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आईआईपी पहुंची 16 महीने के टॉप पर

नई दिल्ली/एजेंसी

Updated Wed, 12 Dec 2012 07:11 PM IST
industrial production growth surges 8.2 pc in October
औद्योगिक विकास दर (आईआईपी) के ताजा आंकड़ों ने सरकार और उद्योग जगत दोनों को बड़ी राहत दी है। अक्तूबर में जबर्दस्त मजबूती के साथ उद्योगों में 8.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। यह 16 महीने का उच्चतम स्तर है। विशेषज्ञों के महज 5.4 फीसदी के अनुमान से कहीं बेहतर आंकड़े सामने आने पर वित्त मंत्री पी चिदंबरम, पीएमईएसी के अध्यक्ष सी रंगराजन सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों ने संतोष जताया है।
आईआईपी के आंकडे़ में मासिक और सालाना पर बड़ा उछाल देखने को मिला है क्योंकि सितंबर में इसका आंकड़ा नकारात्मक -0.4 फीसदी (-0.4) पर रहा था, जिसे संशोधित कर 0.7 फीसदी घोषित किया गया था। इसी तरह पिछले साल अक्तूबर में आईआईपी नकारात्मक 5 फीसदी पर दर्ज की गई थी।

उद्योग जगत के क्षेत्रवार आंकड़ों को देखा जाए, तो अक्टूबर में पूंजीगत वस्तुओं (कैपिटल गुड्स) की विकास दर बढ़कर 7.5 फीसदी पर पहुंच गई है जोकि पिछले साल अक्टूबर में -26.5 फीसदी के गहरे गर्त में थी। इसी तरह कारखाना (मैन्यूफैक्चरिंग) क्षेत्र में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई और यह 9.6 फीसदी के स्तर पर रही।

पिछले साल अक्तूबर में यह -6 फीसदी पर थी। खनन (माइनिंग) क्षेत्र में भी सुधार दिखा है लेकिन यह अब नकारात्मक क्षेत्र सेक बाहर नहीं निकल पाया है। अक्तूबर में माइनिंग सेक्टर की विकास दर -5.9 फीसदी से सुधर कर -0.1 फीसदी रही।

बिजली क्षेत्र की विकास दर मामूली नरमी के साथ 5.6 फीसदी से फिसल कर 5.5 फीसदी पर रही। अक्तूबर में उपभोक्ता उत्पादों (कंज्यूमर गुड्स) की ग्रोथ बढ़कर 13.2 फीसदी रही, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (सीडी) क्षेत्र में सालाना आधार पर बड़ा सुधार दर्ज हुआ और यह -0.4 फीसदी से बढ़कर 16.5 फीसदी रही।

चिदंबरम व रंगराजन को और सुधार की उम्मीद
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आईआईपी में सुधार पर संतोष जताते हुए कहा है कि अक्तूबर का आंकड़ा काफी उत्साहजनक रहै। उद्योगों की रफ्तार में तेजी आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश की सरकार की ओर से आर्थिक सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों के बाद देश की अर्थव्यवस्था रिकवरी की ओर बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि अप्रैल से नवंबर की अवधि में प्रत्यक्ष करों की वसूली संतोषजनक रहने से भी अर्थव्यवस्था को बल मिला है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति (पीएमईएसी) के चेयरमैन सी रंगराजन का कहना है कि अक्तूबर में आईआईपी उम्मीद से बेहतर रही है।

वित्त वर्ष 2013 की आर्थिक विकास दर चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था की चाल पर निर्भर करेगी। जीडीपी की रफ्तार को 8-9 फीसदी तक पहुंचाने के लिए कारखाना सेक्टर की विकास दर 4 फीसदी तक पहुंचनी जरूरी है। रंगराजन ने अक्टूबर-मार्च छमाही में आईआईपी 7 फीसदी के आसपास रहने की उम्मीद जताई है।

आरबीआई टाल सकता है दरों में कटौती
आईआईपी के आंकड़े में सुधार ने जहां सरकार को मुस्कराने की एक वजह दी है, वहीं उद्योग जगत और अर्थशास्त्रियों का एक वर्ग इन आंकड़ों को देख कर आशंका की स्थिति में है। इन्हें आशंका इस बात की है कि उद्योगों में रफ्तार लौटने की बात कह कर रिजर्व बैंक आगामी मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती करने से एक बार फिर पल्ला झाड़ सकता है।

खुद पीएमईएसी के अध्यक्ष सी रंगराजन का कहना है कि मूल दरों में कटौती के लिए महंगाई दर में भी गिरावट आना जरूरी है। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर में गिरावट आने पर आरबीआई की तरफ से जनवरी में दरों में कटौती संभव है। आरबीआई के लिए महंगाई दर पर नियंत्रण सबसे ज्यादा जरूरी है।

महंगाई दर में बढ़ोतरी से आरबीआई के लिए दरों में कटौती करना मुश्किल होगा। जानकार मानते हैं कि आईआईपी में सुधार के बाद तुरंत आरबीआई दरों में कटौती नहीं करेगा। हालांकि जनवरी के बाद मार्च तक दरों में 0.5 फीसदी की कटौती मुमकिन है।
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