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कास्टिंग काउच इन दिनों हर जगह हैः अमि त्रिवेदी

- अनुराधा गोयल

Updated Wed, 26 Sep 2012 05:04 PM IST
interview every character is a challenge ami trivedi
सहारा वन पर आए धारावाहिक ‘किट्टू सब जानती है’ से लाइम लाइट में आई अमि त्रिवेदी आज छोटे परदे की जानी-मानी हस्ती बन चुकी है। 'राखी', 'जारा', 'कुमकुम', 'इंस्टेंट खिचड़ी', 'बजेगा बैंड-बाजा' जैसे धारावाहिकों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी अमि सब टीवी पर आने वाले शो ‘पापड़ पोल... शहाबुद्दीन की रंगीन दुनिया’ में कोकिला का किरदार अदा करती भी नजर आईं। अमि से उनके अनुभवों और लाइफ के बारे में बातचीत की अनुराधा गोयल ने।
आपने गुजराती सीरियल किए हैं और मेन स्ट्रीम धारावाहिक भी, दोनों में कितना फर्क लगता है?
ये तो पॉपुलैरिटी पर डिपेंड करता है। इसमें कोई शक नहीं है कि हिंदी टेलीविजन की पहुंच बहुत अधिक है और इसका दर्शक वर्ग भी बहुत बड़ा है और गुजराती दर्शक थोड़े लिमिटेड हैं। लेकिन यह भी सच है कि गुजराती ऑडीयंस गुजराती शोज भी पसंद करती है। महाराष्ट्र में जी मराठी और इटीवी मराठी बहुत फेमस है। मुझे गुजराती कल्चर के धारावाहिकों में काम करना अच्छा लगता है। बस चाहती हूं कि वहां के टेलीविजन की क्वालिटी और बजट में थोड़ा सा और सुधार होना चाहिए। मैं दोनों ही स्ट्रीम्स में खूब एन्जॉय करती हूं।

एक डिफरेंट कल्चर के एक्टर को मेन स्ट्रीम में काम करने का कुछ फायदा होता है?
मुझे हुआ था। मैं गुजराती हूं और मुझे मेन स्ट्रीम में गुजराती कल्चर के सीरियल्‍स में काम करने का बहुत फायदा हुआ। लैंग्वेज, कल्चर, सब कुछ एक्टर को पता होता है। सब टीवी के 'पापड़ पोल...' में मेरे लिए कोकिला का करैक्टर एडॉप्ट करना बहुत आसान था और मेरी गुजराती ऑडियंस भी मुझे जानती थी। कल्‍चर बेस्ड कैरेक्टर मिलना भी डायरेक्टर के लिए बहुत आसान हो जाता है। लेकिन इसके साथ ही जो नॉन गुजराती या नॉन मारवाड़ी होकर वहीं इसी कल्चर को अपनाते हैं। उनके लिए ऐसे रोल काफी चैलेंजिंग हो जाते है।

बॉलीवुड स्टार्स का टीवी पर बोलबाला है, ऐसे में टीवी स्टार्स की वैल्यू कम होती नजर आती है क्या?
ऐसा बिल्कुल नहीं है। बॉलीवुड स्टार्स टीवी मीडियम को अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए इसीलिए चुनते हैं क्यों‌कि वो जानते हैं कि टीवी अपने आप में ही बहुत बड़ा मीडियम है। टीवी ‌के स्टार्स अपने लेवल पर बहुत फेमस है, मुझे लगता है ऐसे में उन्हें बॉलीवुड स्टार्स के होने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता। वैसे भी टीवी स्टार्स का फिल्मों की तरफ अट्रैक्‍शन कम हो गया है और वे टीवी की दुनिया में ही खुश रहना पसंद करते हैं क्योंकि टीवी से भी नेम-फेम बराबर का ही मिलता है।

छोटे परदे की थीम सास-बहु से हटकर समाज के रीति-रिवाजों पर फोकस करने लगी है, इसका क्या असर पड़ेगा?
टेलीविजन किसी गलत थीम का समर्थन करता है तो ये गलत बात है क्योंकि टेलीविजन बहुत बड़ा मीडियम है। अगर टेलीविजन पर पुनर्विवाह जैसी चीजें दिखाई जाती हैं तो ये अपने आप में अच्छी बात है और समाज पर इसका पोजिटिव इफेक्ट भी पड़ेगा। इससे समाज में फैली गलत रीतियों को बदलने में मदद मिलेगी। टेलीविजन पर एक्ट्रा मेरिटल अफेयर जैसी गलत बातों को समर्थन नहीं करना चाहिए।

आप चाइल्ड आर्टिस्ट भी रही हैं, उस दौर और इस दौर के सीरियल्स में क्या फर्क लगता है?
आज के समय में धारावाहिकों में ग्लैमराइजेशन बहुत बढ़ गया है। पहले एक महीने में सात दिन काम करना भी बहुत बड़ी बात होती थी। धारावाहिकों के कॉन्सेप्ट से लेकर उनकी मेकिंग तक में बहुत बदलाव आ गया है। पहले सिर्फ कंटेंट पर अधिक ध्यान दिया जाता था लेकिन अब कंटेंट के साथ-साथ लुक पर लोकेशन पर इत्यादि बहुत सारे फैक्टर्स पर खास ध्यान दिया जाता है। पहले रंगमंच के लोग ही ज्यादा टीवी पर आते थे लेकिन अब अलग-अलग प्रदेशों से लोग आ रहे हैं। पिछले कई सालों में वाकई टीवी की दुनिया में बहुत से बदलाव आए हैं। टीवी का दायरा बहुत बढ़ा है, प्लेटफॉर्म बहुत बढ़ा है।

आपके सबसे ज्यादा करीब कौन सा किरदार है?
तीनों ही किरदार मेरे दिल के बहुत करीब है। लेकिन मैं वास्तविक जिंदगी में किट्टू जैसी हूं। उसी की तरह आत्मविश्वासी,अन्याय के खिलाफ बोलने वाली, मेरे सोचने का तरीका सब कुछ।

आपके हिसाब से सबसे ज्यादा चैलेजिंग रोल कौन सा है?
चैलेंजिंग तो हर रोल होता है। लेकिन जब किसी कैरेक्टर में घुस जाते हैं तो फिर उसे निभाने में बहुत मजा आता है। वैसे भी कोई नया कैरेक्टर आप करते हैं तो वो अपने आप में चैलेंजिंग होता है।

टीवी पर भी कास्टिंग काउच बहुत सुनने में आता है, क्या यह बात यही है?
कास्टिंग काउच सिर्फ इंडस्ट्री में ही लिमिटेड नहीं है। ये दुनिया में हर जगह होता है। कोरपोरेट सेक्टर से लेकर फैमिली सेक्टर तक कास्टिंग काउच होता है। हर जगह आपको कॉम्प्रोमाइज और डर्टी थिंग्स का सामना करना पड़ेगा। ये ग्लैमर की फील्ड है तो यहां पर से चीजें ज्यादा हाइलाइट हो जाती हैं। मेरा कास्टिंग काउच से कभी पाला नहीं पड़ा। वैसे भी कास्टिंग काउच उन्हीं के साथ ज्यादा होता हैं जो इसके लिए तैयार रहते हैं। यदि आप अपने बलबूत आगे बढ़ना चाहो तो आपको कोई अप्रोच नहीं कर सकता।

आज के समय में रियैलिटी शोज कितने सफल है?
बहुत सक्सेसफुल है। आप चाहे तो डांस शो देखो या कॉमेडी शो देखो। जो लोग रेगुलर टीवी व्यूवर नहीं है वो भी रियैलिटी शोज देखना पसंद करते हैं। ये लोगों के लिए बहुत बड़ा प्लेटफॉर्म है। ये लोगों का भरपूर मनोरंजन करते हैं और उनको हंसाते भी है। रियैलिटी शोज की खास बात है कि आप जो हैं वहीं दिखाई देते हैं ना कि किसी करैक्टर को निभाते हैं। इसीलिए इनकी टीआरपी भी बहुत होती है।

अगर फिल्मों में गईं तो किन एक्टर्स के साथ काम करना चाहेंगी?
मुझे एक्टिंग करने की ख्वाहिश है फिर वो किसी भी मीडियम में हो इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। मुझे एक्टिंग से बहुत प्यार है, फिर चाहे वो थियेटर हो, फिल्म हो या फिर टीवी। मुझे सारे करंट स्टार्स पसंद हैं, मैं उनके साथ काम करना चाहूंगी। ऋतिक रोशन, रणबीर कपूर, आमिर खान, अमिताभ बच्चन। इतने सारे एक्टर्स है जिनके साथ मैं काम करना पसंद करूंगी। अमिताभ बच्चन जी के साथ काम करने की मेरी दिली ख्वाहिश है।

क्या आप वास्तविक जीवन में भी समाज सेवा में यकीन रखती हैं?
बिल्कुल। मैं चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ी हुई भी हूं। मुझे जानवर बहुत पसंद हैं, मैं उनके लिए भी काम करती हूं और आगे भी बड़े स्तर पर काम करना चाहती हूं।

रंगमंच का अनुभव आपके कितने काम आता है?
बहुत ज्यादा। हालांकि मेरा कोई भी किरदार मेरे पहले किरदार से बिल्कुल नहीं मिलता-जुलता। लेकिन मेरे हर किरदार को समझने, उसमें अपने-आप को ढालने, परदे पर अपने किरदार को प्रस्तुत करने में बहुत मदद मिलती है। यहां तक की रंगमंच के कारण ही मुझे रिहर्सल की भी आदत है। मैं बिना रिहर्सल के कुछ काम नहीं कर पाती।

क्या आप अपने शोज को खुद टीवी पर देख पाती हैं?
हां मैं शूटिंग खत्म होने के बाद अपने शोज का जरूर देखती हूं क्योंकि इससे मुझे अपनी कमियों के बारे में पता चलता है और मैं उन्हें दूर करने की कोशिश करती हूं।

आप किसी छवि में बंधने में विश्वास रखती हैं?
नहीं, मेरे साथ यह पहले हो चुका है। जब मैं गंभीर किरदार निभाती हूं तो नकारात्मक कम ही किरदार मिलते थे। लेकिन जब नकारात्मक किरदार निभाने लगी तो गंभीर नहीं मिले। एक छवि में बंधने का बहुत नुकसान होता है इससे आप विविधता में किरदार निभाने से वंचित रह जाते हैं।

2011 में सब टीवी के 'पापड़ पोल' के बाद आप दिखाई नहीं दी, ऐसा क्यों?
'पापड़ पोल' के बाद मैंने अपनी फैमिली के लिए गैप लिया। मैं अपने हस्बेंड, अपनी फैमिली को टाइम देना चाहती थी। शादी के ढ़ाई साल बाद भी मैंने एक दिन भी ठीक तरीके से घर पर नहीं बिताया, इसीलिए मैं 2012 घर के लिए ही देना चाहती हूं। हां मैंने कुछ समय पहले ही 'द डार्क नाइट राइजिस' के लिए अपनी वॉइस दी है जो कि बैटमैन के अपोजिट लीड एक्ट्रेस है।
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