांचों में कोई संबंध हो सकता है जो पंजाब के वासी नहीं भी हो सकते हैं।
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