आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

दूसरी तिमाही में घटी आर्थिक विकास दर की रफ्तार

नई दिल्ली/ब्यूरो

Updated Sat, 01 Dec 2012 12:16 AM IST
speed of economic growth rate decreased in second quarter
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक विकास की रफ्तार पिछले साल के मुकाबले सुस्त रही है। सितंबर 2012 को समाप्त तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर 5.3 फीसदी पर रही, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 6.7 फीसदी दर्ज की गई थी। वहीं चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 5.5 फीसदी थी। इस तरह तिमाही आधार पर जीडीपी में 0.2 फीसदी और सालाना आधार पर 1.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर 1.2 फीसदी रही है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 3.1 फीसदी पर थी। वहीं विनिर्माण क्षेत्र का विकास पिछले साल के 2.9 फीसदी से घटकर 0.8 फीसदी ही रहा। हालांकि खनन क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार के साथ विकास दर 1.9 फीसदी पर दर्ज की गई है। पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में यह 5.4 फीसदी नकारात्मक दर्ज की गई थी।

इसके अलावा बिजली, गैस और जलापूर्ति क्षेत्र का प्रदर्शन 9.8 फीसदी से घटकर 3.4 फीसदी, व्यापार, होटल, परिवहन और संचार क्षेत्र 9.5 फीसदी से फिसलकर 5.5 फीसदी, वित्त, बीमा, रीयल एस्टेट 9.9 फीसदी से घटकर 9.4 फीसदी दर्ज गई है। दूसरी ओर निर्माण क्षेत्र का विकास दर 6.3 फीसदी से बढ़कर 6.7 फीसदी और सामाजिक व निजी सेवाओं का प्रदर्शन 6.1 फीसदी से बढ़कर 7.5 फीसदी आंकी गई है।

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कम वर्षा और विनिर्माण क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन को जीडीपी में सुस्ती का कारण बताते हुए कहा कि खासतौर पर जून-जुलाई माह में सामान्य से कम वर्षा होने के कारण कृषि और इससे संबंधित क्षेत्र के विकास दर में कमी आई है। वहीं विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन के कारण औद्योगिक क्षेत्र को बड़ा झटका लगा है।

सुस्त रहेगी जीडीपी की रफ्तार: जोशी
चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही में सरकार की उम्मीद से कम रही जीडीपी वृद्धि दर के बारे में क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी का कहना है कि औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में चल रही कमजोरी की वजह से जीडीपी की रफ्तार हल्की रहने की आशंका है। फिर भी अगले कुछ तिमाही के दौरान हम विनिर्माण क्षेत्र में सुधार की उम्मीद करते हैं और जीडीपी में भी हल्का सुधार आने की शुरुआत हो सकती है।

ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए: प्रसन्ना
आईसीआईसीआई सिक्युरिटीज के अर्थशास्त्री ए. प्रसन्ना का कहना है कि जीडीपी के इन आंकड़ों से अर्थव्यवस्था पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि रिजर्व बैंक का वार्षिक अनुमान इसी से मिलता-जुलता है। वैसे भी जीडीपी वृद्धि के यह आंकड़ा दो महीने पुराना है जबकि आरबीआई मौजूदा रुझान को देखता है। पिछले कुछ महीनों के दौरान माहौल थोड़ा बेहतर हुआ है। देखनी वाली बात यह होगी कि क्या औद्योगिक उत्पादन में कुछ सुधार होता है या नहीं। अगले महीने अगर मुद्रास्फीति आरबीआई के अनुमान से कम रहती है तो जनवरी में बैंक दरों में कमी के आसार बढ़ जाएंगे।

फिक्की प्रतिक्रिया
दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों से स्पष्ट है कि आर्थिक गतिविधियां लगातार सुस्त बनी हुई हैं। अगर शेष दूसरी छमाही में आर्थिक वृद्धि दर में व्यापक सुधार नहीं आता है, तो इस साल जीडीपी 6 फीसदी के अंदर ही सिमट जाएगी। यह उस अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर नहीं हैं, जहां हर साल बड़ी संख्या में रोजगार के नए अवसर पैदा करने पड़ते हैं। सुधार के एजेंडों को पूरी ताकत से आगे बढ़ाना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को नए सिरे से प्रोत्साहन देना भी अत्यंत आवश्यक है।
- आरवी कनोरिया, प्रेसिडेंट, फिक्की

पीएचडी चैम्बर
दूसरी तिमाही में आर्थिक विकास दर के गिरकर 5.3 फीसदी पर आना बेहद चिंताजनक है। ग्लोबल आर्थिक संकट के चलते डगमगाए निवेशकों के भरोसे और दुनियाभर में मांग में स्थिरता आने से भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट का रुख बना हुआ है। विकास दर को बढ़ाने के लिए निवेश को बढ़ावा देने के लिए साहसिक उपाय तत्काल जरूरी हैं। खुदरा, बीमा, विमानन, पावर आदि में विदेशी निवेश की घोषणाएं निवेश के माहौल को सकारात्मक दिशा में ले जाने वाले प्रभावकारी कदम साबित होंगे। हालांकि, निवेशकों के सेंटीमेंट को मजबूत करने के लिए इन घोषणाओं को तत्काल प्रभावी किए जाने की आवश्यकता है।
- डॉ. एसपी शर्मा, मुख्य अर्थशास्त्री, पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री

सीआईआई
दूसरी तिमाही में जीडीपी की लगातार गिरावट बेहद चिंताजनक है। मैन्यूफैक्चरिंग और कृषि सेक्टर का प्रदर्शन काफी निराशाजनक है। ऐसे में राजकोषीय घाटे को काबू में करना और निवेश के माहौल को फिर से बेहतर बनाना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए। सब्सिडी को आगे भी तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता है। सितंबर में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा अच्छी पहल थी। आगे भी इस तरह के उपाय जरूरी हैं। अर्थव्यवस्था में निवेशकों के सेंटीमेंट को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय निवेश बोर्ड की स्थापना जल्द की जानी चाहिए। मौजूदा हालात में मौद्रिक स्तर पर राहत दिए जाने की जरूरत है। अगली समीक्षा में रेपो रेट और सीआरआर में कमी की जानी चाहिए।
- चंद्रजीत बनर्जी, महानिदेशक, सीआईआई
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

शरद से ब्रेकअप के बाद टूट गई थी दिव्यांका, इस एक्टर ने बदल दी जिंदगी

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

फिल्में न होने के बावजूद करोड़ों की मालकिन हैं रेखा, लाइफस्टाइल देख होगी जलन

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

इस नक्षत्र में जन्मे लोग आम और आंवले के पेड़ से रहें दूर, फायदे में रहेंगे

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

गॉडफादर न होने पर क्या होता है, कोई इस हीरोइन से पूछे! पहली फिल्म में कुछ यूं हुई थी बेबस

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

ईद पर सलमान खान से लेकर शबाना आजमी के घर बनता है ये लजीज खाना

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top