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बाजार संबंधी मामलों के लिए अलग अदालतें जरूरी

मुंबई/एजेंसी

Updated Mon, 22 Oct 2012 08:16 PM IST
different courts for market issues
बाजार में कारोबार संबंधी गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई और निपटारे के लिए बाजार नियामक सेबी ने अलग से अदालत बनाने की जरूरत जताई है। सेबी ने सरकार से मांग की है कि इसके लिए वह अलग से न्यायालय का गठन करे ताकि ऐसे मामलों के दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके।
बाजार में गड़बड़ियों के कई मुकदमों में वर्षों बाद भी फैसला न हो पाने पर चिंता जताते हुए सेबी के अध्यक्ष यूके सिन्हा ने कहा कि ऐसे मामलों के निपटारे के लिए विशेष न्यायालयों की जरूरत है और सेबी ने सरकार से इसके लिए गुजारिश की है।

भारतीय मूल के बैंकर रजत गुप्ता को कारोबारी हेराफेरी के मामले में अमेरिकी कोर्ट में तेजी से हुई सुनवाई और गुप्ता को जल्द ही कई वर्षों की जेल मिलने की संभावनाओं के बारे में सिन्हा ने कहा कि भारत और अमेरिका की कानूनी प्रक्रियाओं व प्रावधानों में काफी अंतर है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में जांचकर्ता एजेंसियों को कई तरह की शक्तियां प्राप्त हैं, जिससे कि वह मामले को तेजी से आगे बढ़ाते हुए दोषियों को उचित सजा दिलवा पाते हैं। हमारे यहां ऐसे मामलों में पेनाल्टी लगाए जाने पर ज्यादा जोर है। हालांकि अब इनसाइडर ट्रेडिंग जैसे मामलों में पेनाल्टी की रकम पहले की अपेक्षा काफी बढ़ा दी गई है।

हमारे यहां भी पेनाल्टी के बजाय मुकदमा चलाकर सजा दिलाने संबंधी प्रावधान हैं, पर अकसर ऐसे मामलों में देखा गया है कि कई-कई वर्षों तक मुकदमा चलता रहने पर भी मामले में कोई फैसला नहीं हो पाता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हमारे यहां ऐसे मामलों के लिए खासतौर पर नियुक्त किए गए जज उपलब्ध नहीं होते।

मुकदमों के जल्द निपटारे और दोषियों को सजा दिलाने हमारे यहां ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए खासतौर पर जजों की नियुक्ति किए जाने और विशेष अदालते शुरू किए जाने की जरूरत है। यदि ऐसा हो पाता है तो स्थिति में काफी सुधार आ सकता है।

सिन्हा ने कहा कि हम बाजार संबंधी मामलों के जल्द निपटारे के लिए सरकार से पहले भी कई बार गुजारिश कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि खास तरह के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन का प्रावधान स्पेशल कोर्ट्स एक्ट 1979 में किया गया है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार के मामलों और सीबीआई द्वारा चलाए जा रहे मामलों के लिए विशेष अदालतें भी मौजूद हैं।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट भी यह कह चुका है कि मामलों के तेजी से निपटारे के लिए सरकार और और विशेष अदालते गठित करनी चाहिए। 1992 में हर्षद मेहता कांड के बाद सरकार प्रतिभूति संबंधी मामलों के निपटारे के लिए विशेष अदालत बनाने की दिशा में सक्रिय भी हुई थी।

उन्होंने कहा कि इनसाइडर ट्रेडिंग जैसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए सौदों के लेन-देन संबंधी रिकॉर्ड को जांचकर्ताओं की पहुंच के भीतर लाना होगा, ताकि ऐसे मामलों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
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