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बिग बॉस मेरे लिए एक चैलेंज था: सिद्धू

दिनेश श्रीनेत

Updated Sat, 10 Nov 2012 09:23 PM IST
exclusive interview big boss participant navjot singh sidhu
बिग बॉस हाउस में देखते-देखते अपने चुटीले अंदाज से लोकप्रिय हो गए पॉलीटीशियन और क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को गुजरात चुनाव प्रचार को ध्यान में रखते हुए शो छोड़ने का आदेश दिया गया है। चर्चा है कि गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी ने खासतौर पर सिद्धू के नाम का आग्रह किया है। बहुत कम लोगों को पता होगा कि सिद्धू बिग बॉस में जाने के चार ऑफर पहले ही ठुकरा चुके थे। रात करीब हाउस से बाहर निकलते ही सिद्धू ने फोन पर अमर उजाला से खास बातचीत में बिग बॉस हाउस से जुड़े अपने अनुभव शेयर किए।  
बिग बॉस से अचानक आपके जाने की खबर सुनकर काफी लोग हैरान हुए, मगर क्या यह आपके लिए भी उतना ही शॉकिंग था?
खुद मेरे लिए भी यह एक सरप्राइज था। जब मैंने सुना तो थोड़ा स्तब्ध रह गया। मगर कई बार आप कुछ प्लान करते हैं। और स्थितियां ऐसी हो जाती हैं कि जो आप सोचते हैं वह नहीं होता। जो होता है वह परमात्मा की इच्छा के अनुसार होता है। ऐसी स्थिति में शख्स के सामने एक ही रास्ता बचता कि वह अपने कर्तव्य का पालन करे। तो यह मेरा कर्तव्य है जिसके लिए मैं बिग बॉस हाउस से बाहर आ रहा हूं। जब कोई जरनैल हुक्म देता है तो सिपाही को मोर्चे पर खड़ा होना ही पड़ता है।

क्या बिग बॉस हाउस से बाहर होते वक्त आप खुश हैं?
आपने कभी नवजोत सिद्धू दुखी देखा। आप तो बीते चालीस दिनों से हर रोज मुझे अलग-अलग सिचुएशन में देखते रहे हैं। मैं यहां कुछ हासिल करने नहीं आया था। मैं यह मानता हूं यह मेरे लिए एक चैलेंज था। ऊपर वाले की कृपा से मैंने बीस साल क्रिकेट खेला, क्रिकेट कमेंट्री की, टॉक शो में हिस्सा लिया और राजनीति में कदम रखा। तो यह मेरे लिए एक चुनौती थी। यह मेरे मानिसक मनोबल की सबसे बड़ी परीक्षा थी। जिन्होंने मेरे पहले के रूप देखे वह सब अलग-अलग थे। लाफ्टर शो में लोगों ने मुझे इस तरह से हंसते हुए देखा कि उसे कहीं भी कट पेस्ट कर दो। पॉलीटिक्स में मेरा एक गंभीर चेहरा सामने आया। मगर रीयल सिद्धू को नहीं देखा। बिग बॉस में जो सिद्धू है वह रीयल है। वह छुप नहीं सकता। 

जब आपने बिग बॉस में इंट्री की तब से लेकर अब तक- करीब एक महीने के बीच आपने क्या खुद में कोई परिवर्तन महसूस किया?
बहुत चेंज महसूस किया। मैंने यहीं आकर समझा कि कैसे बिना बैसाखियों के कोई इनसान भावनात्मक तरीके से जूझता है। न आपके पास टीवी है, न इंटरनेट, न बच्चे, बीबी। कोई सहारा नहीं हैं, जो कुछ भी समझना है, सोचना है, अकेले के दम पर। ऐसे में बस वही गाना याद आता है, "चल अकेला, चल अकेला, तेरा मेला पीछे छूटा राही चल अकेला"। तो यह अकेले की जर्नी थी। मेरी बेटी ने कहा था कि पापा, कहीं भी जाओ बिग बॉस में मत जाना। नहीं तो कीचड़ के छींटे आप पर भी पड़ेंगे। मैंने मन में सोचा यह कैसा हव्वा है? इस डर को अपने मन से निकालना होगा। मैंने उससे कहा कि बेटी कीचड़ के बीच रहकर भी कमल की तरह खिला जा सकता है। मुझे अफसोस इस बात का है कि मैं उसे यह करके दिखना नहीं सका। 

बिग बॉस हाउस में जाने से पहले आप खुद को कितना कंफर्टेबल महसूस कर रहे थे?
मुझे तो इस रियलिटी शो के बारे में कुछ पता ही नहीं था। मैंने इसे पहले कभी देखा नहीं था। बस अपनी बेटी से इसके बारे में सुना था, और जब बेटी मुझसे कहती थी कि वहां मत जाइए तो मैंने अपने-आप से कहा कि यह क्या हौवा है? यह हौवा गिराना है मुझे। 

बिग बास हाउस का कोई सबसे यादगार लम्हा बताइए?
बहुत कुछ है। यादगार लम्हों की तो भरमार है। क्या भूलूं क्या याद रखूं। जो भी मैं बताऊंगा वो सब कुछ तो बिग बास हाउस में आप देखते ही रहे हैं। आज जाने कहां-कहां यू ट्यूब और जगहों पर इसकी फुटेज मौजूद है।  

बिग बॉस हाउस का सबसे कांप्लीकेटेड कैरेक्टर?
ब्रजेश। 

और सबसे प्यारा शख्स?
डेलनाज, करिश्मा और सना। ये सभी बहुत प्यारे हैं। और हां! असीम त्रिवेदी का भी नाम लेना चाहूंगा। वह भी बहुत प्यारा इनसान है। 

हाउस के भीतर कभी ऐसा हुआ कि आपको क्रोध आया हो?
एक बार भी नहीं। 

यह भी तो तो हो सकता है कि आपको गुस्सा आया हो और आप छिपा गए हों?
देखिए इंसान लगातार चालीस दिनों तक तो अपनी फितरत नहीं छिपा सकता। 

कन्फेशन रूम में लेयर्ड वाइस एनालिसिस टेस्ट के बारे में क्या कहना चाहेंगे? आपको अपने ही बारे में कड़वे सच बोलने पड़े। क्या ये क्षण और सवाल-जवाब आपके लिए मुश्किल थे?
अरे यार, दुनिया में आसान क्या है? आसान तो कुछ भी नहीं है। हर चीज को पाने के लिए आपको कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। जिंदगी का कोई शॉर्टकट नहीं है। आज की युवा पीढ़ी को यह समझना पड़ेगा कि बिना संघर्ष के कुछ नहीं मिलता है। 

मगर जब आप कन्फेशन रूम में होते हैं तो आपका संघर्ष किसी से और से नहीं अपने आप से होता, मैं उन मुश्किल क्षणों की बात कर रहा हूं?
बिल्कुल! मेरी लड़ाई खुद से थी। मैं अपनी ही लकीर को लंबी कर रहा था। मुझे ये हौवा गिराना था। मैंने कहा कि देखता हूं सिद्दू साहब, आपकी नर्वस इसे झेल पाएंगी या नहीं। और मैं बहुत खुश हूं, अभी कुछ देर पहले मेरी उसी बेटी का फोन आया, जो मुझे बिग बॉस में जाने से रोक रही थी। और वह रो दी। बोली, पापा तुम मेरे हीरो हो। जो बंदा यह शो रन करता है... उसने कहा कि सिद्धू जी इस शो मे आकर सभी गिर जाते हैं, मगर आप नहीं गिरे।

आखिरी सवाल, आपने वहां पहुंचने के साथ ही डेलनाज और राजीव के बीच दूरियां मिटाने की कोशिश शुरू की थी, इसमें कितने सफल हुए?
डेलनाज बहुत सेंसटिव है और बहुत ही बेहतर इनसान है। उसने मुझसे कहा कि सिद्धू जी मैं आपकी बहुत इज्जत करती हूं, मगर मैं अपनी लाइफ के पर्सनल स्पेस को सार्वजनिक नहीं करना चाहती। तो मैंने भी इस उसकी इस बात को समझा और उसे सम्मान देते हुए इस मुद्दे पर जोर देना छोड़ दिया। 
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