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श्रीलंका, म्यांमार, नेपाल जाएगा यूपी का आलू

चन्द्रभान यादव/ अखिलेश कुमार/फर्रुखाबाद

Updated Wed, 21 Nov 2012 08:54 PM IST
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भारतीय आलू का निर्यात श्रीलंका, म्यांमार, भूटान व नेपाल में किया जाएगा। इन देशों को भारत में पैदा होने वाले कुल आलू का करीब 15 फीसदी निर्यात किया जाएगा। इसके लिए इंडियन पोटैटो ग्रोअर एंड एक्सपोर्ट सोसायटी ने मसौदा तैयार कर लिया है।
यह निर्यात उत्तर प्रदेश पोटैटो एक्सपोर्ट फैसीलिटेशन सोसाइटी के जरिए होगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी आलू निर्यात के मुद्दे पर अपनी अनौपचारिक मंजूरी दे दी है। बस आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। फर्रुखाबाद आए वस्त्र एवं रेशम उद्योग मंत्री शिवकुमार बेरिया ने इसकी पुष्टि की है।

फर्रुखाबाद के प्रभारी मंत्री बेरिया ने कहा कि आलू को लेकर सरकार गंभीर है। सोसायटी के मसौदे पर कार्रवाई चल रही है। इंडियन पोटैटो ग्रोअर एंड एक्सपोर्ट सोसाइटी देश के सात राज्यों में निर्यात का इंतजाम देखती है। सोसाइटी का मकसद आलू किसानों को वाजिब दाम दिलाना है। वर्ष 2009 में यूपी से 1,000 मीट्रिक टन आलू नेपाल भेजा गया था।

इसमें फर्रुखाबाद की 900 मीट्रिक टन की भागीदारी थी। इसके बाद से आलू का निर्यात बंद है। इस साल नए सिरे से आलू निर्यात की तैयारी की गई है। हालांकि किस देश में कितना आलू निर्यात किया जाएगा, अभी यह तय नहीं हैं। सोसायटी की ओर से उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, गुजरात, बिहार, आंध्र प्रदेश, दिल्ली एवं राजस्थान के कारोबारियों से भी संपर्क साधा गया है।

इन किस्मों का होगा निर्यात
इंडियन पोटैटो ग्रोअर एंड एक्सपोर्ट सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुधीर कुमार शुक्ला के मुताबिक निर्यात होने वाले आलू की प्रमुख किस्मों में 3797, कुफरी बहार, चिपसोना कुफरी व पुखराज शामिल होंगी। ये उत्तर प्रदेश की प्रमुख किस्में हैं। सुधीर कुमार के मुताबिक निर्यात के समय आलू घरेलू मूल्य से करीब 20 रुपये प्रति कुंतल महंगा होता है। अनुदान मिलने की वजह से किसानों व व्यापारियों को ज्यादा फायदा मिल जाता है।

किसानों को क्या होगा फायदा
उत्तर प्रदेश राज्य मंडी परिषद निर्यातकों को अनुदान भी देती है। इसमें पचास पैसे प्रति किलो प्रोत्साहन व 1.50 पैसे प्रति किलो परिवहन अनुदान शामिल है। इस तरह आलू के निर्यात से किसानों को पांच से छह रुपये प्रति किलो अतिरिक्त मुनाफा मिल जाता है। खपत बढ़ने से घरेलू मंडियों में भी दाम नहीं गिरता है।

निर्यात में सर्टीफिकेट का रोड़ा
इंडियन पोटैटो ग्रोवर एंड एक्सपोर्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुधीर कुमार शुक्ला बताते हैं कि आलू के निर्यात में रोग मुक्ति का सर्टीफिकेट रोड़ा बनता है। इसे लखनऊ की पोटैटो सीनेटरी लैब जारी करती है। सभी किसानों के लिए वहां पहुंचना दिक्कत तलब होता है। जिला स्तर पर लैब संचालित करने की मांग चल रही है। इसके अलावा किसानों क े मंडी समिति के लाइसेंसी होने, नाइन आर, सिक्स आर फार्म की औपचारिकताएं, कस्टम ड्यूटी, ब्रांड, एपिड रजिस्ट्रेशन की शर्तों की जटिलता भी समस्या बनती है। इनमें शिथिलता मिल जाए तो निर्यात बढ़ जाएगा।
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