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आज भी बरकरार है 'ड्रीम गर्ल' का जादू

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क

Updated Mon, 29 Oct 2012 10:42 PM IST
birthday special dream girl hema still popular
हेमा मालिनी ने फिल्‍म इंडस्ट्री में सौंदर्य की एक अलग तरह की परिभाषा गढ़ी थी। अपने फिल्मी कॅरियर में उन्हें लंबे समय तक ड्रीम गर्ल के नाम से पुकारा गया। 16 अक्टूबर 1948 में जन्मीं हेमा ने 20 साल की उम्र में हिंदी फिल्मों में कदम रखा किया। इसके पहले वह साउथ की कुछ फिल्मों में काम कर चुकी थीं। राज कपूर के साथ उनकी पहली फिल्म 'सपनो का सौदागर' हिट रही और हिंदी फिल्‍म इंडस्ट्री ने हेमा को हाथों-हाथ लिया।
सत्तर के दशक में हेमा मालिनी फिल्‍म इंडस्ट्री की धुरी बन चुकी थीं। धर्मेंद्र के साथ उन्होंने कई फिल्में कीं और बॉलीवुड में यह जोड़ी सुपरहिट रही। हेमा को ड्रीमगर्ल की उपाधि इसी दौरान दी गई। बतौर नायिका हेमा मालिनी का कॅरियर लंबा रहा। राजेश खन्ना के साथ 1987 में आई फिल्म 'सीतापुर की गीता' बतौर नायिका हेमा की अंतिम फिल्म थी। इसके बाद की आई फिल्मों में हेमा की भूमिका चरित्र भूमिका की ओर बढ़ती गई।

तमिलनाडु से मुंबई तक का सफर
हेमामालिनी का बचपन तमिलनाडु के विभिन्न शहरों में बीता। हेमा के पिता वी एस आर चक्रवर्ती तमिल फिल्मों के निर्माता थे। फिल्मी परिवेश में पली-बढ़ी हेमामालिनी ने चेन्नई के आंध्र महिला सभा से अपनी पढ़ाई पूरी की। रूपहले पर्दे पर हेमा ने पहली बार पदार्पण किया एक नर्तकी के रूप में।

तेलगू फिल्म 'पांडव वनवासम्' में हेमा ने एक नृत्य में पहली बार बड़े पर्दे पर अपनी झलक दिखाई, पर दक्षिण भारतीय फिल्म निर्माता-निर्देशकों को वे प्रभावित करने में असफल रहीं। इस तरह चार वर्षो के संघर्ष के बाद भी हेमामालिनी को दक्षिण भारतीय फिल्मों में अभिनय की पारी शुरूआत करने का अवसर नहीं मिल पाया। आखिरकार, हेमा की खूबसूरती और नृत्य कला ने हिंदी फिल्मों के शोमैन राजकपूर को प्रभावित किया।

इंडस्ट्री को मिली ड्रीम गर्ल
सपनों का सौदागर की नायिका के रूप में हिंदी फिल्मों को उसकी ड्रीम गर्ल की पहली झलक मिली। धीरे-धीरे हेमामालिनी का सम्मोहन हिंदी फिल्मी दर्शकों के सर चढ़कर बोलने लगा और उनका नाम शीर्ष अभिनेत्री की सूची में सबसे ऊपर शुमार हो गयीं। लगभग तीन दशक तक हेमामालिनी के अभिनय और आकर्षण का जादू तात्कालिक अभिनेत्रियों पर हावी रहा। अपने दौर के लगभग हर कलाकार के साथ हेमा की जोड़ी सुपरहिट रही।

'रामकली', 'दुर्गा' और 'सीतापुर की गीता' फिल्मों में हेमा की भूमिका नायक से कहीं ज्यादा मजबूत थी। हिन्दी सिनेमा में नायिकाओं को तरह-तरह के विशेषणों से पुकारने की परंपरा रही है। 'फर्स्ट लेडी ऑफ इंडियन स्क्रीन' विशेषण से देविका रानी को नवाजा गया। 'लेडी इन व्हाइट' से नरगिस को पुकारा गया। 'ब्यूटी क्वीन' बनीं सायरा बानो और 'ड्रीम गर्ल' के रूप में फिल्म निर्माता अनंत स्वामी ने हेमा को बहुप्रचारित किया।

तुम्हारा नाम क्या है बसंती
हेमा मालिनी ने अपने फिल्मी करियर में अलग-अलग मिजाज की फिल्में कीं। 'जॉनी मेरा नाम', 'ड्रीम गर्ल', 'राजा जानी', 'सीता और गीता', 'धर्मात्मा', 'शोले', 'चरस', 'दो और दो पांच', 'बागबान', 'रजिया सुल्तान', 'मीरा' और 'क्रांति' हेमा की उल्‍लेखनीय फिल्‍में रहीं। हिंदी फिल्मी दर्शकों ने हेमामालिनी के अभिनय के हर रंग देखे हैं।

'शोले' में बातूनी बसंती हो या 'रजिया सुल्तान' में एक कठोर ह्रदय शासक, 'सीता और गीता' में दोहरी भूमिका हो या 'बागबान' में उम्रदराज पत्‍‌नी की भूमिका हेमामालिनी ने हमेशा ही दर्शकों पर अपने अभिनय की गहरी छाप छोड़ी है। 'दिल आशना है' के निर्देशन और निर्माण की जिम्मेदारी निभाकर हेमामालिनी ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने लंबे अनुभव को रचनात्मक मोड़ दिया। हिन्दी सिनेमा और कला जगत में योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री की उपाधि से भी सम्मानित किया गया।

शादी के लिए बदला धर्म
स्वप्न सुंदरी हेमामालिनी का निजी जीवन भी फिल्मों की तरह की रोचक और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। जीतेंद्र और संजीव कुमार के साथ प्रेम-प्रसंग की चर्चाओं के बीच हेमामालिनी ने हिंदी फिल्मों के हीमैन की उपाधि से संबोधित किए जाने वाले अभिनेता धर्मेद्र से विवाह रचाया।

धर्मेन्द्र शादीशुदा थे इसलिए शादी करने के लिए उन्हें अपना धर्म बदलना पड़ा। शादी के लिए धर्मेंद्र दिलावर खां बने तो हेमा आईशा। उनका परिवार इस शादी के बेहद खिलाफ था। धर्मेद्र-हेमा की जोड़ी हिंदी फिल्मों के उन प्रेमी-युगलों की सूची में शामिल हैं जो फिल्मी पर्दे के साथ-साथ निजी जीवन में भी सफल रही हैं।

अभिनय के साथ नृत्य का भी शौक
हेमा मालिनी आज भी भारत की सबसे बेहतर भारतनाट्यम नृत्यांगना हैं। वह देश के साथ विदेशों में भी अपने डांस के शो प्रस्तुत करती रहती हैं। उनकी दोनों बेटियां एशा और अहाना भी नृत्य में उनके साथ जुगलबंदी करती हैं। लुप्त हो रही नृत्य शैली मोहिनीअट्टम के अस्तित्व को बनाए रखने में हेमामालिनी का योगदान उल्लेखनीय है।

हेमा की राजनीतिक पारी
1999 में विनोद खन्ना के लिए चुनाव प्रचार करने के साथ ही हेमा मालिनी ने राजनीति के प्रति अपना रुझान दर्शा दिया था। 2004 में हेमा ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ले ली थी। 2010 में हेमा पार्टी की महासचिव भी बनीं। हेमा राज्यसभा की सदस्य भी हैं।

हेमा से जुड़ी खास बातें
राजकपूर ने फिल्म ‘सत्यम-शिवम्‌-सुन्दरम’ का रोल पहले हेमा मालिनी को ऑफर किया था। फिल्म में जरूरत से ज्यादा अंग प्रदर्शन था, इसलिए हेमा ने इंकार कर दिया।
पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने फिल्म ‘सीता और गीता’ कई बार देखी। हेमा का डबल रोल उन्हें बेहद पसंद आया।
हेमा अपनी सुंदरता बनाए रखने के लिए प्रतिदिन योग तथा व्यायाम करती हैं।
सप्ताह में दो बार उपवास उनकी नियमित जिंदगी का अंग है। इनमें एक दिन शुक्रवार होता है।
हेमा की पसंद में कांजीवरम्‌ साड़ियाँ, चमेली के गजरे और ढेर सारी ज्वेलरी हैं।
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