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लघु उद्योग घटा रहे हैं उत्पादन की लागत

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क

Updated Wed, 12 Sep 2012 12:37 PM IST
Small industries are reducing production costs
उद्योग लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी से दबाव में है। आर्थिक हालात ठीक न होने के कारण मांग भी कमजोर हुई है। ऐसे में बढ़ती लागत से दबाव में चल रहे ये उद्योग खर्चों में कटौती पर जोर देने लगे हैं। एमएसएमई  बिजली, उत्पादन बनाते समय होने वाली बर्बादी, कर्मचारियों को दी जानी वाली कुछ सुविधाओं में कमी सहित तमाम खर्चे कम कर रहे है। कमजोर मांग के चलते ज्यादातर एमएसएमई ने कर्मचारियों से ओवरटाइम काम लेना बंद कर दिया है। साथ ही उद्योग नए निवेश से बचने के लिए विस्तार परियोजनाओं को भी टाल रहे है।
इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन नोएडा चैप्टर के अध्यक्ष एन. के. खरबंदा ने एक बातचीत में बताया कि महंगे कर्ज और कच्चे माल की वजह से उद्योग की निर्माण लागत काफी बढ़ गई है, जिससे उद्योग के मुनाफे में भारी कमी आई है। इन खराब हालात में मांग में कमी से मुसीबत और बढ़ गई है। ऐसे में उद्योग खर्चों में कटौती करने को मजबूर है। बकौल खरबंदा ज्यादातर काम दिन में ही करवाया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों को घर छोडऩे में होने वाले कार, पेट्रोल के खर्चे को बचाया जा सके। साथ ही बिजली का कम से कम उपयोग करने पर विशेष ध्यान है। उनका कहना है कि पहले जरूरत न होने पर भी कभी कभी बिजली चालू रहती थी, पर अब ऐसा नहीं कर रहे है।

लागत बढऩे से खर्चे कम करने की बात से एक अन्य उद्योगपति सुरेशचंद गुप्ता भी इत्तेफाक रखते है। गुप्ता बताते है कि ज्यादातर कारखानों में कर्मचारियों से ओवरटाइम काम लेना बंद कर दिया है। गुप्ता इसकी वजह बाजार में मांग कम होना बताते है। इसलिए उद्यमी जरूरत के हिसाब से उत्पाद बना रहे है। गुप्ता बताते है कि औद्योगिक इलाके में पैकिंग में उपयोग होने वाले टिन कंटेनर का बड़े पैमाने पर काम होता है, लेकिन इस बार इसकी मांग होने के कारण कारोबार कम है। कर्मचारियों से ओवरटाइम काम न लेने की बात से खरबंदा भी इत्तेफाक रखते है।

खर्चों में कटौती के बारे में फरीदाबाद लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष राजीव चावला का कहना है कि कारखानों में उत्पाद बनाने समय उसके रिजेक्शन की दर को कम करने पर ज्यादा जोर दे रहे है। साथ ही कम समय में अधिक उत्पाद तैयार करके उत्पादकता बढ़ाने पर बल है, जिससे कि लागत में कमी लाई जा सके। चावला बताते है कि लागत काफी बढऩे से मुनाफ बुरी तरह गिर गया है।

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