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आखिर चीन को ये क्या हो गया?

sachin yadav

sachin yadav

Updated Tue, 21 Jan 2014 08:24 AM IST
what happen with china?
दुनिया भर में पिछले 14 सालों से छाया रहने वाले चीन को आखिर ये क्या हो गया है।
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की विकास दर साल 2013 में पिछले 14 साल में सबसे कम रही।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक समीक्षाधीन अवधि से एक साल पहले की तुलना में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 7।7 फ़ीसदी रही, जो साल 1999 के बाद की निम्न दर है।

हालांकि यह विकास दर सरकार के अनुमान 7।5 फ़ीसदी से बेहतर है। साल 2012 में भी विकास दर यही थी।

ताज़ा आंकड़ों में चीन में उच्च विकास दर बनाए रखने के लिए नीति-निर्माताओं के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र किया गया है।

गिरावट की संभावना
कई जानकारों का मानना है कि भविष्य में चीन की विकास दर और घटेगी क्योंकि यह देश निवेश क्लिक करें आधारित विकास मॉडल की जगह घरेलू खपत आधारित विकास के रास्ते पर चल रहा है।

सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक चीन की विकास दर अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में घटी है।

इस अवधि में विकास की दर 7.7 फीसदी रही जबकि इससे पहले की तिमाही में यह दर 7.8 फीसदी थी।

शंघाई में शेनयिन एंड वांगू सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्री ली हुईयोंग ने कहा, ''आंकड़ों से पता चलता है कि चीन की अर्थव्यवस्था 2013 की तीसरी तिमाही में निचले स्तर तक पहुंच गई थी और पिछले साल के अंत में इसमें स्थायित्व आया।''

उन्होंने कहा, ''संभावना यह है कि 2014 में ऐसी स्थिति बनी रहेगी, क्योंकि हम स्थाई आर्थिक विकास बनाए रखने के लिए आर्थिक सुधार आगे बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। हमने 2014 के लिए अनुमानित जीडीपी विकास दर 7।5 फीसदी बनाए रखी है, हालांकि हमें अर्थव्यवस्था में कर्ज़ की समस्या से पैदा जोखिम को लेकर कदम उठाने की ज़रूरत है।''
कर्ज चिंता

सरकारी बैंकों पर गैर उत्पादक ऋण के बढ़ते बोझ से चिंता बढ़ती जा रही है।

हाल के सालों में सरकारी निवेश के कारण चीन में विकास की दर बेहतर रही है। चीन के बैंक विशेषकर चारों सबसे बड़े सरकारी बैंकों ने वैश्विक वित्तीय संकट के बाद के वर्षों में देश में तेज विकास दर को बनाए रखने के लिए रिकार्ड उधारी दी है।

हालांकि ऐसी चिंता जताई गई है कि इन पैसों का एक हिस्सा गैर उत्पादक निवेश में चला गया है और बैंक संभवतः इन ऋणों की वसूली नहीं कर पाएंगे।

जानकार इससे चिंतित हैं कि गैर-निष्पादित ऋणों का बोझ बढ़ने से न केवल बैंकिग सेक्टर प्रभावित होगा, बल्कि इसका संपूर्ण विकास पर भी गहरा असर पड़ेगा।

शैडो बैंकिंग
इसके अलावा शैडो बैंकिंग यानी गैर बैंकिंग कंपनियों द्वारा दी जाने वाली उधारी में वृद्धि को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है।

कई आलोचकों ने चेताया है कि शैडो बैंकिंग के जरिए ऋण में पारदर्शिता कम रहती है और यह चीन के आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा जोखिम है।

इसी महीने कई मीडिया रिपोर्ट से इसके संकेत मिले थे कि चीन ने शैडो बैंकिंग पर बेहतर निगरानी रखने के लिए नियम बनाने की तैयारी की थी।

हांगकांग के मिजुहो सिक्योरिटीज में चीन के मुख्य अर्थशास्त्री शेन जिंगगुआंग ने कहा कि शैडो बैंकों और स्थानीय सरकार की उधारी पर नियंत्रण की सरकार की कोशिश से निवेश प्रभावित होगा।

कई जानकारों का कहना है कि इन चिंताओं को दूर करने के लिए नीति निर्माताओं को उधारी में वृद्धि को रोकना होगा वहीं इन कदमों से चीन का आर्थिक विकास प्रभावित होगा।
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