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पीएमओ ने दिए वॉलमार्ट-भारती करार की जांच के आदेश

नई दिल्ली/एजेंसी

Updated Thu, 11 Oct 2012 06:18 PM IST
pmo order to probe walmart bharti deal
खुदरा व्यापार के क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय कंपनी वॉलमार्ट और भारतीय कंपनी भारती के बीच करार में तय मानदंडों के उल्लंघन के आरोपों को देखते प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने इस करार की जांच के आदेश दिए हैं।
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सदस्य वीएस अच्युतानंदन ने मानसून सत्र में यह मामला उठाते हुए भारती के साथ निवेश के इस करार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मानदंडों के उल्लंघन और अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट द्वारा इरादतन नियमों की अनदेखी करने तथा उपभोक्ता संबंधी मानकों को धता बताने का आरोप लगाया था।

पीएमओ ने औद्योगिक नीति एवं संबर्धन विभाग (डीआईपीपी) को इन आरोपों की जांच करने के निर्देश जारी किए हैं। विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारियों के अनुसार पहले भारती रिटेल होल्डिंग्स के नाम से काम करने वाले सेडार सपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड में 456 करोड़ रुपये के निवेश का वॉलमार्ट होल्डिंग्स का सन 2010 का करार पूरी तरह से गैरकानूनी है, क्योंकि पूरी प्रक्रिया इस तरह संपन्न की गई कि भारत में मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई पर अभी पिछले सितंबर तक लागू पूर्ण रोक को बेअसर किया जा सके।

आरोप है कि सेडार सपोर्ट सर्विसेज अपनी शत प्रतिशत सहायक कंपनी भारती रिटेल के जरिए मल्टी ब्रांड खुदरा व्यापार का रहा था। दिसंबर 2009 में सेडार के आर्टिकिल्स ऑफ एसोसिएशन में संशोधन कर इसे जमीन जायदाद के कारोबार में परामर्श देने वाली कंपनी बना दिया गया। इसमें बगैर किसी पूर्व अनुमति के 100 प्रतिशत एफडीआई का प्रावधान है।

अपने आर्टिकिल्स में इस संशोधन के केवल चार महीने बाद 29 मार्च 2010 को सेडार दस-दस रूपये के मूल्य वाले अनिवार्य तौर पर पूर्ण परिवर्तननीय 45 करोड़ 58 लाख डिबेंचर जारी किए। वस्तुत: ये 70 रुपये प्रति शेयर के प्रीमियम पर परिवर्तननीय इक्विटी शेयर थे और करार के तहत वॉलमार्ट ने जिस कंपनी में 456 करोड़ रुपये का निवेश किया, वह जमीन जायदाद के कारोबार की एक परामर्शदात्री कंपनी थी।

केंद्र सरकार ने सितंबर के पहले सप्ताह में संसद को संबंधित सवालों पर जानकारी दी कि भारतीय रिजर्व बैंक के पास सेडार में एफडीआई का कोई रिकॉर्ड नहीं था। ऐसे में सवाल उठा कि सेडार ने करीब 10 अरब डॉलर की इस राशि का क्या किया।

आरोप है कि सेडार ने सह संपूर्ण राशि अपने पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी भारतीय रिटेल में निवेश कर दी, जो मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार क्षेत्र की कंपनी है, जबकि इस क्षेत्र में 51 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति केंद्र सरकार ने बमुश्किल महीने भर पहले सितंबर 2012 में ही दी है।

हालांकि इन सवालों पर वॉलमार्ट की चुप्पी के बीच भारती के प्रवक्ता ने सभी नियमों और प्रावधानों का पालन किए जाने और संबंधित प्राधिकारों को सभी जरूरी जानकारियां मुहैया कराने का दावा किया है। हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने इस करार को रद्द करने तक की मांग की है।
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