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खाद्य सुरक्षा विधेयक में किसानों की अनदेखी: स्वामीनाथन

नई दिल्ली/ब्यूरो

Updated Wed, 28 Nov 2012 09:34 PM IST
farmers ignore in food security bill said swaminathan
जाने-माने कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमएस स्वामीनाथन का कहना है कि प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक में सरकार ने किसानों और स्थानीय निकायों को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के महत्व पर जोर देते हुए डॉ. स्वामीनाथन ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,285 रुपये प्रति कुंतल से बढ़ाकर 1,450 रुपये प्रति कुंतल की जरूरत बताई है।
उन्होंने कहा कि खेती की लागत बढ़ने के बावजूद सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य पिछले साल के बराबर रखा है, इसलिए अभी तक इसकी घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने कहा है कि सरकार को खेती के बढ़ते खर्च को ध्यान में रखते हुए गेहूं के लिए लागत से दोगुना ज्यादा एमएसपी तय करना चाहिए।

कॉमनवेल्थ जर्नलिस्ट एसोसिएशन और अक्षय पात्र फाउंडेशन की ओर से भारत में भूखमरी के विषय पर आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद डॉ. स्वामीनाथन ने राशन के बजाय नकद भुगतान की योजना को भी खतरनाक करार दिया है।

सबको भोजन के अधिकार की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को किसानों और ग्राम सभाओं को साथ लेकर काम करना होगा। लेकिन प्रस्तावित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में इनकी पूरी तरह अनदेखी की गई है। दालों के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग करते हुए उन्होंने गेहूं के लिए लागत से दोगुना एमएसपी तय करने को जरूरी बताया है।

परिचर्चा में भाग लेते हुए लोकसभा सांसद अभिजीत मुखर्जी ने खेती योग्य भूमि के लगातार कम होने पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने मनरेगा पर खर्च हो रहे बजट के बेहतर इस्तेमाल की जरूरत पर भी जोर दिया। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट कमिश्नर के सलाहकार बिराज पटनायक ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की तरह खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आम सहमति होनी चाहिए।

प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक को निराशाजनक बताते हुए पटनायक ने कहा कि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत दुनिया में भूख और कुपोषण का सबसे बड़ा केंद्र है। लेकिन अच्छा संकेत यह है कि अब देश में इस समस्या को स्वीकार किया जा रहा है और अदालत ने इसमें  अहम भूमिका अदा की है।

कृषि नीति के विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने देश भर में तेजी से हड़पी जा रही खेती की जमीन को खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है। शर्मा ने दावा किया कि मायावती के कार्यकाल में जिन 8 एक्सप्रेस-वे बनाने का फैसला किया गया है, उससे 25 हजार गांव प्रभावित होंगे और देश के सबसे बड़े अन्न उत्पादक राज्य में खाद्य संकट खड़ा हो सकता है।
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