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50 हजार लगाइए, 25 हजार पर टैक्स बचाइए

नई दिल्ली/ब्यूरो

Updated Sat, 22 Sep 2012 01:58 PM IST
government started rajiv gandhi equity savings scheme
पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने शुक्रवार को कई अहम फैसले किए। छोटे निवेशकों के लिए राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम (आरजीईएसएस) को मंजूरी दे दी है, जबकि विदेश से कर्ज लेने वाली कंपनियों को राहत देते हुए विदहोल्डिंग टैक्स को अगले तीन साल तक के लिए 20 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। इन दोनों कदमों की घोषणा पिछले साल आम बजट में हुई थी, जिन्हें अब सरकार ने मंजूरी दे दी है।
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सोने जैसे निष्क्रिय साधन में निवेश करने के बजाय यह योजना लोगों को निवेश का नया विकल्प देगी। इससे न सिर्फ बचत और घरेलू पूंजी बाजार को बढ़ावा देगी, बल्कि इससे देश में इक्विटी निवेश की संस्कृति विकसित होगी।

वित्त मंत्री ने बताया कि राजीव गांधी इक्विटी स्कीम का फायदा पहली बार इक्विटी बाजार (शेयर आदि) में निवेश करने वाले ग्राहकों को मिलेगा। योजना में 10 लाख रुपये या इससे कम आय वाले लोग निवेश कर सकेंगे। इसके तहत प्रतिवर्ष अधिकतम 50 हजार रुपये का निवेश किया जा सकेगा, जिस पर जमा राशि के 50 फीसदी राशि के बराबर आयकर में छूट मिलेगी। योजना के तहत लॉकइन अवधि तीन साल रखी गई है। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) और म्यूचुअल फंड को भी इस योजना के दायरे में रखा गया है।

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने विदेश से कर्ज लेने वाली भारतीय कंपनियों पर लगने वाले विदहोल्डिंग टैक्स में भी भारी रियायत दी है। अगले तीन साल तक इसकी दर 20 की बजाय 5 फीसदी होगी। यह छूट जुलाई 2012 से जून 2015 तक लिए जाने वाले कर्ज पर लागू होगी। विदेशी पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।

पिछले साल के आम बजट में सरकार ने विदेशी कर्ज पर इस तरह की टैक्स छूट देने की बात कही थी, जिसे शुक्रवार को मंजूरी दी गई है। विदहोल्डिंग टैक्स में छूट का सबसे ज्यादा फायदा इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की कंपनियों को मिल सकता है। क्योंकि इस सेक्टर की कई कंपनियां हाईवे और मेट्रो जैसी परियोजनाओं के लिए विदेश से ज्यादा कर्ज लेती हैं। सरकार ने विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए भारतीय कंपनियों की ओर से जारी फॉरेन करंसी बांड पर मिलने वाले ब्याज की आय पर भी टैक्स में 5 फीसदी छूट देने का फैसला किया है।

सेबी के अन्य फैसले
शेयर बाजार में छोटे निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सेबी ने खास डीमैट अकाउंट खुलवाने का फैसला 27 अगस्त, 2012 लिया था। 1 अक्तूबर, 2012 से सेबी का यह फैसला लागू होगा खाते के जरिए निवेशक एक सीमा तक शेयरों में निवेश कर सकेंगे और 50 हजार रुपये तक की शेयर खरीद सकेंगे जिस पर सालाना शुल्क नहीं लगेगा। बीएसडीए (बेसिक सर्विस डीमैट एकाउंट) खातों में निवेशक एक समय में दो लाख रुपये से अधिक राशि के शेयर नहीं रख सकेंगे।

एक निवेशक को एक ही खाता खोलने की अनुमति होगी। खातों में 50 हजार रुपये तक की होल्डिंग पर डीपी को सालाना शुल्क नहीं देना होगा। 50 हजार से दो लाख रुपये तक की होल्डिंग पर सालाना शुल्क 100 रुपये से अधिक नहीं होगा। वर्तमान में डीमैट खाते के लिए करीब 400 रुपये से लेकर 800 रुपये तक सालाना रखरखाव का खर्च आ जाता है, चाहे खाते में कुछ भी शेयर या प्रतिभूति हो या न हो।

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