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अब गैस कनेक्शन से ‌हट जाएंगे पुरखों के नाम

इलाहाबाद/ब्यूरो

Updated Fri, 30 Nov 2012 02:40 PM IST
ancestral names will be deleted from gas connection
गैस कनेक्शन से अब दादा-दादी, नाना-नानी या सास-श्वसुर के नाम हट जाएंगे। कई पीढ़ियों पहले दूसरों के नाम जारी गैस कनेक्शन लोग अब तक इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन तेल कंपनियों की सख्ती के बाद लोगों ने ऐसे गैस कनेक्शन के नामों का परिवर्तन कराना भी शुरू कर दिया है।
नियमानुसार निकट संबंधों के नाम गैस कनेक्शन बदलवाने के लिए केवल शपथ पत्र देना पड़ रहा है। ऐसे लोगों के नाम चल रहे गैस कनेक्शन को बदलने में ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं जो जाति, बिरादरी या धर्म से मेल नहीं खाते। ऐसे लोगों को ज्यादा रकम देना पड़ रहा है।

तेल कंपनियों ने रसोई गैस की अवैध बिक्री पर लगाम लगाने के लिए कई रास्तों से घेराबंदी की है। ज्यादातर ग्राहक इस फंदे में फंस रहे हैं। तेल कंपनियों के अफसरों का दावा है कि लॉक किए गए गैस कनेक्शनों में बड़ी संख्या ऐसे ग्राहकों की है जिनके घरों में रसोई गैस का इस्तेमाल हो रहा है लेकिन उनके पास वैध कनेक्शन नहीं है। ऐसे लोगों के पास दूसरों के नाम पर जारी हुए कनेक्शन हैं। यह ग्राहक केवाईसी फार्म भरने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।

कई कागज लेकर जो सामने आए भी, वह कनेक्शनधारक के नाम का बैंक खाता देने में नाकाम हैं। सत्यापन के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि 15-20 फीसदी ग्राहक ऐसे हैं जिनके पास दशकों पहले पुरखों के नाम यानी दादा-दादी, पिता-मां, सास-श्वसुर, साले, बहनोई, दूर-दराज के रिश्तेदारों के नाम खरीदे गए गैस कनेक्शन हैं।

ऐसे ग्राहकों की संख्या भी हजारों में है जिन्होंने किल्लत के दिनों में अनजाने लोगों के नाम ब्लैक में कनेक्शन ले लिया। बाद में बिना किसी नामांतरण के उसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं। कंपनियों की सख्ती के बाद कनेक्शन उनके हैं, यह साबित करने में पसीना छूट रहा है। ऐसे ग्राहकों के सामने कंपनियों ने सीमित विकल्प छोड़े हैं। ब्लड रिलेशन (खून के रिश्तों) में नामांतरण जरूर आसान है।

नामांतरण के लिए जरूरत
-मृत्यु के मामले में कोई रकम जमा नहीं करना पड़ेगा। इसमें मृत्यु प्रमाण पत्र, शपथ पत्र देना जरूरी है। यह स्थानांतरण पति, पत्नी और उनके बच्चों के बीच ही होगा। इसमें भाई-बहन या अन्य परिजन शामिल नहीं हैं।
-गिफ्ट में मिले, दूसरे के नाम वाले मामले में कनेक्शन सरेंडर करने पड़ेंगे। इसमें पुरानी जमानत राशि और वर्तमान जमानत राशि के बीच का अंतर जमा करना पड़ेगा। प्रशासनिक शुल्क भी लगेगा।
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