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औरत को सबसे सुंदर तोहफा मानते थे यशजी : कैट

मुंबई/इंटरनेट डेस्क

Updated Thu, 15 Nov 2012 01:19 PM IST
katrina said yashji called women a gift of god
कैटरीना उन सौभाग्यशाली अभिनेत्रियों में से एक हैं, जिन्हें यश चोपड़ा जैसे निर्देशकों के साथ काम करने का मौका मिला। उनकी आखिरी फिल्म दीवाली के मौके पर रिलीज हो चुकी है। पेश है उनकी बातचीत के मुख्य अंश-

कैटरीना, आप यशजी से काफी क्लोज रहीं। बावजूद इसके कि आपने उनकी फिल्म में कभी पहले काम नहीं किया था। कैसे बना यह रिश्ता आपके लिए खास?

हां, यह सच है कि मैंने कभी यशजी के साथ किसी फिल्म में काम नहीं किया था। लेकिन उनके बैनर की फिल्मों में काम करते-करते मुझे ये तो यकीन हो चुका था कि वे आम लोगों से थोड़े  अलग हैं। इतने पुराने दौर के होने के बावजूद वे नए जमाने के लोगों से काफी आत्मीयता से बात करते थे और यही वजह थी कि मेरा भी उनसे जुड़ाव हुआ।

मुझे याद है वे हमेशा मुझसे कहते कि किसी बात की चिंता मत करो। सब अच्छा होगा। मेहनत करो। यशजी पहले इंसान थे, जिन्होंने मेरे बारे में क्रू मेंबर्स से कहा था कि यह बॉलीवुड की मेहनती अभिनेत्रियों में से एक हैं। मैंने जब 'वीर जारा' का प्रीमियर देखा था। उसी वक्त से मेरी इच्छा थी कि काश, मैं उनकी फिल्म में काम कर पाऊं। लेकिन मुझे जब भी यशराज बुलाया जाता, मुझे किसी और फिल्म के बारे में बात की जाती। लेकिन 'जब जब तक है जान' बनने की बात चल रही थी। उस वक्त मुझे जानकारी मिली। मेरे दोस्तों ने बताया कि वहां चर्चा चल रही है कि मुझे इस फिल्म में मुख्य किरदार निभाने का मौका मिलेगा। जब मुझे एक दिन कॉल आया और यशजी ने खुद कहा कि मेरी फिल्म में काम करोगी। मैं विश्वास नहीं कर पा रही थी कि यह सच है या नहीं।
 
'जब तक है जान' की शूटिंग का अनुभव कैसा रहा? यशजी के साथ बिताए कुछ पल शेयर करें।
यशजी बिल्कुल बच्चे की तरह थे। वे हमेशा आपसे मजाक करते थे। पहले तो मैं उनसे काफी डरती थी। लेकिन फिर मैंने देखा कि वे सबसे हँसी मजाक करते। खूब जोक्स सुनाते और हँसते। खाने के खास शौकीन भी थे, तो खूब खाते-खिलाते। हमें भी कहते कि डाइट वाइट की चिंता मत कर। खाया कर। उनकी सबसी खास बात यह भी थी कि शूटिंग के दौरान जब भी वे हमसे सीन डिस्कस करते थे। जितनी बार ब्रेक होता। या फिर मैं उठ कर कहीं जाती। फिर वापस आती तो वे भी आत्मीयता से और मैनर के लिहाज से बार-बार उठते। मुझे कुर्सी देते। फिर खुद बैठते।

उन्होंने मुझसे हमेशा कहा कि कभी फिल्म के हिट फ्लॉप की चिंता मत करो। बस दिल से काम करो। शूटिंग के दौरान एक दिन मैं एक लाइन ठीक से बोल नहीं पा रही थी। इमोशन नहीं दे पा रही थी। उस वक्त भी उन्होंने मुझसे समझाया कि क्या हुआ आज मूड ठीक नहीं। मू्ड ठीक कर ले फिर करेंगे शूटिंग। यशजी ने दोस्त की तरह न सिर्फ हौंसला बढ़ाया। बल्कि उन्होंने फील कराया कि मैं कितनी अहम हूं।


बतौर निर्देशक यशजी की और क्या खूबियां नजर आईं आपको जो आमतौर पर निर्देशकों में नहीं होती?
यशजी की सबसे खास बात यही थी कि वे अपनी अभिनेत्रियों को फील कराते थे कि वे काफी स्पेशल हैं। वे सिर्फ शारीरिक ब्यूटी या सिफौन साड़ी पर नहीं, बल्कि इमोशनल ब्यूटी को दर्शाते थे। वे मानते थे कि दुनिया में औरत सबसे सुंदर होती है और यह प्रकृति का खास तोहफा है।

शाहरुख के साथ आपकी पहली फिल्म है। कैसा रहा अनुभव?
मैंने शाहरुख की फिल्म 'अशोका' देखी थी सबसे पहले। मैं उस वक्त से शाहरुख के साथ काम करना चाहती थीं। लगभग आठ सालों के इंतजार के बाद मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला है।

शाहरुख के साथ मेरी काम करने की इच्छा इसलिए नहीं थी कि वे सुपरस्टार हैं। लेकिन वे रोमांटिक फिल्मों के किंग है तो मैं जानना चाहती थी कि आखिर वे क्यों रुमानी फिल्मों में इतने लोकप्रिय हैं। फिल्म के दौरान मैंने यह बात समझी कि वे किरदारों को जीते हैं। वे जिस तरह शायराना अंदाज में बातें करते हैं। चेहरे के एक्सप्रेशन देते हैं। काफी टफ है। रोमांटिक फिल्में करना आसान काम नहीं। शाहरुख की खासियत है कि वे जानते हैं कि केमेस्ट्री जमेगी। उनकी आंखें बोलती हैं।

आंखों से अभिनय करते हैं वे। मैंने यही गौर किया और शायद यही वजह है कि दर्शकों को मेरी जोड़ी उनके साथ अच्छी लगेगी। वैसे मैं बता दूं कि मैंने बाद के दौर में जाकर डीवीडी पर दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे देखी थी। उस वक्त भी मैंने शाहरुख को देख कर यही सोचा था कि काश, मेरी जिंदगी में भी कोई ऐसा प्यार करनेवाला आए। राज की तरह। मजेदार फिल्म थी। भविष्य में मौका मिला तो उनके साथ और भी रोमांटिक फिल्में करूंगी। शाहरुख की खासियत यह भी है कि वे महिलाओं की कद्र करना और इज्जत देना जानते हैं। उन्होंने जिस तरह इस फिल्म में मेरा और अनुष्का का खयाल रखा है वह मेरे लिए हमेशा खास रहेगा।

'जब तक है जान' में आपका किरदार मीरा का है। किरदार के बारे में कुछ बताएं।
फिलवक्त सिर्फ इतना बता सकती हूं कि मीरा यानी मैं लंदन में रहती हूं। एक लड़के से प्यार करती हूं। लेकिन कुछ ऐसा होता है कि मीरा कन्फ्यूज हो जाती है। लेकिन फिर भी कहानी रुकती नहीं है।

जब तक है जान किस तरह की प्रेम कहानी है?
यह आज की प्रेम कहानी है। इसमें लड़का देवदास की तरह पारो के प्यार में पागल नहीं होता। लेकिन पहले प्यार का दर्द हमेशा उसके साथ रहता है। मुझे लगता है कि आज के जमाने में जिस तरह प्यार की परिभाषा बदली है या फिर जिस तरह से उनका वे ऑफ एक्सप्रेशन बदला है, जब तक है जान कुछ उसी आधार पर बनी है। मानना होगा। यशजी की कल्पना के बारे में। उस जमाने से अब तक उन्होंने अपनी हर लव स्टोरी में कितना अलग-अलग एंगल दिया है।

आप यशराज बैनर की फेवरेट बन चुकी हैं, कुछ खास कारण? धूम 3 में भी आप ही है।

खास कारण मेरी मेहनत है। उनके साथ मेरी सारी फिल्में हिट रही हैं। वैसे यशराज के साथ लगभग हर अभिनेत्री लगातार तीन से चार फिल्मों में काम करती हैं। इसके पीछे कुछ कारण नहीं होता। बस, यशराज बैनर उन्हें मौका देता है जो प्रतिभाशाली होती हैं। वैसे यश जी को मेरी फिल्म 'मेरे ब्रदर की दुल्हन' काफी पसंद थी। वे हमेशा कहते थे कि कैटरीना वास्तविक जिंदगी में भी तुम्हें डिंपल की तरह ही चुलबुला रहना चाहिए। यशजी हमेशा दरअसल, माहौल में खुशियाँ रखना चाहते थे। पॉजिटिव एनर्जी मिलती थी उनसे मुझे।

आप तीनों खानों के साथ काम कर रही हैं और इसलिए आप कामयाब हैं। कई बार यह खबरें आती हैं। आपकी क्या प्रतिक्रिया है। आपको नहीं लगता कि आपकी मेहनत पर यह प्रश्नचिन्ह है?

यह प्रॉब्लम सिर्फ बॉलीवुड की है। यहां ही आपकी मेहनत पर पानी फेरना और दूसरों को इसका क्रेडिट देना आता है। मैं मानती हूं कि अगर मैं खान के काम कर रही हूं और बुरा काम कर रही हूं तो लोग मुझे तुरंत आउट कर देंगे। यह सफलता का कोई मापदंड नहीं है। बेफिजूल की बातें हैं।

यशजी का वह रोमांटिक गाना शूट करने का सपना अधूरा रह गया?

मेरा भी यह सपना अधूरा रह गया। मुझे याद है कि यशजी कितने उत्साहित थे। कितनी तैयारियां कर रखी थी। सब कुछ तय था। मनीष ने 12 साड़ियां बनायी थीं। मैंने सारी साड़ियों में रिहर्सल भी किया था। अफसोस रहेगा कि मैं एक खास मौके का हिस्सा बनते-बनते रह गई।
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