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जन्मदिन विशेषः सबसे अलग और उम्दा फिल्मकार हैं शेखर

रोहित मिश्र

Updated Thu, 06 Dec 2012 11:53 AM IST
birthday special- shekhar kapoor a different filmmaker
'कोई इंसान फ़िल्म बनाता है और मीलों दूर सिनेमाघर में बैठे हज़ारों लोगों को वह फ़िल्म एक साथ भावुक कर सकती है, हंसा सकती है,रुला सकती है। तो फिल्म सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है। यह साथ-साथ कुछ महसूस करने की जादुई प्रक्रिया का भी माध्यम है।' यह सोच फिल्मकार शेखर कपूर की है।
कुछ इसी सोच के साथ चार्टेड एकाउंटेट की नौकरी छोड़कर शेखर कपूर ने सिने इंडस्ट्री में कदम तो रखा मगर फिल्में चुनिंदा ही बनाईं। शुरुआत बॉलीवुड से हुई और पहुंचे हॉलीवुड तक। शेखर इस बात को लेकर खुद के प्रति अतिरिक्त संवेदनशील रहे हैं कि उनसे एक जैसी फिल्मों का दोहराव न हो। आज से 66 बरस के हो गए शेखर कपूर को बॉलीवुड और हॉलीवुड की एक कड़ी के रूप में भी ‌देखा जा सकता है। वह एक ऐसे फिल्मकार हैं जिनके 'क्लास' और 'रेंज' के मुरीद दोनों जगहों पर मिल जाएंगे।

शेखर की निर्देशन के रूप में फिल्मी पारी 1983 में रिलीज हुई 'मासूम' फिल्म के साथ हुई। एक बच्चे के नजरिए से जीवन को टटोलने वाली यह फिल्म दर्शकों को रास आई। शेखर इस फिल्म से समीक्षकों और फिल्मों के जानकार के लोगों के तो प्यारे बन गए पर उन्हें व्यापक चर्चा 'मिस्टर इंडिया' से मिली। 1987 में रिलीज हुई इस फिल्म की कहानी, उसका ट्रीटमेंट और किरदारों के चरित्र का विस्तार इतना उम्दा था कि फैंटेंसी कहानी लगने के बावजूद यह फिल्म हर तरह के दर्शक के साथ कनेक्ट हो गई। शेखर ने इस फिल्म से दिखाया था‌ कि वह भारत के बड़े वर्ग के लिए भी फिल्में बना सकते हैं।

आमतौर पर मुख्यधारा की कामर्शियल फिल्म हिट होने के बाद निर्देशक वैसी ही फिल्में बनाने लगते हैं। शेखर कपूर ने इस परंपरा को तोड़ा। इस फिल्म के बाद शेखर ने 'बैंडिट क्वीन' जैसी चर्चित और ऑफबीट फिल्म बनाई। इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक फूलन देवी की कहानी पर आधारित इस फिल्म को बनाने के लिए शेखर ने लगभग तीन साल का रिसर्च किया। यह काम शेखर ने ऐसे समय किया था जब उस दौर की हर ‌फिल्म फॉर्मूलों पर बन रही थी। 'बैंडिट क्वीन' फिल्म ने यह दिखाया कि भारत में ऐसी फिल्में भी बन सकती हैं।

खुद को न दोहराने वाले शेखर कपूर कोई हिंदी फिल्म बनाने के बजाय हॉलीवुड की ओर मुड़े। 1998 में शेख्रर ने इंग्लैंड की महारानी इलिजाबेथ के शासन काल पर आधारित फिल्म 'इलिजाबेथ' के नाम से ही बनाई। यह फिल्म सफल भी रही और चर्चित भी। शेख्रर की अगली फिल्म भी बॉलीवुड की रही। उन्होंने 2002 में 'फोर फेदर्स' नाम की एक्‍शन ड्रामा फिल्म बनाई। युद्ध की प्रष्ठभूमि पर बनीं यह फिल्म सफल रही थी।

2007 में शेखर कपूर ने 'एलिजाबेथ' फिल्म का सीक्वेल 'इलिजाबेथः द गोल्डन ऐज' के नाम से बनाई। 2008 में उन्होंनें 'न्यूयॉर्क आई लव यू' और 2009 में 'पैसेज' फिल्म बनाई। 2009 के बाद बतौर निर्देशक शेखर की कोई फिल्म नहीं आई है। अब शेखर कपूर 'पानी' नाम की ‌एक हिंदी फिल्म बना रहे हैं।

पानी की समस्या और भविष्य में इस समस्या की वजह से होने वाली समस्याओं पर केंद्रित इस फिल्म में मुख्य नायक के रूप रितिक रोशन का नाम चल रहा है। यह फिल्म 2013 के लिए प्रस्तावित है। निर्देशन करने
के अलावा शेखर कपूर ने 'दिल से' और 'गुरु' जैसी हिट फिल्मों को प्रोड्यूस भी किया है।
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