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आर्थिक सहयोग की नई इबारत लिखेंगे भारत-चीन

नाम पेन्ह से उदय कुमार

Updated Tue, 20 Nov 2012 12:13 AM IST
india and china will write new dictation of economic cooperation
भारत और चीन आर्थिक क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए अब रिश्तों की गहराई में उतरने को तैयार हैं। इसके साथ ही दोनों देश सीमा पर शांति और स्थायित्व बनाए रखने के लिए भी बातचीत का सिलसिला जारी रखने पर सहमत हैं। चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के साथ पीएम डॉ. मनमोहन सिंह की सोमवार को यहां हुई बातचीत में दोनों देशों में और नजदीक आने की उत्सुकता दिखाई दी।
आसियान के साथ शिखर वार्ता और पूर्व एशियाई देशों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने यहां आए दोनों देश के प्रधानमंत्रियों ने करीब आधे घंटे तक बातचीत की। पूरी तरह औपचारिक माहौल में हुई इस वार्ता के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह के साथ वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और विदेश सचिव रंजन मथाई समेत कई अफसर भी शामिल रहे।

यह बातचीत हालांकि मुख्य रूप से दोनों देशों में आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रही, लेकिन सीमा क्षेत्र पर विवाद प्रासंगिक रूप से इसमें सामने आया। बैठक के बाद विदेश सचिव रंजन मथाई ने यहां पत्रकारों से बातचीत में इस ओर इशारा भी किया। उनके मुताबिक दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व में सीमा क्षेत्र के मुद्दे पर उनके विशेष प्रतिनिधियों में वार्ता जारी रखने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर रहा।

डॉ. मनमोहन सिंह ने ढांचागत क्षेत्र में निवेश के लिए चीन को न्योता दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे रोजगार बढ़ाने के साथ व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिल सकेगी। सूचना प्रौद्योगिकी, फॉर्मा और सेवा क्षेत्र में चीन में भारत के निर्यात को बढ़ावा दिए जाने पर प्रधानमंत्री ने खासतौर पर जोर दिया। भारत और चीन ने आपसी सहयोग बढ़ाने लिए दोनों देशों की प्रांतीय सरकारों के स्तर पर बातचीत के दरवाजे खुलेंगे। साथ ही दोनों देशों के युवाओं में नजदीकी (यूथ एक्सचेंज) और विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में दोनों देशों के लोगों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

हमारे बाजार पर नजर
भारत और चीन के बीच रिश्तों में आए इस सकारात्मक बदलाव को दक्षिण एशियाई क्षेत्र में चीन के वर्चस्व को तोड़ने के लिए अमेरिका के जोरदार प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं मंदी की मार झेल रहे अमेरिका और जापान जैसे देश दक्षिण एशिया के बड़े बाजार पर कब्जा करने की होड़ लगा रहे हैं। इससे मुकाबले के लिए भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने को चीन की महत्वपूर्ण रणनीति माना जा रहा है।

दक्षिण चीन सागर विवाद को लेकर कई देशों की नजर मनमोहन-जियाबाओ वार्ता पर टिकी थी। उन्हें इस मसले पर भारत का रुख साफ होने की उम्मीद थी। विदेश सचिव रंजन मथाई ने इससे संबंधित सवाल पर साफ किया कि दोनों देशों की बातचीत में इस मसले कोई बातचीत नहीं हुई। इसे भी भारत से चीन की बढ़ती नजदीकी के तौर पर देखा जा रहा है।

1- मनमोहन से 14 मुलाकातों का हवाला दिया जियाबाओ ने
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात में जियाबाओ ने बड़े ही भावुकतापूर्ण तरीके से बीते आठ सालों में अपनी 14 मुलाकातों का हवाला दिया। उन्होंने याद किया कि किस तरह आपसी बातचीत में उन्होंने दोनों देशों में संबंध बेहतर बनाने के प्रयास किए।

2- अच्छा तो अब हम चलते हैं...
डा. मनमोहन सिंह से द्विपक्षीय बातचीत खत्म होने के समय चीन के पीएम वेन जियाबाओ ने इसे अपनी अंतिम मुलाकात मानते हुए विदाई ली। दरअसल अगले साल मार्च में चीन की सत्ता में परिवर्तन के साथ ही वहां नए पीएम काम संभाल लेंगे।
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