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उम्मीद से बेहतर रहे आईआईपी के आंकड़े

नई दिल्ली/एजेंसी

Updated Fri, 12 Oct 2012 08:02 PM IST
IIP grows in Aug shows signs of turnaround
कारखाना क्षेत्र की धीमी रफ्तार और पूंजीगत वस्तुओं के क्षेत्र में ढीले प्रदर्शन की वजह से इस वर्ष अगस्त में देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में पिछले साल की इसी अवधि के 3.4 प्रतिशत की तुलना में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले साल की तुलना में रफ्तार सुस्त रहने के बावजूद अगस्त में आईआईपी जुलाई के 0.1 प्रतिशत के मुकाबले बेहतर रहा। माह के दौरान आईआईपी में 1.1 प्रतिशत बढ़त का अनुमान लगाया जा रहा था।
आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले पांच माह के दौरान आईआईपी में महज 0.4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो पिछले साल इस अवधि में 5.6 फीसदी थी। आईआईपी में 76 प्रतिशत का योगदान करने वाले कारखाना (विनिर्माण) क्षेत्र की बढ़त महज 2.9 फीसदी रही, जो पिछले साल 3.9 प्रतिशत थी। अप्रैल से अगस्त तक की अवधि में यह क्षेत्र स्थिर रहा, जोकि पिछले साल छह प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ा था।

पूंजीगत वस्तुओं के क्षेत्र का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा। यह पिछले साल की चार प्रतिशत बढ़त के मुकाबले इस वर्ष अगस्त में 1.7 फीसदी ऋणात्मक रहा। अप्रैल से अगस्त के दौरान यह 7.3 प्रतिशत की बढ़त की तुलना में 13.8 प्रतिशत ऋणात्मक रहा। खनन क्षेत्र का प्रदर्शन थोड़ा सुधरा और यह पिछले साल के 5.5 प्रतिशत ऋणात्मक की तुलना में दो प्रतिशत बढ़त में रहा।

उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में 2.1 प्रतिशत की तुलना में पांच प्रतिशत की बढ़त रही। आईआईपी में शामिल कारखाना क्षेत्र के तहत आने वाले 22 उद्योग समूह में से इस वर्ष अगस्त में 13 में बढ़त दर्ज की गई। उपभोक्ता टिकाऊ क्षेत्र की रफ्तार पांच से घटकर चार प्रतिशत रह गई।

उपभोक्ता गैरटिकाऊ क्षेत्र का प्रदर्शन शानदार रहा। यह गत अगस्त के 0.7 प्रतिशत के ऋणात्मक की तुलना में 5.8 प्रतिशत सुधरा। बेसिक सामानों का उत्पादन 5.8 प्रतिशत के मुकाबले 2.8 प्रतिशत की बढ़त ही हासिल कर पाया। बिजली उत्पादन 9.5 प्रतिशत के मुकाबले 1.9 प्रतिशत ही बढ़ सका।

औद्योगिक उत्पादन में और तेजी आएगी: रंगराजन
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में आई तेजी से आगामी महीनों में आईआईपी में और अधिक तेजी आएगी। रंगराजन ने कहा कि आईआईपी के आंकड़ों से परिवर्तन के संकेत मिले हैं, क्योंकि जहां तक विनिर्माण क्षेत्र का सवाल है तो आगामी महीनों में इसमें और तेजी आएगी। पूरे वित्तवर्ष में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर तीन से चार प्रतिशत रहने की संभावना है।

आईआईपी में बढ़ोतरी मुख्य रूप से उत्पादन में वृद्धि होने से दिख रही है। उन्होंने कहा कि सितंबर महीने की मुद्रास्फीति के आंकड़े पर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति निर्भर करेगी। उनका मानना है कि रिजर्व बैंक की नीति मुख्य रूप से मुद्रास्फीति पर आधारित होगी।

औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक (प्रतिशत में)
आधार वर्ष: 2004-05=100
माह सूचकांक

अगस्त, 2012    2.7 (अनुमानित)
जुलाई, 2012    -0.2 (संशोधित)
जून, 2012    -1.8
मई, 2012    2.5
अप्रैल, 2012    -1.3
मार्च, 2012    -2.8
फरवरी, 2012    4.3
जनवरी, 2012    1.0
दिसंबर, 2011    2.7
नवंबर, 2011    6.0
अक्तूबर, 2011    -5.0
सितंबर, 2011    2.5
अगस्त, 2011    3.4
जुलाई, 2011    3.7

(स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय)
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