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IMF के जीडीपी पूर्वानुमान में हुई गणना की चूक

नई दिल्ली/एजेंसी

Updated Tue, 16 Oct 2012 06:59 PM IST
IMF GDP projection has statistical problem Montek
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के 2012 के दौरान देश की जीडीपी के 4.9 फीसदी रहने के पूर्वानुमान पर असहमति जताते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि इस आंकड़े में सांख्यिकीय (गणितीय) समस्या है।
अहलूवालिया ने ओईसीडी के एक सम्मेलन में कहा कि जीडीपी को लेकर आईएमएफ का यह अनुमान सांख्यिकी स्तर पर हुई चूक का नतीजा है। 2012 के लिए जीडीपी का पूर्वानुमान 4.9 फीसदी रखना वाजिब नहीं लगता है। जबकि, चालू वित्तवर्ष की पहली छमाही में ही देश की जीडीपी 5.5 फीसदी दर्ज की गई है। जीडीपी विकास दर के 4.9 फीसदी रहने के आईएमएफ के अनुमान से ऐसा लगता है आगे अर्थव्यवस्था में गिरावट आने वाली है। जबकि, आर्थिक गिरावट की ऐसी स्थिति की आशंका नजर नहीं आ रही है।

उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि आईएमएफ तथ्यों से पूरी तरह अवगत नहीं था, जिसके चलते जीडीपी आंकड़े को लेकर थोड़ा बहुत अंतर आया है। आईएमएफ ने केवल बाजार भाव के आधार पर जीडीपी का आकलन किया है। बाजार भाव पर जीडीपी का आकलन और उत्पादन लागत पर जीडीपी के आकलन में बड़ा अंतर है।

आईएमएफ जीडीपी की गणना बाजार भाव पर करती है, जबकि भारतीय एजेंसियां उत्पादन लागत के आधार पर जीडीपी का आंकड़ा निर्धारित करती हैं। बाजार भाव पर जीडीपी के आकलन में अप्रत्यक्ष कर शामिल होते हैं, जबकि उत्पादन लागत में इसे शामिल नहीं किया जाता है।

गरीबी में आएगी 1.5 फीसदी की कमी
अहलूवालिया ने कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान गरीबी में सालाना 1.5 फीसदी की कमी आएगी। अहलूवालिया ने आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के चौथे विश्व सम्मेलन में कहा कि गरीबी मापने का क्या पैमाना होना चाहिए। इसको लेकर मतभेद है, लेकिन यह सच्चाई है कि गरीबी में कमी आ रही है।

उन्होंने बताया कि 10वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान देश में गरीबी में 0.76 फीसदी की वार्षिक कमी आई थी और 11वीं पंचवर्षीय योजना में गरीबी में 2 फीसदी सालाना कमी का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन इसके 1.5 फीसदी पर रहने की संभावना है। इसका आंकड़ा शीघ्र जारी किया जाएगा।

अहलूवालिया ने कहा कि 10वीं योजना की तुलना में 11वीं योजना में गरीबी में दोगुना कमी आई है, लेकिन यह निर्धारित लक्ष्य से कम है। गरीबी के आंकड़ों को लेकर मतभेद होने की वजह से राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण (एनएसएस) को नया सर्वेक्षण करने के लिए कहा गया था और वह शीघ्र ही आंकड़े जारी करने वाला है।

उन्होंने कहा कि बच्चों में कुपोषण सबसे अधिक है। अभी 2005-06 के आंकडे़ उपलब्ध है, लेकिन अब प्रत्येक वर्ष एनएसएस रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है और अब इसके नए आंकडे़ उपलब्ध होंगे।
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