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रंगराजन समिति की सिफारिशों को चीनी मिलों का समर्थन

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Thu, 08 Nov 2012 08:43 PM IST
sugar mills endorsed rangarajan committee recommendations
निजी और सहकारी चीनी मिलों के संगठनों ने चीनी उद्योग को नियंत्रण मुक्त करने के मुद्दे पर आई सी. रंगराजन समिति की सिफारिशों का समर्थन करते हुए लेवी चीनी की बाध्यता और खुले बाजार की चीनी कोटा व्यवस्था (रिलीज मैकेनिज्म) को तुरंत खत्म करने की मांग की है।
गन्ना मूल्य और क्षेत्र आरक्षण जैसे विवादित मुद्दों पर चीनी मिलें किसानों व राज्य सरकारों के साथ बातचीत के जरिए हल निकालने के पक्ष में हैं, जबकि गैर विवादित मुद्दों को तुरंत लागू करने की मांग कर रही हैं। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) और नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज ने बृहस्पतिवार को एक संयुक्त प्रेस वार्ता कर रंगराजन समिति की सिफारिशों का समर्थन किया है।

इस्मा के अध्यक्ष गौतम गोयल ने कहा कि पीडीएस के लिए 10 फीसदी चीनी उत्पादन लागत से भी कम पर सरकार को बेचने की मजबूरी के चलते चीनी उद्योग को सालाना 3,000 करोड़ रुपये के नुकसान की बात समिति ने भी मानी है। इसका बोझ आखिर में किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

अगर, लेवी चीनी और रिलीज मैकेनिज्म की बाध्यता समाप्त होती है, तो मिलें किसानों को उचित भुगतान समय पर देने में सक्षम हो पाएंगी। इस्मा का मानना है कि गन्ना मूल्य से जुड़ी विवादित सिफारिशों पर किसानों और राज्य सरकार के साथ बातचीत की जरूरत है, लेकिन फिलहाल पहले चरण की गैर विवादित सिफारिशों को लागू कर देना चाहिए।

सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों के संगठन एनएफसीएफएफ के अध्यक्ष जयंतीलाल बी पटेल का कहना है कि पिछले तीन दशक में तीन एक्सपर्ट कमेटी चीनी उद्योग को नियंत्रण मुक्त करने की सिफारिश कर चुकी हैं। अब इस मामले में ज्यादा देर हुई तो न गन्ने की खेती फायदेमंद रहेगी और न ही चीनी उद्योग का विकास होगा। सरकार की वेलफेयर स्कीम का बोझ किसानों पर डालना उचित नहीं है।

रंगराजन समिति की सिफारिशों पर किसान संगठनों के विरोध पर इस्मा के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने कहा है कि गन्ने से जुड़े मुद्दों पर किसानों और राज्य सरकारों के साथ विचार-विमर्श की जरूरत है। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था के बजाय गन्ने और चीनी के दाम तय करने की एक पारदर्शी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया है। नियंत्रण मुक्त होने के बाद चीनी के महंगे होने की आशंकाओं से इनकार करते हुए वर्मा ने दावा किया है कि लेवी बाध्यता इससे खुले बाजार में चीनी की कीमतें नीचे आएंगी और चीनी मिलों की माली हालत सुधरेगी।
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