आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

चीनी का लेवी कोटा समाप्त करने की सिफारिश

नई दिल्ली/एजेंसी

Updated Fri, 12 Oct 2012 09:23 PM IST
Sugar stocks rise on Rangarajan panel report on decontrol
चीनी को नियंत्रण मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा गठित समिति ने लेवी कोटा समाप्त करने की सिफारिश की है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने शुक्रवार को यह सिफारिश करते हुए कहा कि भविष्य में राज्य सरकारों को सार्वजनिक वितरण व्यवस्था (पीडीएस) की चीनी का मूल्य तय करने की इजाजत नहीं होगी।

हालांकि चीनी की धुलाई और लेवी चीनी की कीमत और बाजार में बिकने वाली चीनी की कीमत में अंतर के लिए वर्तमान सब्सिडी व्यवस्था लागू रहेगी। इसमें खुले बाजार में बिकने वाली चीनी और लेवी की चीनी की कीमत में अंतर के कारण सब्सिडी का वर्तमान बढ़ा हुआ स्तर भी शामिल है।

अभी चीनी मिलों को अपने कुल उत्पादन का 10 फीसदी हिस्सा सरकार को देना होता है, जिसका सरकार पीडीएस के तहत वितरण करती है। रंगराजन ने कहा कि लेवी कोटा समाप्त करने से चीनी उद्योग और ग्राहक दोनों को फायदा होगा और बाजार में चीनी की उपलब्धता बनी रहेगी।

चीनी उद्योग लेवी की चीनी की लागत किसानों और ग्राहकों दोनों को देगा। समिति ने वर्तमान नियंत्रित तंत्र के साथ गैर लेवी चीनी जारी करने की जरूरत को खत्म करने की सिफारिश की। इसके साथ ही समिति ने गन्ना आरक्षित भूमि को खत्म करके किसानों और मिलों के बीच करार की अनुमति दिए जाने की सिफारिश की है।

चीनी पर उद्योग पर सरकार के नियंत्रण का प्रभाव
- मिलों को अपने कुल उत्पादन का दस फीसदी सरकार को राशन में बिक्री के लिए देना होता है। सालाना लगभग 28 लाख टन लेवी चीनी में जाती है।
- लेवी चीनी को सरकार 1,905 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीदती जबकि चीनी का बाजार मूल्य इससे ऊंचा होता है।
- लेवी चीनी को रियायती दर पर देने से मिलों को सालाना लगभग 3,500 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है।
- बाजार में कितनी चीनी बेचनी है। यह सरकार तय करती है। इससे मिलों के सामने निर्धारित कोटे की बिक्री करना मजबूरी होता है। बाजार में मांग कम होने के बावजूद अधिक कोटा जारी होने पर मिलों को मजबूरन नीचे भावों पर चीनी बेचनी होती है नहीं तो सरकार बिना बिके हुए कोटे को जब्त कर लेती है।
- सरकार का नियंत्रण होने से गन्ने का मूल्य भी सरकार तय करती है। केंद्र और राज्य अपने-अपने हितों के हिसाब से गन्ने का दाम तय करते हैं। इससे मिलों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
उत्पादन-पिछले पेराई सीजन के दौरान देश में चीनी का उत्पादन 260 लाख टन हुआ था। जबकि चालू पेराई सीजन में उत्पादन घटकर 240 से 250 लाख टन रहने का अनुमान है।

लेवी प्रावधानों के तहत चीनी की खरीद
- सरकार राशन की दुकानों के जरिए जन वितरण प्रणाली के तहत सालाना फिलहाल करीब 27 लाख टन चीनी 13.50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बांटती है। इस दुकानों पर गरीबी रेखा के नीचे वालों को ही चीनी मिलती है।
- यह कीमत 1 मार्च 2002 को निर्धारित की गई थी। सरकार द्वारा 19.35 रुपये प्रति किलो के हिसाब से लेवी शुगर खरीदी जाती है, जिसे ग्राहकों तक पहुंचाने में 25.37 रुपये का खर्च आता है।
- लेवी प्रावधानों के तहत शुगर मिल्स को कुल उत्पादित चीनी का 10 फीसदी सरकार को राशन की दुकानों के जरिए वितरण के लिए सस्ती दर पर देना होता है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

ऐश्वर्या राय सोशल मीडिया से रहेंगी दूर, पति अभिषेक ने लगाया बैन, वजह चौंका देगी

  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

कम दाढ़ी की वजह से हैं परेशान? इन तरीकों से पाएं राहत

  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

20 दिन तक सिर्फ गाजर और ब्लैक कॉफी के सहारे जिंदा रहा ये एक्टर

  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

इस हीरोइन को शाहिद ने दी चेतावनी, कहा, 'सबकुछ भुलाकर आगे बढ़ो'

  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

दिमाग के लिए फायदेमंद है व्रत रखना, जानें इसके और भी फायदे

  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top