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तो क्या राजधानी में नहीं रुक पाएगी रैगिंग?

आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ

Updated Wed, 29 Jan 2014 09:43 AM IST
anti raging cell
यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में रैगिंग को रोकने के उपाय हाशिए पर हैं। यूजीसी के सख्त निर्देशों के बावजूद कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरा, अलॉर्म बेल, एंटी रैगिंग हेल्प लाइन व एंटी रैगिंग वैन की व्यवस्था नहीं हो पाई है।
रैगिंग की रोकथान करने के लिए सिर्फ कागजों पर ही उपाय किए जा रहे हैं। हाल ही में कुलपतियों के सम्मेलन में कुलाधिपति बीएल जोशी ने रैगिंग की घटनाओं पर चिंता जताई।

इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग हरकत में आया और उसने सभी राज्य विश्वविद्यालयों व उससे संबद्ध डिग्री कॉलेजों में रैगिंग रोकने के लिए कड़े उपाय करने के आदेश जारी किए।

मगर रैगिंग रोकने की कवायद कब धरातल पर आएंगे यह कहना मुश्किल है। खुद लखनऊ विश्वविद्यालय व उससे संबद्ध कॉलेजों में रैगिंग रोकने के लिए अभी तक कोई योजना नहीं बनाई गई है।

लविवि में करीब छह वर्ष पहले पूर्व कुलपति आरपी सिंह ने कैमरे लगवाए थे वे काम ही नहीं कर रहे। जबकि नैक मूल्यांकन के चक्कर में एलयू प्रशासन इन दिनों विवि के रंगरोशन व अन्य कार्यों पर करोड़ो रुपये खर्च कर रहा है।

कुछ एक डिग्री कॉलेजों को छोड़ दें तो बाकी डिग्री कॉलेजों में भी रैगिंग रोकने के प्रति अधिकारी सचेत नहीं हैं। वहीं यूपीटीयू से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी रैगिंग रोकने के उपाय भी हाशिए पर हैं।

विशेष सचिव उच्च शिक्षा निधि केसरवानी ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार को रैगिंग रोकने के लिए सख्त इंतजाम करने की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं।

राजधानी में केवल शिया पीजी कॉलेज ने अपने यहां सीसीटीवी कैमरा लगाया है। वहीं नेशनल पीजी कॉलेज में रैगिंग की रोकथाम के लिए सख्त इंतजाम किए गए हैं।

सबसे ज्यादा छात्र संख्या वाले जय नारायण पीजी कॉलेज (केकेसी) में अभी तक सीसीटीवी कैमरा, अलॉर्म बेल, एंटी रैगिंग हेल्पलाइन व एंटी रैगिंग वैन की व्यवस्था नहीं है।

जबकि कुछ महीने पहले सभी कॉलेजों के प्राचार्यों की बैठक में डीआईजी नवनीत सिकेरा ने रैगिंग रोकने के लिए सख्त प्रावधान करने के निर्देश दिए थे।

जबकि बीती 26 सितंबर 2013 को सीबीआई के पूर्व निदेशक डॉ. आरके राघवन की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने सख्त निर्देश दिए थे कि कॉलेज में रैगिंग को रोकने के लिए कड़े प्रावधान किए जाने चाहिए।

इसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्चतर शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव आरपी सिसोदिया ने सभी यूनिवर्सिटी को इस संबंध में सख्त आदेश जारी किए गए थे।

मगर इन आदेशों का कॉलेजों के अधिकारियों पर कोई असर नहीं हो रहा है। एलयू व उससे संबद्ध डिग्री कॉलेजों के साथ-साथ यूपीटीयू से संबद्ध इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में रैगिंग रोकने के लिए उचित इंतजाम नहीं किए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार कॉलेज रैगिंग को बदनामी से जोड़कर देखते हैं यही कारण है कि वह इस पर कार्रवाई की बजाए इसे दबाने पर ज्यादा विश्वास करते हैं।
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