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दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में बढ़ेंगे नौकरी के मौके

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Tue, 18 Dec 2012 11:03 PM IST
south east asian countries will increase job opportunities
सिंगापुर, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड जैसे 10 दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भारतीय नौजवानों के लिए नौकरी के अवसर बढ़ने जा रहे हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के साथ सेवा और निवेश क्षेत्र में भारत के मुक्त व्यापार समझौते पर तकरीबन सहमति बन चुकी है। बुधवार को आसियान की मंत्रिस्तरीय बैठक में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
गुरुवार को आसियान सम्मेलन में इसकी घोषणा हो सकती है। इस समझौते के अमल में आने के बाद भारत के आईटी, हेल्थकेयर और बैंकिंग क्षेत्र के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया की राह आसान हो जाएगी, जबकि वहां की कंपनियों के लिए भारत में निवेश के रास्ते खुलेंगे। मंगलवार को दिल्ली में शुरू हुए इंडिया-आसियान व्यापार मेले में आसियान के अध्यक्ष और कंबोडिया के वाणिज्य मंत्री डॉ. चाम प्रसिद्ध ने कहा कि सेवा और निवेश में मुक्त व्यापार समझौता बातचीत के अंतिम दौर में पहुंच गया है।

बुधवार को इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि आसियान के साथ भारत का मौजूदा व्यापार 80 अरब डॉलर है जो 2015 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। उन्होंने इसके लिए उन्होंने क्षेत्रीय संपर्क को और मजबूर करने पर जोर दिया है।

शर्मा ने कहा कि हम इंफ्रास्ट्रक्चर, एग्रो-प्रोसेसिंग और रिटेल जैसे क्षेत्रों में आसियान अर्थव्यवस्थाओं के अनुभवों का लाभ उठाना चाहते हैं। इसी तरह भारतीय कंपनियां भी आसियान की उत्पादकता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती हैं। आसियान के साथ सेवा और निवेश क्षेत्र में भारत के मुक्त व्यापार समझौते के बारे में उन्होंने कहा कि बुधवार को होने वाली आसियान की मंत्रिस्तर की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि सेवा क्षेत्र में भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते के कई मुद्दों पर आसियान के कुछ देशों खासकर मलयेशिया को आपत्ति रही है। इन देशों की आशंका है कि इस समझौते से भारत के सेवा क्षेत्र खासकर आईटी उद्योग से उनकी कंपनियों को खतरा पैदा हो जाएगा। सेवा क्षेत्र में भारतीय कंपनियां का पहले ही दबदबा है। आसियान के साथ 2010 से लागू वस्तुओं के मुक्त व्यापार समझौते का भारत के बजाय उन देशों को अधिक फायदा मिला है। भारत इसकी भरपाई सेवा क्षेत्र से करना चाहता है।

एफटीए भारत को फायदा
- लोगों के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया में रोजगार के मौके बढ़ेंगे
- आईटी कंपनियों के लिए आसियान देशों के रास्ते खुलेंगे
- टूरिज्म, हेल्थकेयर और बैंकिंग क्षेत्र में साझेदारी बढ़ सकती है

आसियान को फायदा

- भारतीय जैसी बड़ी और उभरती अर्थव्यवस्था में निवेश करने के मौके बढ़ेंगे
- इंफ्रास्ट्रक्चर, अरबन डेवलपमेंट और ग्रीन टेक्नोलॉजी में भरपूर संभावनाएं
- कुशल कामगारों की कमी को भारत से पूरा कर करेंगे
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